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Pilibhit News: सीसीटीवी फुटेज ने उजागर की महिला अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही

Wed, 04 Dec 2024 11:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2024 11:16 AM IST
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CCTV footage exposed the negligence of the women's hospital staff
बरेली। समय से इलाज न मिलने के कारण हुई गर्भवती महिला की माैत के मामले में पीलीभीत के जिला महिला अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही सीसीटीवी फुटेज से उजागर हुई है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति को फुटेज के जरिये उस समय तैनात चिकित्सकों, स्टाफ नर्स व अन्य के बयानों की सत्यता परखने में मदद मिली। इसी के आधार पर दोषियों पर प्रशासन ने कार्रवाई की। इसका खुलासा उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में पेश जांच रिपोर्ट में किया गया है।
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जांच समिति में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के अलावा उप जिलाधिकारी व क्षेत्राधिकारी सदर शामिल थे। जांच रिपोर्ट के अनुसार 05 मई 2024 को रात 10 बजे से 10:30 बजे के बीच शिकायतकर्ता देवेंद्र अपनी पत्नी पूनम देवी (जो कि 07 माह की गर्भ से थी) को जिला महिला चिकित्सालय पर लेकर पहुंचे थे। जांच में पाया गया कि उस समय महिला चिकित्सालय पर ड्यूटी पर तैनात डाॅ. वैशाली गुप्ता को उन्होंने रोगी के बारे में जानकारी दी। रोगी की स्थिति गंभीर थी।
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डाॅ. वैशाली रोगी ने परीक्षण या उपचार के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। ड्यूटी पर तैनात अन्य कर्मचारी, स्टाफ नर्स दिव्या उपरेती व राखी लाल ने भी रोगी को अस्पताल में अंदर लाकर परीक्षण नहीं किया। डाॅ. वैशाली ने कहा कि तीमारदार के पास कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं थी। इस तर्क को जांच टीम ने ठीक नहीं माना। रिपोर्ट के अनुसार रोगी पूनम की 24 घंटे में माैत होना बताता है कि वह गंभीर थी।
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डाॅ. वैशाली ने बताया कि उन्होंने डाॅ. हिना प्रकाश को कॉल की थी और उनका रिस्पांस नहीं मिला। सीसीटीवी फुटेज से फोन काॅल के समय को जांचने में मदद मिली। काॅल रोगी के जाने के बाद किए जाने की बात सामने आई। वहीं डाॅ. हिना के रिस्पांस न करने को भी जांच समिति ने गलत माना। साथ ही जिला महिला चिकित्सालय में डाॅ. राजेश कुमार को प्रभावी पर्यवेक्षणीय कार्य न किए जाने के लिए दोषी माना। यही नहीं मामले में मात्र डाॅ. वैशाली को कार्यमुक्त करने को भी लीपापोती माना गया।
हालांकि आयोग ने गंभीर लापरवाही के बावजूद पीड़ित को कोई आर्थिक सहायता या मुआवजा न दिए जाने पर आपत्ति जताई है। साथ ही नाै जनवरी को दोपहर 12:30 बजे अधिकारियों को तलब किया है।


तीन बार आदेश देने के बाद प्रशासन ने भेजी रिपोर्ट
मामले में मानवाधिकार आयोग ने शिकायत पर सबसे पहले 11 जून 2024 को आदेश कर जिलाधिकारी से आख्या मांगी थी, लेकिन तय तिथि 8 अगस्त को आख्या नहीं भेजी गई। इसके बाद दोबारा 08 अगस्त को हुए आदेश के तहत 24 सितंबर को भी कोई आख्या नहीं दी गई। तीसरी बार 18 अक्तूबर को दिए गए निर्देशों के तहत उपजिलाधिकारी के माध्यम से विलंब के स्पष्टीकरण के साथ 29 नवंबर को आख्या पेश की गई।
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