{"_id":"60b527588ebc3e0bfc10ea54","slug":"civcamenities-pilibhit-news-bly448298231","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसरों की लापरवाही और कोरोना काल में फिर लटक गया काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसरों की लापरवाही और कोरोना काल में फिर लटक गया काम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। अमृत योजना के तहत करीब 16 हजार घरों में पेयजल कनेक्शन देने की योजना शुरू हुए तीन साल से अधिक समय बीत चुका है। यह योजना दो चरणों में पूरी होनी है, मगर निर्माणदायी संस्था की सुस्त चाल से योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। अधिकांश स्थानों पर पाइप लाइन बिछाने का ही काम पूरा नहीं हो सका है। जबकि, मार्च 2021 तक काम पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित था। फिलहाल पहले चरण के काम में बिजली कनेक्शन नहीं मिल सके हैं, जबकि दूसरे चरण के काम में पाइप लाइन और पंपिंग सेट का काम बाकी है। संक्रमण की दूसरी लहर आने के बाद अब यह काम पूरी तरह से ठप हो गया है।
शहर में 27 वार्ड हैं, जिनमें 26 हजार से अधिक मकान हैं। करीब ढाई लाख की आबादी है। नगरपालिका की ओर से पंप के माध्यम से दस हजार मकानों को पानी की सप्लाई का दावा किया गया है, मगर धरातल पर उन्हें भी सप्लाई नहीं मिलती है। कभी कभार पानी पहुंचता है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को सरकारी नल या मोटर का ही सहारा लेना पड़ता है। शासन के द्वारा अमृत योजना के माध्यम से वर्ष 2015 में घर-घर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने के लिए 36 करोड़ 30 लाख रुपये का प्रोजेक्ट पास किया था। इसमें चार ओवरहेड टैंक, छह ट्यूबेल और पांच रिबोर पपिंग सेट और करीब 71 किलोमीटर के दायरे में पाइप लाइन बिछाना थी। यह काम जल निगम के द्वारा कराया जाना था, मगर सिस्टम की हीलाहवाली से टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। शासन से फटकार पड़ने के बाद तत्कालीन अधिकारियों ने आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया को पूरा कराया। इसके बाद दो फर्मों को टेंडर दिया था। इस काम को पूरा करने के लिए दो जोन बनाए गए थे। यह काम मार्च 2021 में पूरा करना था। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। पहले जोन में काम पूरा हो चुका है, तो वहां बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरे जोन में 60 फीसदी ही काम पूरा हो चुका है। वाटर वर्क्स में बन रहे ओवरहेड टैंक और पंपिंग सेट का काम अधूरा पड़ा है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद काम पर पूरी तरह से रोक लग गई है। ऐसे में अभी तक 16 हजार मकानों में रहने वाले लोग शुद्ध पेयजल को तरस रहे हैं।
सरकार ने योजना इसलिए शुरू की थी कि लोगों को पीने के लिए शुद्ध पेयजल मिल सके, मगर लापरवाही के चलते यह योजना अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। - देवेंद्र, तिरुपति गोल्डन पार्क
विज्ञापन
पाइपलाइन बिछने के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही घरों में पानी पहुंचेगा, मगर शहर में आने के बावजूद लोग अभी तक हैंडपंपों से पानी खींचने को मजबूर हैं। इससे परेशानी होती है - नीरु सक्सेना, खकरा
वैसे तो शहर में पानी की किल्लत नहीं है, मगर पीने लायक पानी उपलब्ध नहीं हो पता है। शासन ने पानी की योजना शुरू की थी। मगर इसका लाभ अभी तक नहीं मिल सका ।- बॉबी चौधरी, बाग गुलशेर खां
किन्हीं कारणों के चलते अमृत योजना का काम पूरा नहीं हो सका है। बाद में कोरोना संक्रमण के चलते काम बंद रहा है। अब दोनों फर्मों को जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। - कुमकुम गंगवार अधिशासी अभियंता, जल निगम
विज्ञापन
शहर में 27 वार्ड हैं, जिनमें 26 हजार से अधिक मकान हैं। करीब ढाई लाख की आबादी है। नगरपालिका की ओर से पंप के माध्यम से दस हजार मकानों को पानी की सप्लाई का दावा किया गया है, मगर धरातल पर उन्हें भी सप्लाई नहीं मिलती है। कभी कभार पानी पहुंचता है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों को सरकारी नल या मोटर का ही सहारा लेना पड़ता है। शासन के द्वारा अमृत योजना के माध्यम से वर्ष 2015 में घर-घर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने के लिए 36 करोड़ 30 लाख रुपये का प्रोजेक्ट पास किया था। इसमें चार ओवरहेड टैंक, छह ट्यूबेल और पांच रिबोर पपिंग सेट और करीब 71 किलोमीटर के दायरे में पाइप लाइन बिछाना थी। यह काम जल निगम के द्वारा कराया जाना था, मगर सिस्टम की हीलाहवाली से टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। शासन से फटकार पड़ने के बाद तत्कालीन अधिकारियों ने आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया को पूरा कराया। इसके बाद दो फर्मों को टेंडर दिया था। इस काम को पूरा करने के लिए दो जोन बनाए गए थे। यह काम मार्च 2021 में पूरा करना था। समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है। पहले जोन में काम पूरा हो चुका है, तो वहां बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरे जोन में 60 फीसदी ही काम पूरा हो चुका है। वाटर वर्क्स में बन रहे ओवरहेड टैंक और पंपिंग सेट का काम अधूरा पड़ा है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू होने के बाद काम पर पूरी तरह से रोक लग गई है। ऐसे में अभी तक 16 हजार मकानों में रहने वाले लोग शुद्ध पेयजल को तरस रहे हैं।
विज्ञापन
सरकार ने योजना इसलिए शुरू की थी कि लोगों को पीने के लिए शुद्ध पेयजल मिल सके, मगर लापरवाही के चलते यह योजना अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। - देवेंद्र, तिरुपति गोल्डन पार्क
विज्ञापन
पाइपलाइन बिछने के बाद उम्मीद थी कि जल्द ही घरों में पानी पहुंचेगा, मगर शहर में आने के बावजूद लोग अभी तक हैंडपंपों से पानी खींचने को मजबूर हैं। इससे परेशानी होती है - नीरु सक्सेना, खकरा
वैसे तो शहर में पानी की किल्लत नहीं है, मगर पीने लायक पानी उपलब्ध नहीं हो पता है। शासन ने पानी की योजना शुरू की थी। मगर इसका लाभ अभी तक नहीं मिल सका ।- बॉबी चौधरी, बाग गुलशेर खां
किन्हीं कारणों के चलते अमृत योजना का काम पूरा नहीं हो सका है। बाद में कोरोना संक्रमण के चलते काम बंद रहा है। अब दोनों फर्मों को जल्द से जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। - कुमकुम गंगवार अधिशासी अभियंता, जल निगम