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Pilibhit News: बजट अटका...तेज हवा में ही बिजली का झटका
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शहर में तीन लाख से ऊपर उपभोक्ता
एक बार की आंधी, दो दिनों का संकट
तार जोड़ने में लग जाते हैं कई दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। आंधी तो दूर की बात, जर्जर तारों पर टिकी बिजली व्यवस्था को तेज हवा का झोंका तार-तार कर दे रहा है। बृहस्पतिवार रात आई तेज हवाओं ने शहर और देहात के दर्जनों मोहल्लों को अंधेरे में डाल दिया। खैर मनाइए कि आंधी न आए वर्ना फिर अंधेरा होगा। क्योंकि विभाग के पास अभी कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं। 480 करोड़ का प्रस्ताव पास हो गया। बजट का इंतजार है। हां, यह सोचकर जरूर खुश हो लीजिए कि हालात बदलेंगे। पर कब तक, इसका पता नहीं।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बेहतर बिजली आपूर्ति मुहैया कराने के शासन की ओर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। शहर में 22 और ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली मुहैया कराने के शासन ने आदेश जारी किए हैं, लेकिन जिले में इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। जिले में तीन लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। बिजली व्यवस्था की जिम्मेदारी के लिए तीन अधिशासी अभियंता और एक अधीक्षण अभियंता तैनात हैं।
पुराने संसाधन और जर्जर लाइनों में सुधार नहीं हो पा रहा है। शहर से लेकर देहात के इलाकों में लाइन फाॅल्ट की समस्या दूर नहीं हो पा रही है। पुराने संसाधन होने से कहीं लाइन टूटने तो कहीं ट्रांसफार्मर खराब होने की समस्या बनी रहती है।
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कई ऐसे इलाके है, जहां क्षमता के अनुसार संसाधन न होने से असमय फाॅल्ट होने से बिजली की आंखमिचौली चलती रहती है। एक दिन पहले ही आई आंधी में विद्युत व्यवस्था बेपटरी हो गई। आने वाले दिनों में भी ऐसा होगा, इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
-- इन इलाकों में होती है ज्यादा समस्या
दो दिन पूर्व आई आंधी में शहर के कमल्ले चौराहे, बेलो वाले चौराहा, स्टेशन रोड, दूधिया मंदिर, मोहल्ला शरीफ खा, टाउन एक और नकटादाना फीडर से जुड़े दर्जनों इलाकों में बिजली की अधिक समस्या रही थी। इन क्षेत्रों में अक्सर आपूर्ति बाधित होती है। इसके अलावा शहर से सटे बराह गांव और बीसलपुर के अलावा बिलसंडा व माधोटांडा में कई घंटे तक बिजली की अघोषित कटौती से उपभोक्ता परेशान रहे थे।
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रिवैम्प योजना - एक साल में काम भी न शुरू हुआ
सरकार की रिवैम्प योजना के अंतर्गत वर्ष 2022 में करीब 480 करोड़ की लागत का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। शासन से प्रस्ताव पास हो गया, अब अफसरों का दावा है कि सर्वे शुरू हो गया। कुछ इलाकों में सर्वे पूरा गया है। टेंडर प्रक्रिया के बाद कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। उम्मीद है कि एक महीने में काम शुरू हो जाए।
-- प्रस्ताव पर हो अमल तो होंगे यह कार्य
विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में दो नए उपकेंद्र, 16 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाने, जर्जर विद्युत लाइनों को बदलवाने, नए ट्रांसफार्मर के अलावा ओवरलोड ट्रांसफार्मरों के स्थान पर क्षमता के अनुसार ट्रांसफार्मर रखवाने की व्यवस्था शामिल हैं। गैस चौराहे पर एक नया एमवीए का उपकेंद्र बनाने के साथ बिठौरा कलां में एक दस एमवीए का नया उपकेंद्र का निर्माण कराने का कार्य भी इस प्रस्ताव में शामिल है। इसके अलावा जिले में चार फीडर के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। यह फीडर अमरिया, उदरा, मझोला और जहानाबाद में बनाए जाने हैं। अफसरों का कहना है कि शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जल्द ही कार्य पर अमल होने की उम्मीद है
-- विद्युत संसाधनों में सुधार के लिए प्रस्ताव पर जल्द ही अमल शुरू हो जाएगा। नकटादाना फीडर से जुड़े क्षेत्र में सर्वे भी कर लिया गया है। बजट जारी होने के बाद कार्य पर अमल किया जाएगा।
- ज्ञानेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत
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एक बार की आंधी, दो दिनों का संकट
तार जोड़ने में लग जाते हैं कई दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
पीलीभीत। आंधी तो दूर की बात, जर्जर तारों पर टिकी बिजली व्यवस्था को तेज हवा का झोंका तार-तार कर दे रहा है। बृहस्पतिवार रात आई तेज हवाओं ने शहर और देहात के दर्जनों मोहल्लों को अंधेरे में डाल दिया। खैर मनाइए कि आंधी न आए वर्ना फिर अंधेरा होगा। क्योंकि विभाग के पास अभी कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं। 480 करोड़ का प्रस्ताव पास हो गया। बजट का इंतजार है। हां, यह सोचकर जरूर खुश हो लीजिए कि हालात बदलेंगे। पर कब तक, इसका पता नहीं।
शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बेहतर बिजली आपूर्ति मुहैया कराने के शासन की ओर से तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। शहर में 22 और ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे बिजली मुहैया कराने के शासन ने आदेश जारी किए हैं, लेकिन जिले में इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। जिले में तीन लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। बिजली व्यवस्था की जिम्मेदारी के लिए तीन अधिशासी अभियंता और एक अधीक्षण अभियंता तैनात हैं।
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पुराने संसाधन और जर्जर लाइनों में सुधार नहीं हो पा रहा है। शहर से लेकर देहात के इलाकों में लाइन फाॅल्ट की समस्या दूर नहीं हो पा रही है। पुराने संसाधन होने से कहीं लाइन टूटने तो कहीं ट्रांसफार्मर खराब होने की समस्या बनी रहती है।
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कई ऐसे इलाके है, जहां क्षमता के अनुसार संसाधन न होने से असमय फाॅल्ट होने से बिजली की आंखमिचौली चलती रहती है। एक दिन पहले ही आई आंधी में विद्युत व्यवस्था बेपटरी हो गई। आने वाले दिनों में भी ऐसा होगा, इस संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
दो दिन पूर्व आई आंधी में शहर के कमल्ले चौराहे, बेलो वाले चौराहा, स्टेशन रोड, दूधिया मंदिर, मोहल्ला शरीफ खा, टाउन एक और नकटादाना फीडर से जुड़े दर्जनों इलाकों में बिजली की अधिक समस्या रही थी। इन क्षेत्रों में अक्सर आपूर्ति बाधित होती है। इसके अलावा शहर से सटे बराह गांव और बीसलपुर के अलावा बिलसंडा व माधोटांडा में कई घंटे तक बिजली की अघोषित कटौती से उपभोक्ता परेशान रहे थे।
रिवैम्प योजना - एक साल में काम भी न शुरू हुआ
सरकार की रिवैम्प योजना के अंतर्गत वर्ष 2022 में करीब 480 करोड़ की लागत का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था। शासन से प्रस्ताव पास हो गया, अब अफसरों का दावा है कि सर्वे शुरू हो गया। कुछ इलाकों में सर्वे पूरा गया है। टेंडर प्रक्रिया के बाद कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। उम्मीद है कि एक महीने में काम शुरू हो जाए।
विभाग की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में दो नए उपकेंद्र, 16 उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाने, जर्जर विद्युत लाइनों को बदलवाने, नए ट्रांसफार्मर के अलावा ओवरलोड ट्रांसफार्मरों के स्थान पर क्षमता के अनुसार ट्रांसफार्मर रखवाने की व्यवस्था शामिल हैं। गैस चौराहे पर एक नया एमवीए का उपकेंद्र बनाने के साथ बिठौरा कलां में एक दस एमवीए का नया उपकेंद्र का निर्माण कराने का कार्य भी इस प्रस्ताव में शामिल है। इसके अलावा जिले में चार फीडर के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। यह फीडर अमरिया, उदरा, मझोला और जहानाबाद में बनाए जाने हैं। अफसरों का कहना है कि शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जल्द ही कार्य पर अमल होने की उम्मीद है
- ज्ञानेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत