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Pilibhit News: अवैध निर्माण के मामले में सिटी मजिस्ट्रेट को छह माह में फैसला सुनाने का आदेश
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पीलीभीत। नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय में लंबित जमीन के विवाद के मामले में हाईकोर्ट ने छह माह के भीतर फैसला सुनाने के आदेश दिए हैं।
मामला कोतवाली क्षेत्र के ग्राम चंदोई में गाटा संख्या 492 पर अवैध निर्माण करने का है। सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में गत वर्ष पांच अक्तूबर को वाद दर्ज किया गया। पीड़िता हुमेरा सुल्तान पत्नी नावेद यार खान ने बताया कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से निर्माण करा दिया। कई बार सिटी मजिस्ट्रेट से शिकायत की गई। उन्होंने हर बार जेई को मौके पर भेजा, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रोका गया।
आरोप है कि हीलाहवाली के चलते जमीन पर दुकानें बना दी गईं। इसकी शिकायत पीड़िता की ओर से तत्कालीन जिलाधिकारी प्रवीण कुमार से की गई। जिस पर उन्होंने विनियमित क्षेत्र के जेई को पुलिसबल के साथ कार्रवाई करने को कहा लेकिन इसके बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया। सिटी मजिस्ट्रेट के यहां कोई सुनवाई नहीं हुई।
पीड़िता ने तंग आकर हाइकोर्ट का दरवाजा खटकाया। अब न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने सभी पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद पीलीभीत के सिटी मजिस्ट्रेट को छह माह के भीतर इस मामले में फैसला सुनाने के लिए आदेश दिया है।
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मामला कोतवाली क्षेत्र के ग्राम चंदोई में गाटा संख्या 492 पर अवैध निर्माण करने का है। सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में गत वर्ष पांच अक्तूबर को वाद दर्ज किया गया। पीड़िता हुमेरा सुल्तान पत्नी नावेद यार खान ने बताया कि उसकी पुश्तैनी जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से निर्माण करा दिया। कई बार सिटी मजिस्ट्रेट से शिकायत की गई। उन्होंने हर बार जेई को मौके पर भेजा, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रोका गया।
आरोप है कि हीलाहवाली के चलते जमीन पर दुकानें बना दी गईं। इसकी शिकायत पीड़िता की ओर से तत्कालीन जिलाधिकारी प्रवीण कुमार से की गई। जिस पर उन्होंने विनियमित क्षेत्र के जेई को पुलिसबल के साथ कार्रवाई करने को कहा लेकिन इसके बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया। सिटी मजिस्ट्रेट के यहां कोई सुनवाई नहीं हुई।
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पीड़िता ने तंग आकर हाइकोर्ट का दरवाजा खटकाया। अब न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने सभी पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद पीलीभीत के सिटी मजिस्ट्रेट को छह माह के भीतर इस मामले में फैसला सुनाने के लिए आदेश दिया है।
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