फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   border

नो मैंस लैंड पर नेपाल के 20 परिवारों का कब्जा

Sun, 14 Dec 2014 11:14 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत
ब्यूरो, अमर उजाला पीलीभीत Updated Sun, 14 Dec 2014 11:14 PM IST
विज्ञापन
border
दूसरी तरफ हर साल बाढ़ वाली यह नदी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पिलर को जब-तब क्षतिग्रस्त करती रही है। इन दिनों नदी का रुख फिर इन दोनों पिलर की ओर है। यदि समय रहते अतिक्रमणकारियों को वहां से हटाया गया, तो नहीं कराया गया तो इन परिवारों को भी खतरा हो सकता है।
विज्ञापन



मजबूरी में बसना पड़ा
नो मैंस लैंड पर कब्जा करने वाले ये नेपाली परिवार यह तो जानते हैं कि उन्होंने गलत किया है लेकिन उनका तर्क है कि ऐसा करना उनकी मजबूरी थी। वहां रह रहे धनबहादुर, भीम बहादुर, नीतू व किशनबहादुर ने बताया कि वे लोग मूल रूप से नेपाल के कंचनपुर जिले के गांव कुतिया कवर के रहने वाले हैं। ये गांव नो मैंस लैंड से करीब दो किलोमीटर दूर था। 15 साल के अंदर सनेडी नदी ने उनकी कृषि भूमि और आवास काटती चली गई। नेपाल सरकार ने उन्हें कहीं बसने की दूसरी जगह नहीं दी। नतीजतन, ये लोग लगातार नो मैंस लैंड की ओर बढ़ते रहे। यहां से भारतीय बाजार नौजलहा व गभिया सराई नजदीक है जबकि नेपाल के बाजार करीब दस किमी दूर हैं।
विज्ञापन


पिलर नंबर 18 और 19 भारतीय क्षेत्र में बहने वाली शारदा नदी से लगा है। जहां कटान रोकने के लिए 12 ठोकरें बनाई गई हैं। पिलर नंबर 20 व 21 की तरफ बहने वाली सनेडी नदी का हिस्सा नेपाल में आता है। उन पिलर को बचाने के लिए नेपाल सरकार ही ठोकर बना सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

- जीवनराम यादव, ईई शारदा सागर डैम
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed