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रोडवेज में जगह का अभाव..सड़क पर जाम का सबब बन रहीं बसें
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पीलीभीत। रोडवेज बसों की जर्जर हालत किसी से छिपी नहीं है। अन्य व्यवस्थाओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहर के आबादी वाले इलाके में रोडवेज स्टैंड होने से यातायात व्यवस्था बेपटरी हो रही। जहां-तहां सड़कों पर बसें खड़ी कर दी जाती हैं। इससे जाम लगता है। कई बार तो बसों के मोड़ने के लिए जगह की कमी सेे आधे घंटे तक लोग खड़े रह जाते। यह हालात लंबे समय से बने हुए हैं। इनके समाधान के लिए कई बार दावे किए गए। मगर इसको सुधारा नहीं जा सका।
घन्नई ताल से ईदगाह की ओर जाने वाले आबादी वाले इलाके में रोडवेज स्टैंड है, परिसर में इतनी जगह नहीं कि ज्यादा बसों को खड़ा किया जा सके। अधिकतर बसें रोडवेज के बाहर सड़क पर खड़ी रहती हैं। बसों की कतार लगे होने से पहले से अतिक्रमण से घिरी सड़क और सिकुड़ जाती है। वैसे तो रोडवेज स्टैंड को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कवायद चल रही है। मगर यह कवायद अभी पूरी नहीं हो सकी है। तत्कालीन एआरएम की ओर से वर्ष 2017 में बीसलपुर रोड पर एक जगह चिह्नित की गई थी। इसका प्रस्ताव भी भेजा गया, मगर शासन स्तर पर जाकर ठप हो गया। अब तक इस प्रस्ताव को गति नहीं मिल सकी है। बसें रोडवेज से निकलने के बाद एकता सरोवर, नौगवां चौराहा और ओवरब्रिज के नीचे खड़ी दिखाई देती हैं। कोई अन्य वाहन प्रवेश करते ही जाम लग जाता है। अमर उजाला टीम ने इसकी पड़ताल की तो बसें इसी तरह से सड़क घेरकर खड़ी मिलीं।
रोडवेज स्टैंड के बाहर की सड़क पर आवागमन अधिक रहता है। सड़क ज्यादा चौड़ी न होने के कारण यहां पर बसों के मोड़ने से दिक्कत आती है। इसके अलावा बसों का पहले से सड़क पर होना जाम लगा देता है। जब टीम वहां पहुंची तो रोज की तरह कई बसें सड़क पर खड़ी दिखीं। इसके अलावा कुछ दूरी पर प्राइवेट बस अड्डे की बसों ने भी जगह घेर रखी थी।
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नौगवां चौराहा पर सड़क पर अतिक्रमण पहले से है। वहीं रोडवेज बसों के लिए यह मुख्य चौराहा अड्डे की तरह हो गया है। रोडवेज स्टैंड से निकलने के बाद बसें यहां आकर रुकती हैं और यहीं से ज्यादातर सवारियां बैठाती हैं। इसके अलावा खाली बसें भी जहां-तहां खड़ी दिखीं। इन बसों के कारण दूसरे वाहनों के चालकों को आने-जाने में काफी मशक्कत करना पड़ रही थी।
नौगवां ओवरब्रिज के नीचे एक तरह से वाहनों का स्टैंड बन गया है। यहां पर टेंपो, मैजिक तो खड़े होते ही है। रोडवेज की बसों को खड़ा करने के लिए भी ये जगह इस्तेमाल की जा रही। यहां पर अंडरपास बन रहा है तो निर्माण सामग्री पड़े होने से हालात पहले से बदतर हैं। अब बसें भी खड़ी की जा रही हैं।
रोडवेज परिसर में अभी जगह कम है। ऐसे में बसों को खड़ा करने में दिक्कत आती है। इसी वजह से कुछ बसें बाहर खड़ी होती है। दूसरी जगह को लेकर प्रस्ताव भेजा जा चुका है। - वीके गंगवार, एआरएम
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घन्नई ताल से ईदगाह की ओर जाने वाले आबादी वाले इलाके में रोडवेज स्टैंड है, परिसर में इतनी जगह नहीं कि ज्यादा बसों को खड़ा किया जा सके। अधिकतर बसें रोडवेज के बाहर सड़क पर खड़ी रहती हैं। बसों की कतार लगे होने से पहले से अतिक्रमण से घिरी सड़क और सिकुड़ जाती है। वैसे तो रोडवेज स्टैंड को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कवायद चल रही है। मगर यह कवायद अभी पूरी नहीं हो सकी है। तत्कालीन एआरएम की ओर से वर्ष 2017 में बीसलपुर रोड पर एक जगह चिह्नित की गई थी। इसका प्रस्ताव भी भेजा गया, मगर शासन स्तर पर जाकर ठप हो गया। अब तक इस प्रस्ताव को गति नहीं मिल सकी है। बसें रोडवेज से निकलने के बाद एकता सरोवर, नौगवां चौराहा और ओवरब्रिज के नीचे खड़ी दिखाई देती हैं। कोई अन्य वाहन प्रवेश करते ही जाम लग जाता है। अमर उजाला टीम ने इसकी पड़ताल की तो बसें इसी तरह से सड़क घेरकर खड़ी मिलीं।
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रोडवेज स्टैंड के बाहर की सड़क पर आवागमन अधिक रहता है। सड़क ज्यादा चौड़ी न होने के कारण यहां पर बसों के मोड़ने से दिक्कत आती है। इसके अलावा बसों का पहले से सड़क पर होना जाम लगा देता है। जब टीम वहां पहुंची तो रोज की तरह कई बसें सड़क पर खड़ी दिखीं। इसके अलावा कुछ दूरी पर प्राइवेट बस अड्डे की बसों ने भी जगह घेर रखी थी।
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नौगवां चौराहा पर सड़क पर अतिक्रमण पहले से है। वहीं रोडवेज बसों के लिए यह मुख्य चौराहा अड्डे की तरह हो गया है। रोडवेज स्टैंड से निकलने के बाद बसें यहां आकर रुकती हैं और यहीं से ज्यादातर सवारियां बैठाती हैं। इसके अलावा खाली बसें भी जहां-तहां खड़ी दिखीं। इन बसों के कारण दूसरे वाहनों के चालकों को आने-जाने में काफी मशक्कत करना पड़ रही थी।
नौगवां ओवरब्रिज के नीचे एक तरह से वाहनों का स्टैंड बन गया है। यहां पर टेंपो, मैजिक तो खड़े होते ही है। रोडवेज की बसों को खड़ा करने के लिए भी ये जगह इस्तेमाल की जा रही। यहां पर अंडरपास बन रहा है तो निर्माण सामग्री पड़े होने से हालात पहले से बदतर हैं। अब बसें भी खड़ी की जा रही हैं।
रोडवेज परिसर में अभी जगह कम है। ऐसे में बसों को खड़ा करने में दिक्कत आती है। इसी वजह से कुछ बसें बाहर खड़ी होती है। दूसरी जगह को लेकर प्रस्ताव भेजा जा चुका है। - वीके गंगवार, एआरएम