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स्वास्थ्य विभाग की जांच में किशनी में 31 बच्चे चिकन पॉक्स से पीड़ित मिले
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बीसलपुर के गांव किशनी के प्राथमिक विद्यालय में लगे स्वास्थ्य शिविर में हो रही बीमार बच्चों की जा?
- फोटो : PILIBHIT
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बीसलपुर। बीमार बच्चों का हाल देखने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम शुक्रवार को गांव किशनी पहुंची। प्राथमिक विद्यालय में शिविर लगाकर बीमार बच्चों की जांच की। जांच में 31 बच्चे चिकन पॉक्स से पीड़ित निकले। उन्हें दवाई दे दी गई। गंभीर रूप से बीमार पाए गए पांच मरीजों के रक्त के नमूने लिए गए।
गांव किशनी में पिछले लगभग एक पखवाड़े से शरीर में दाने निकल आने से 30 से अधिक बच्चे बीमार हो गए थे। अधिकांश बच्चे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय के हैं। जिसे अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में ‘किशनी में 30 से ज्यादा बच्चे बीमार, खसरे का अंदेशा’ शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित किया।
खबर को संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने शुक्रवार को गांव किशनी के प्राथमिक विद्यालय में शिविर लगाकर बीमार बच्चों की जांच की। जांच के दौरान 31 बच्चे चिकन पॉक्स से पीड़ित पाए गए। इन बच्चों को दवाई दे दी गई। जांच में चिकन पॉक्स से गंभीर रूप से पीड़ित पाए गए पांच बच्चों के रक्त के नमूने लिए गए।
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जांच करने वालों में डॉक्टर विपिन शर्मा, डॉ पराग अग्रवाल, क्षेत्रीय एएनएम सुमन कुमारी और आशा कार्यकर्ता शामिल थीं। टीम के लोगों ने ग्रामीणों को विभिन्न बीमारियों से बचने के टिप्स भी दिए और कुछ ग्रामीणों द्वारा विभिन्न बीमारियों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए। टीम के लोगों ने ग्रामीणों को यह भी सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर वे लोग सीएचसी आकर किसी भी बीमारी का उपचार करा सकते हैं।
गांव किशनी में शिविर लगवाकर बीमार बच्चों की जांच की गई। इसमें 31 बच्चे चिकन पॉक्स से पीड़ित पाए गए। चिकन पॉक्स से गंभीर रूप से पीड़ित पाए गए पांच बच्चों के रक्त के नमूने लिए गए। कोई खतरे की बात नहीं है।
डॉ. ठाकुरदास, एमओआईसी सीएचसी बीसलपुर
यह एक संक्रामक बीमारी है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर बच्चे बीमारी से पीड़ित होते हैं। अगर आपके घर में कोई मासूम चिकन पॉक्स पीड़ित है तो उसके पड़े आदि अलग रखें। घबराने की बात नहीं है। सात आठ दिन में वह ठीक हो जाता है। उसका लक्षण के आधार पर उपचार कराएं।
डॉ. मुकेश मिश्रा, बाल रोग विशेषज्ञ
क्या है चिकन पॉक्स
चिकन पॉक्स वेरीसेल्ला जोस्टर नामक वायरस से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। इसके संक्रमण से पूरे शरीर में फुंसियों जैसी लाल चक्तियां विकसित हो जाती हैं। जो दिखने में खसरे की बीमारी की तरह भी लगती है। इस बीमारी में पूरे शरीर में खुजली होती है। चिकन पॉक्स को महामारी माना जाता है।
चिकन पॉक्स के लक्षण
- शरीर पर लाल, उभरे ददोरे उभर आते हैं।
- दोदरे फफोलों में बदलते हैं कभी-कभी मवाद से भर जाते हैं। फूटते हैं और फिर खुरदरे पड़ते हैं।
- प्रमुख रूप से चेहरे, खोपड़ी और रीढ़ पर दिखाई देते हैं। भुजाओं, टांगों पर भी यह होते हैं।
- तेज खुजली हो सकती है।
- कमर में तेज दर्द हो सकता है।
- सीने में जकड़न हो सकती है।
-बुखार आ सकता है।
सावधानियां बरतें
- मासूम बच्चों को पांच वर्ष तक होने वाले नियमित टीकाकरण में लापरवाही न करें
- संक्रमित बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों से दूर रहें। दानों को खुजाएं या रगड़ें नहीं।
- किसी भी तरह की दिक्कत लगने पर योग्य चिकित्सक को दिखाएं
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गांव किशनी में पिछले लगभग एक पखवाड़े से शरीर में दाने निकल आने से 30 से अधिक बच्चे बीमार हो गए थे। अधिकांश बच्चे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय के हैं। जिसे अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में ‘किशनी में 30 से ज्यादा बच्चे बीमार, खसरे का अंदेशा’ शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित किया।
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खबर को संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने शुक्रवार को गांव किशनी के प्राथमिक विद्यालय में शिविर लगाकर बीमार बच्चों की जांच की। जांच के दौरान 31 बच्चे चिकन पॉक्स से पीड़ित पाए गए। इन बच्चों को दवाई दे दी गई। जांच में चिकन पॉक्स से गंभीर रूप से पीड़ित पाए गए पांच बच्चों के रक्त के नमूने लिए गए।
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जांच करने वालों में डॉक्टर विपिन शर्मा, डॉ पराग अग्रवाल, क्षेत्रीय एएनएम सुमन कुमारी और आशा कार्यकर्ता शामिल थीं। टीम के लोगों ने ग्रामीणों को विभिन्न बीमारियों से बचने के टिप्स भी दिए और कुछ ग्रामीणों द्वारा विभिन्न बीमारियों के बारे में पूछे गए सवालों के जवाब भी दिए। टीम के लोगों ने ग्रामीणों को यह भी सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर वे लोग सीएचसी आकर किसी भी बीमारी का उपचार करा सकते हैं।
गांव किशनी में शिविर लगवाकर बीमार बच्चों की जांच की गई। इसमें 31 बच्चे चिकन पॉक्स से पीड़ित पाए गए। चिकन पॉक्स से गंभीर रूप से पीड़ित पाए गए पांच बच्चों के रक्त के नमूने लिए गए। कोई खतरे की बात नहीं है।
डॉ. ठाकुरदास, एमओआईसी सीएचसी बीसलपुर
यह एक संक्रामक बीमारी है। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर बच्चे बीमारी से पीड़ित होते हैं। अगर आपके घर में कोई मासूम चिकन पॉक्स पीड़ित है तो उसके पड़े आदि अलग रखें। घबराने की बात नहीं है। सात आठ दिन में वह ठीक हो जाता है। उसका लक्षण के आधार पर उपचार कराएं।
डॉ. मुकेश मिश्रा, बाल रोग विशेषज्ञ
क्या है चिकन पॉक्स
चिकन पॉक्स वेरीसेल्ला जोस्टर नामक वायरस से फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी है। इसके संक्रमण से पूरे शरीर में फुंसियों जैसी लाल चक्तियां विकसित हो जाती हैं। जो दिखने में खसरे की बीमारी की तरह भी लगती है। इस बीमारी में पूरे शरीर में खुजली होती है। चिकन पॉक्स को महामारी माना जाता है।
चिकन पॉक्स के लक्षण
- शरीर पर लाल, उभरे ददोरे उभर आते हैं।
- दोदरे फफोलों में बदलते हैं कभी-कभी मवाद से भर जाते हैं। फूटते हैं और फिर खुरदरे पड़ते हैं।
- प्रमुख रूप से चेहरे, खोपड़ी और रीढ़ पर दिखाई देते हैं। भुजाओं, टांगों पर भी यह होते हैं।
- तेज खुजली हो सकती है।
- कमर में तेज दर्द हो सकता है।
- सीने में जकड़न हो सकती है।
-बुखार आ सकता है।
सावधानियां बरतें
- मासूम बच्चों को पांच वर्ष तक होने वाले नियमित टीकाकरण में लापरवाही न करें
- संक्रमित बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों से दूर रहें। दानों को खुजाएं या रगड़ें नहीं।
- किसी भी तरह की दिक्कत लगने पर योग्य चिकित्सक को दिखाएं