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जंगल का सिकुड़ता दायरा और बाघों की बढ़ती संख्या बढ़ा रहा चुनौतियां

Sun, 15 May 2022 12:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 15 May 2022 12:15 AM IST
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Challenges faced by shrinking forest and growing tigers
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघ की मौजूदगी। फाइल फोटो। - फोटो : PILIBHIT
कलीनगर। प्राकृतिक सुंदरता व बाघों के मामले में देश विदेश में अपनी छाप छोड़ चुके जिले के जंगल अब बाघों की मौजूदगी को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। टाइगर रिजर्व प्रशासन की ओर से बाघों की सुरक्षा के प्रयासों के बीच हो रहे वन भूमि के उजाड़े जाने की व्यथा रुकने का नाम नहीं ले रही है। नतीजतन बाघों का परिवार बढ़ने के साथ जंगल का दायरा सिकुड़ता जा रहा है। ऐसे में बाघों में आपसी संघर्ष की घटनाओं के साथ जंगल से बाहर भी मानव वन्यजीव संघर्ष के हालात बिगड़ने की बात सामने आ रही है।
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बाघ संरक्षण के नाम पर जंगल को वर्ष 2014 टाइगर रिजर्व का दर्जा तो दे दिया गया। जिसके बाद जंगल में बाघों का कुनबा भी बढ़ा, लेकिन जब तक बाघों की असमय हुई मौत के मामलों ने उनकी सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। पूर्व के वर्षों में बाघों के हमले में करीब 30 लोग भी जान गंवा चुके हैं और बाघों की मैदानी क्षेत्रों में चहलकदमी भी तेजी से बढ़ रही है। बाघ संरक्षण के नाम पर यहां चंद वॉच टॉवर व दो घूंट पानी के लिए कुछ जलाशय बनाकर इन्हें ही बाघ संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाना बताया जा रहा है। टाइगर रिजर्व की कई रेंजों की सैकड़ों एकड़ वन क्षेत्र को उजाड़कर कृषि की जा रही है। कब्जा होने के चलते दायरा बढ़ने के बजाय सिकुड़ता जा रहा है। बाघों की संख्या बढ़ने से विचरण का दायरा कम पड़ने लगा है। नर बाघ अपने दायरे में दूसरे बाघ की दस्तक को पसंद नहीं करता। शावकों की मौजूदगी के बाद उनको सुरक्षित रखने के लिए भी बाघिन को जगह की तलाश करना भी मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञ भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं।
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बुधवार रात हरीपुर रेंज की नवदिया बीट में बाघों के आपसी संघर्ष में हुई शावक की मौत भी इस ओर ही इशारा कर रही है।
चंद रुपये के लालच में नरकुल का भी नहीं रुका नीलाम
बाघों के प्राकृतिक वास स्थल कह जाने वाले नरकुल घास की नीलामी भी नहीं रुक सकी। दरअसल महोफ और बराही रेंज की सीमा क्षेत्र में पड़ने वाले शारदा सागर डैम में करीब तीन किलोमीटर तक नरकुल घास खड़ी है। डैम क्षेत्र में हमेशा बाघों की मौजूदगी भी बनी रहती है। ऐसे में नरकुल की कटाई होने से प्राकृतिक वास स्थल भी नष्ट होता जा रहा है। हालांकि तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर आदर्श कुमार ने नरकुल की नीलामी पर रोक लगाने के लिए सिंचाई विभाग को पत्राचार भी किए थे। लेकिन इसके बाद भी स्थिति नहीं संभल सकी।
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