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Pilibhit News: भाजपा चेयरमैन के प्रतिनिधि, ईओ समेत पांच पर केस
Wed, 15 Jul 2026 01:17 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
Updated Wed, 15 Jul 2026 01:17 AM IST
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बीसलपुर(पीलीभीत)। नगर पालिका परिषद बीसलपुर के बर्खास्त कर्मचारी उपेंद्र शंखधर की आत्महत्या के मामले में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। कोतवाली पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर नगर पालिका परिषद के भाजपा से चेयरमैन शशि जायसवाल के पति व प्रतिनिधि अमन जायसवाल, ईओ समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया।
एफआईआर में नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों पर आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के ऐसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। परिजनों के सड़क पर शव रखकर विरोध-प्रदर्शन के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। भाजपा चेयरमैन प्रतिनिधि पर मृतक को पेशाब पिलाने का भी आरोप लगाया गया है।
बीसलपुर के मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी उपेंद्र शंखधर के भाई अनुराग शर्मा ने कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि उनके भाई नगर पालिका परिषद में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि अधिकारियों ने उनसे उनके पद के विपरीत कर संग्रहक का कार्य कराया। बाद में सितंबर 2025 में उन पर 23 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाकर झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसके चलते उन्हें जेल भेजा गया, फिर निलंबित किया गया और अंततः सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
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रिपोर्ट के अनुसार उपेंद्र शंखधर ने अपनी नौकरी बचाने और दोबारा बहाली की उम्मीद में परिवार की पूरी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी। उन्होंने अपनी जमीन बेच दी, जबकि उनकी पत्नी और मां के जेवर भी बेच दिए गए। इन सबके जरिये 23 लाख रुपये की व्यवस्था कर नगर पालिका में जमा करा दिए गए। परिजनों का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम जमा करने के बावजूद उन्हें नौकरी पर बहाल नहीं किया गया और लगातार उन्हें टालमटोल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि 23 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी अधिकारियों ने उपेंद्र शंखधर से आठ लाख रुपये और देने की मांग शुरू कर दी। जब उन्होंने खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अतिरिक्त धनराशि देने में असमर्थता जताई तो उन्हें दोबारा जेल भेजने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस दबाव के चलते उपेंद्र लगातार तनाव में रहने लगे थे और उनका मानसिक संतुलन भी प्रभावित हो गया था।
उत्पीड़न के दौरान नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी और अध्यक्ष प्रतिनिधि उनके भाई को किसी गुप्त स्थान पर ले गए, जहां उनके साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं, उन्हें कथित तौर पर पेशाब तक पिलाई गई। लगातार हो रहे मानसिक, आर्थिक और शारीरिक उत्पीड़न के कारण उन्होंने सोमवार शाम आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।
कोतवाली पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर के आधार पर नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी शमशेर सिंह, प्रधान लिपिक अकरम खान, सफाई निरीक्षक यासीन अहमद, आंकिक संजीव मिश्रा तथा नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया है।
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वर्जन-
मृतक के भाई की तहरीर के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। सुसाइड नोट में मिले मृतक के हस्ताक्षर का मिलान कराया जाएगा। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
सुकीर्ति माधव, एसपी
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एफआईआर में नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों पर आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के ऐसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। परिजनों के सड़क पर शव रखकर विरोध-प्रदर्शन के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। भाजपा चेयरमैन प्रतिनिधि पर मृतक को पेशाब पिलाने का भी आरोप लगाया गया है।
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बीसलपुर के मोहल्ला दुर्गा प्रसाद निवासी उपेंद्र शंखधर के भाई अनुराग शर्मा ने कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा है कि उनके भाई नगर पालिका परिषद में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि अधिकारियों ने उनसे उनके पद के विपरीत कर संग्रहक का कार्य कराया। बाद में सितंबर 2025 में उन पर 23 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाकर झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसके चलते उन्हें जेल भेजा गया, फिर निलंबित किया गया और अंततः सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
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रिपोर्ट के अनुसार उपेंद्र शंखधर ने अपनी नौकरी बचाने और दोबारा बहाली की उम्मीद में परिवार की पूरी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी। उन्होंने अपनी जमीन बेच दी, जबकि उनकी पत्नी और मां के जेवर भी बेच दिए गए। इन सबके जरिये 23 लाख रुपये की व्यवस्था कर नगर पालिका में जमा करा दिए गए। परिजनों का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम जमा करने के बावजूद उन्हें नौकरी पर बहाल नहीं किया गया और लगातार उन्हें टालमटोल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि 23 लाख रुपये जमा कराने के बाद भी अधिकारियों ने उपेंद्र शंखधर से आठ लाख रुपये और देने की मांग शुरू कर दी। जब उन्होंने खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए अतिरिक्त धनराशि देने में असमर्थता जताई तो उन्हें दोबारा जेल भेजने की धमकी दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस दबाव के चलते उपेंद्र लगातार तनाव में रहने लगे थे और उनका मानसिक संतुलन भी प्रभावित हो गया था।
उत्पीड़न के दौरान नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी और अध्यक्ष प्रतिनिधि उनके भाई को किसी गुप्त स्थान पर ले गए, जहां उनके साथ मारपीट की गई। इतना ही नहीं, उन्हें कथित तौर पर पेशाब तक पिलाई गई। लगातार हो रहे मानसिक, आर्थिक और शारीरिक उत्पीड़न के कारण उन्होंने सोमवार शाम आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।
कोतवाली पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर के आधार पर नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी शमशेर सिंह, प्रधान लिपिक अकरम खान, सफाई निरीक्षक यासीन अहमद, आंकिक संजीव मिश्रा तथा नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के प्रतिनिधि अमन जायसवाल उर्फ निक्की को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज किया है।
वर्जन-
मृतक के भाई की तहरीर के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। सुसाइड नोट में मिले मृतक के हस्ताक्षर का मिलान कराया जाएगा। जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
सुकीर्ति माधव, एसपी