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पंचायत अध्यक्ष पद के लिए जोर आजमाइश, दावेदार बढ़े
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पीलीभीत। नामांकन प्रक्रिया की शुरूआत के साथ ही समस्त राजनीतिक दलों में पंचायत चुनाव की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। सर्वाधिक जोर आजमाइश जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट को लेकर चल रही है। सत्ताधारी भाजपा में कई वरिष्ठ नेता चुनाव मैदान में कूद चुके हैं, जबकि सपा, बसपा और कांग्रेस आदि दलों में भी खुद को बेहतर बताते हुए अध्यक्ष पद पर काबिज होने की होड़ सी मची है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर जिले में मतदान 26 अप्रैल को तीसरे चरण में होगा। प्रधान के 720, ग्राम पंचायत सदस्य 8881, क्षेत्र पंचायत सदस्य 845 और जिला पंचायत सदस्य के 34 पद हैं। इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल से जोड़कर राजनीतिक पार्टियां देख रही हैं। सभी की निगाह जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर काबिज होने पर है। शासन ने इस सीट को ओबीसी के लिए आरक्षित किया है। इससे पहले यह सीट एससी महिला थी। उस वक्त सपा के पूर्व विधायक प्रीतमराम की पुत्रवधु आरती महेंद्र जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थी। इस बार ओबीसी का जिला पंचायत अध्यक्ष बनना है। ऐसे में कई वरिष्ठ नेता भी चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। भाजपा की बात करें तो पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश गंगवार वार्ड नंबर 22 से, पूर्व महामंत्री गुरभाग सिंह की पत्नी डॉॅ. दलजीत कौर वार्ड नंबर छह और पूर्व में विधानसभा चुनाव लड़ चुके स्वामी प्रवक्तानंद वार्ड नंबर 15 से चुनाव लड़ रहे हैं। समाजवादी पार्टी में भी पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद की बेटी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रूकैय्या आरिफ वार्ड नंबर 20 से एक बार फिर प्रत्याशी हैं।
इसके अलावा भी कई दिग्गज कतार में लगे हुए हैं। कांग्रेस और बसपा में भी हलचल बनी हुई है। जीत का ताज किसके सर सजेगा और कौन अध्यक्ष पद पर काबिज होगा। यह अभी तय नहीं है। राजनीतिक पार्टियों के जिम्मेदार भी अभी अध्यक्ष की दावेदारी को लेकर खुलकर नहीं बोल रहे। मगर इन तमाम नेताओं के चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट को लेकर दावेदारी की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर जिले में मतदान 26 अप्रैल को तीसरे चरण में होगा। प्रधान के 720, ग्राम पंचायत सदस्य 8881, क्षेत्र पंचायत सदस्य 845 और जिला पंचायत सदस्य के 34 पद हैं। इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल से जोड़कर राजनीतिक पार्टियां देख रही हैं। सभी की निगाह जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर काबिज होने पर है। शासन ने इस सीट को ओबीसी के लिए आरक्षित किया है। इससे पहले यह सीट एससी महिला थी। उस वक्त सपा के पूर्व विधायक प्रीतमराम की पुत्रवधु आरती महेंद्र जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थी। इस बार ओबीसी का जिला पंचायत अध्यक्ष बनना है। ऐसे में कई वरिष्ठ नेता भी चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। भाजपा की बात करें तो पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश गंगवार वार्ड नंबर 22 से, पूर्व महामंत्री गुरभाग सिंह की पत्नी डॉॅ. दलजीत कौर वार्ड नंबर छह और पूर्व में विधानसभा चुनाव लड़ चुके स्वामी प्रवक्तानंद वार्ड नंबर 15 से चुनाव लड़ रहे हैं। समाजवादी पार्टी में भी पूर्व कैबिनेट मंत्री हाजी रियाज अहमद की बेटी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रूकैय्या आरिफ वार्ड नंबर 20 से एक बार फिर प्रत्याशी हैं।
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इसके अलावा भी कई दिग्गज कतार में लगे हुए हैं। कांग्रेस और बसपा में भी हलचल बनी हुई है। जीत का ताज किसके सर सजेगा और कौन अध्यक्ष पद पर काबिज होगा। यह अभी तय नहीं है। राजनीतिक पार्टियों के जिम्मेदार भी अभी अध्यक्ष की दावेदारी को लेकर खुलकर नहीं बोल रहे। मगर इन तमाम नेताओं के चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट को लेकर दावेदारी की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
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