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Pilibhit News: प्रत्येक शनिवार को बिना बस्ते स्कूल जाएंगे बच्चे, सीखेंगे हुनर
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अगस्त से नवंबर तक परिषदीय उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में तय 10 बैगलेस-डे के तहत होंगी गतिविधियां
पीलीभीत। परिषदीय उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे शनिवार को बस्ते के बोझ से मुक्त होकर सीखने और हुनर निखारने की गतिविधियों में शामिल होंगे। समग्र शिक्षा के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 में अगस्त से नवंबर तक 10 बैगलेस डे आयोजित किए जाएंगे। इसपर प्रभावी अमल के लिए बीएसए की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं।
जिले में 1495 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। बीएसए रोशनी सिंह ने बताया कि शासन के आदेश के बाद शुरू किए जा रहे बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक और अनुभव युक्त शिक्षा देना है। गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में कौशल विकास, श्रम की गरिमा, स्थानीय कला एवं शिल्प के प्रति रुचि, सामुदायिक जुड़ाव और व्यावसायिक समझ विकसित करने पर जोर दिया गया है। बच्चों को आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसी अवधारणाओं से भी परिचित कराया जाएगा।
बैगलेस डे के तहत अलग-अलग शनिवार को बच्चों को मिट्टी से खिलौने, मूर्ति एवं कलाकृतियां बनाने, स्थानीय शिल्पकारों के साथ कौशल विकास, औषधीय पौधों की पहचान, किचन गार्डन, जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन, जैविक खेती, स्वास्थ्य एवं चाइल्ड सेफ्टी, जूट से क्राफ्ट, कठपुतली निर्माण और कहानी मंचन जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। संवाद
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पीलीभीत। परिषदीय उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे शनिवार को बस्ते के बोझ से मुक्त होकर सीखने और हुनर निखारने की गतिविधियों में शामिल होंगे। समग्र शिक्षा के तहत शैक्षिक सत्र 2026-27 में अगस्त से नवंबर तक 10 बैगलेस डे आयोजित किए जाएंगे। इसपर प्रभावी अमल के लिए बीएसए की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं।
जिले में 1495 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। बीएसए रोशनी सिंह ने बताया कि शासन के आदेश के बाद शुरू किए जा रहे बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक और अनुभव युक्त शिक्षा देना है। गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में कौशल विकास, श्रम की गरिमा, स्थानीय कला एवं शिल्प के प्रति रुचि, सामुदायिक जुड़ाव और व्यावसायिक समझ विकसित करने पर जोर दिया गया है। बच्चों को आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल और एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) जैसी अवधारणाओं से भी परिचित कराया जाएगा।
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बैगलेस डे के तहत अलग-अलग शनिवार को बच्चों को मिट्टी से खिलौने, मूर्ति एवं कलाकृतियां बनाने, स्थानीय शिल्पकारों के साथ कौशल विकास, औषधीय पौधों की पहचान, किचन गार्डन, जल संरक्षण एवं वर्षा जल संचयन, जैविक खेती, स्वास्थ्य एवं चाइल्ड सेफ्टी, जूट से क्राफ्ट, कठपुतली निर्माण और कहानी मंचन जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। संवाद
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