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सत्ता का संग्राम: पीलीभीत में चाय पर चर्चा, क्या हैं यहां के चुनावी मुद्दे, जानिए मतदाताओं की जुबानी

Sun, 07 Apr 2024 08:36 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 07 Apr 2024 08:36 AM IST
सार

Pilibhit News: तेजी से बढ़ रही गर्मी के साथ लोकसभा चुनाव की सरगर्मी भी तेज हो रही है। पीलीभीत में 19 अप्रैल को मतदान होना है। इस बार जिले के मतदान किन चुनावी मुद्दों और उम्मीदों के साथ मतदान करेंगे, यह जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने रविवार सुबह मतदाताओं के साथ चाय पर चर्चा की। 

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chai par charcha with pilibhit voters over lok sabha elections 2024
पीलीभीत में चाय पर चुनावी चर्चा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' रविवार को पीलीभीत पहुंचा। यहां पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान होना है। इस बार पीलीभीत के मतदाताओं के क्या चुनावी मुद्दे और उम्मीदें हैं, यह जानने के लिए अमर उजाला टीम ने यहां के लोगों से चाय पर चुनावी चर्चा की। लोगों ने रोजगार, शिक्षा, महंगाई समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।

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'महंगाई में परिवार चलाना मुश्किल'
शहर के कमल्ले चौराहा पर गर्म चाय के साथ चुनावी चर्चा का माहौल भी गर्म दिखा। शहर की बदहाल सड़कें, विकास के नाम पर सिर्फ वादे, रोजगार और बढ़ते मानव-वन्य जीव संघर्ष पर खुलकर बोले। अथर अली ने कहा कि काम मिलता नहीं और महंगाई में परिवार चलाना मुश्किल है। कम से कम हमारे रोजगार की परवाह भी तो की जाए। पांच किलो राशन से पेट नहीं भरने वाला है। रोजगार होगा तो अपना पेट खुद भर लेगा। महंगाई बहुत है। बच्चों को क्या खिलाएं या क्या पढ़ाएं। सिलिंडर खत्म हो जाए तो उसे भराने के लिए सोचना पड़ता है। 
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आसिफ ने कहा कि जिले के नेताओं ने कुछ विकास नहीं कराया है। शहर में जलनिकासी की समस्या का अब तक नहीं हुआ। इरफान खान और वीरेंद्र कुमार ने कहा कि मजदूरी पेशा आदमी बहुत परेशान है। रोजगार नहीं है। कामधंधा नहीं है। राजमिस्त्री का काम करते हैं। मजदूरी कम है, महंगाई ज्यादा है। निशुल्क राशन पर कहा कि पांच किलो राशन में क्या होगा। गर्मी में बाजरा मिल रहा है। इसे कौन खाएगा। 

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विश्वजीत त्रिपाठी ने भी विकास कार्यों को लेकर अपनी बात रखी। रिंकू पांडेय ने गड्ढामुक्ति अभियान पर सवाल उठाए कहा कि शहर की सड़कों को देख लीजिए। यहां सिर्फ गड्ढे ही दिखेंगे। मेडिकल कॉलेज बना लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं अब तक बेहतर नहीं हुईं। अंकुर अग्रवाल का तर्क था कि मौजूदा सरकार में कई काम हुए। स्वास्थ्य सेवाएं सुधरीं। सुरक्षा व्यवस्था बेहतर हुई। कानून व्यवस्था के मुद्दे पर रिंकू और अंकुर ने अपने-अपने तर्क भी दिए। 

युवा मोहाज का कहना था कि मानव-वन्य जीव संघर्ष रोकने को ठोस रणनीति क्यों नहीं बनाई जाती। कहा कि रेलवे क्रासिंग पर अंडरपास बना दिए गए। इनमें पानी भर जाता है, कोई सुनने वाला नहीं। अंकुर अग्रवाल ने कहा कि उम्मीदवार को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं है। बाहरी का मुद्दा ही नहीं है। राकेश कुमार, प्रदीप कुमार अग्रवाल, अचल पांडेय व रवि बजाज ने भी पीलीभीत के मुद्दों पर अपनी बात रखी।

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