{"_id":"5d7691e18ebc3e0164406c2d","slug":"civic-amenities-pilibhit-news-bly375476691","type":"story","status":"publish","title_hn":"एडीएम ने एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर खड़े किए सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एडीएम ने एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर खड़े किए सवाल
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पीलीभीत। डीएम आवास से सटी बेशकीमती शत्रु संपत्ति (जमीन) का अपने नाम बैनामा कराने वाले रसूखदारों और उनके मददगार राजस्व विभाग के अफसरों-कर्मचारियों को बचाने के लिए प्रशासन जांच के नाम पर लगातार पैंतरेबाजी कर रहा है। डीएम के आदेश के बावजूद यह जमीन अब तक राजस्व अभिलेखों में फिर से बतौर शत्रु संपत्ति दर्ज नहीं हो सकी है। इधर, राजस्व अभिलेखागार से कई वर्षों की खतौनियां गायब होने के संवेदनशील मामले में भी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। शासन के निर्देश पर एडीएम (वित्त एवं राजस्व) अतुल कुमार सिंह ने दोबारा जांच की तो एसडीएम सदर वंदना त्रिवेदी की जांच ही सवालों के घेरे में आ गई है।
शहर के कई रसूखदारों ने जिले में तैनात रहे एक बड़े अफसर की शह पर डीएम आवास से सटी करोड़ों रुपये कीमत की बेशकीमती जमीन पर ध्यान योग केंद्र की आड़ में कब्जा कर लिया था। यह मामला जब मौजूदा डीएम वैभव श्रीवास्तव के संज्ञान में आया तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। रसूखदारों को जब अपनी गर्दन फंसती दिखी तो उन्होंने आनन-फानन में ध्यान योग केंद्र की जमीन से कब्जा छोड़ दिया, लेकिन उसके आसपास की कई एकड़ जमीन पर अपने नाम बैनामा होने होने की बात कहकर मालिकाना हक जता दिया। डीएम ने जब इस जमीन की जांच पड़ताल कराई तो यह शत्रु संपत्ति पाई गई। तब यह सवाल उठा कि आखिर शत्रु संपत्ति का रसूखदारों के नाम बैनामा कैसे हो गया। डीएम के निर्देश पर जब तहसीलदार सदर ने राजस्व निरीक्षक ओमप्रकाश और लेखपाल विकास वर्मा से संयुक्त जांच कराई तो न केवल जमीन के शत्रु संपत्ति होने की पुष्टि हुई बल्कि यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि राजस्व अभिलेखागार से फसली वर्ष 1368 से 1379 तक की खतौनियां ही गायब हैं। हालांकि राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने इस बात को अपनी जांच में स्पष्ट रूप से कहने के बजाय बड़ी चालाकी से घुमा फिराकर कहा। दोनों ने संयुक्त जांच रिपोर्ट में कहा कि फसली वर्ष 1367 के बाद बस्ते में फसली वर्ष 1380 की खतौनी उपलब्ध मिलीं। यानी इसके बीच की खतौनियां बस्ते में नहीं मिलीं, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
अमर उजाला ने राजस्व अभिलेखागार से खतौनियां गायब होने के मामले को प्रमुखता से उठाया तो डीएम ने एसडीएम वंदना त्रिवेदी को इसकी जांच सौंप दी। एसडीएम ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी, उसमें कहा गया है कि फसली वर्ष 1367 से 1379 तक के अभिलेख अभिलेखागार में या तो जीर्णशीर्ण हैं या पठनीय नहीं हैं, जिस कारण इन वर्षों में खतौनियों में हुए परिवर्तनों के संबंध में कोई टिप्पणी किया जाना संभव नहीं है। एडीएम की जांच रिपोर्ट के बाद यह साबित हो गया है कि एसडीएम ने इस बेहद गंभीर मामले की जांच गंभीरता से नहीं की।
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शासन से शिकायत के बाद जब एडीएम अतुल सिंह ने दोबारा इस मामले की जांच की तो एसडीएम की जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में आ गई। एडीएम ने सात सितंबर को जिलाधिकारी को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि अभिलेखागार से फसली वर्ष 1367 से 1379 तक की खतौनियां गायब कर दी गईं हैं, जबकि भूलेख अभिलेखपाल (आरआरके) ने अवगत कराया है कि संबंधित गांव का गोशवारा भी अत्यंत जीर्णशीर्ण है। गोशवारे एवं बस्ता लेखपाल के परीक्षण से ज्ञात हुआ है कि 1361 से 1363 फसली वर्ष, 1368 से 1370 और 1371 से 1374 फसली वर्ष की खतौनियां उपलब्ध ही नहीं हैं। एडीएम ने अब इन खतौनियों के गायब होने के मामले की जांच अतिरिक्त उप जिला मजिस्ट्रेट रामदास को सौंप दी है।
शत्रु संपत्ति मामले की जांच रिपोर्ट पिछले दिनों निदेशालय भेज दी गई थी। अग्रिम कार्रवाई का निर्णय भी निदेशालय स्तर से होगा। कार्रवाई को लेककर फिलहाल कोई दिशा निर्देश नहीं मिले है। एडीएम स्तर से की गई जांच की मुझे जानकारी नहीं है। इसका भी पता लगाया जाएगा।
-वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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शहर के कई रसूखदारों ने जिले में तैनात रहे एक बड़े अफसर की शह पर डीएम आवास से सटी करोड़ों रुपये कीमत की बेशकीमती जमीन पर ध्यान योग केंद्र की आड़ में कब्जा कर लिया था। यह मामला जब मौजूदा डीएम वैभव श्रीवास्तव के संज्ञान में आया तो उन्होंने जांच के आदेश दिए। रसूखदारों को जब अपनी गर्दन फंसती दिखी तो उन्होंने आनन-फानन में ध्यान योग केंद्र की जमीन से कब्जा छोड़ दिया, लेकिन उसके आसपास की कई एकड़ जमीन पर अपने नाम बैनामा होने होने की बात कहकर मालिकाना हक जता दिया। डीएम ने जब इस जमीन की जांच पड़ताल कराई तो यह शत्रु संपत्ति पाई गई। तब यह सवाल उठा कि आखिर शत्रु संपत्ति का रसूखदारों के नाम बैनामा कैसे हो गया। डीएम के निर्देश पर जब तहसीलदार सदर ने राजस्व निरीक्षक ओमप्रकाश और लेखपाल विकास वर्मा से संयुक्त जांच कराई तो न केवल जमीन के शत्रु संपत्ति होने की पुष्टि हुई बल्कि यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि राजस्व अभिलेखागार से फसली वर्ष 1368 से 1379 तक की खतौनियां ही गायब हैं। हालांकि राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने इस बात को अपनी जांच में स्पष्ट रूप से कहने के बजाय बड़ी चालाकी से घुमा फिराकर कहा। दोनों ने संयुक्त जांच रिपोर्ट में कहा कि फसली वर्ष 1367 के बाद बस्ते में फसली वर्ष 1380 की खतौनी उपलब्ध मिलीं। यानी इसके बीच की खतौनियां बस्ते में नहीं मिलीं, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
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अमर उजाला ने राजस्व अभिलेखागार से खतौनियां गायब होने के मामले को प्रमुखता से उठाया तो डीएम ने एसडीएम वंदना त्रिवेदी को इसकी जांच सौंप दी। एसडीएम ने जो जांच रिपोर्ट सौंपी, उसमें कहा गया है कि फसली वर्ष 1367 से 1379 तक के अभिलेख अभिलेखागार में या तो जीर्णशीर्ण हैं या पठनीय नहीं हैं, जिस कारण इन वर्षों में खतौनियों में हुए परिवर्तनों के संबंध में कोई टिप्पणी किया जाना संभव नहीं है। एडीएम की जांच रिपोर्ट के बाद यह साबित हो गया है कि एसडीएम ने इस बेहद गंभीर मामले की जांच गंभीरता से नहीं की।
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शासन से शिकायत के बाद जब एडीएम अतुल सिंह ने दोबारा इस मामले की जांच की तो एसडीएम की जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में आ गई। एडीएम ने सात सितंबर को जिलाधिकारी को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं किया है कि अभिलेखागार से फसली वर्ष 1367 से 1379 तक की खतौनियां गायब कर दी गईं हैं, जबकि भूलेख अभिलेखपाल (आरआरके) ने अवगत कराया है कि संबंधित गांव का गोशवारा भी अत्यंत जीर्णशीर्ण है। गोशवारे एवं बस्ता लेखपाल के परीक्षण से ज्ञात हुआ है कि 1361 से 1363 फसली वर्ष, 1368 से 1370 और 1371 से 1374 फसली वर्ष की खतौनियां उपलब्ध ही नहीं हैं। एडीएम ने अब इन खतौनियों के गायब होने के मामले की जांच अतिरिक्त उप जिला मजिस्ट्रेट रामदास को सौंप दी है।
शत्रु संपत्ति मामले की जांच रिपोर्ट पिछले दिनों निदेशालय भेज दी गई थी। अग्रिम कार्रवाई का निर्णय भी निदेशालय स्तर से होगा। कार्रवाई को लेककर फिलहाल कोई दिशा निर्देश नहीं मिले है। एडीएम स्तर से की गई जांच की मुझे जानकारी नहीं है। इसका भी पता लगाया जाएगा।
-वैभव श्रीवास्तव, डीएम