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Pilibhit News: भाजपा के समक्ष गढ़ बचाने की चुनौती, सेंधमारी की फिराक में सपा-बसपा

Fri, 19 Apr 2024 05:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2024 05:09 AM IST
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BJP faces a challenge to save its stronghold, SP-BSP are looking for burglary
भाजपा प्रत्याशी जितिन प्रसाद ।
- पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र में नए चेहरों के सामने खुद को साबित करने का दबाव
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- मुद्दों-वादों के बीच ध्रुवीकरण और जातीय समीकरण पर भी सियासी दलों की नजर


पीलीभीत-बरेली। गोमती नदी के उद्गम स्थल से चलने वाली सियासी बयार का रुख शुक्रवार को पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र के मतदाता तय कर देंगे। भगवा गढ़ में भाजपा के सामने साख बनाए रखने की चुनौती है। मेनका और वरुण गांधी की बदौलत 40 वर्ष से भाजपा के कब्जे वाली इस सीट पर सपा-बसपा की भी नजर है। त्रिकोणीय मुकाबले में रणनीतिकारों की नजर मतों के ध्रुवीकरण के साथ जातीय समीकरणों पर भी टिकी है।
चार दशक में यह पहला मौका है जब मेनका या वरुण गांधी की गैरमौजूदगी में चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में भाजपा के सामने इस पुरानी सियासी जमीन पर नए चेहरे के दम पर गढ़ को बचाने की चुनौती है। सपा मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के जरिये जीत का सपना संजो रही है। बसपा भी दलित-मुस्लिम गठजोड़ के जरिये भाग्य चमकाने की फिराक में है।
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भाजपा ने वरुण गांधी का टिकट काटकर शाहजहांपुर और धौरहरा से सांसद रहे चुके लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद पर दांव लगाया है। युवा ब्राह्मण चेहरे के जरिये पार्टी ने बदलाव का संदेश भी दिया है। उधर, निर्णायक भूमिका वाले कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए सपा ने पूर्व मंत्री भगवत सरन गंगवार को मैदान में उतारा है। रुहेलखंड में पहली जीत की तलाश में बसपा ने दलित-मुस्लिम फार्मूले पर पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू पर तीसरी बार भरोसा जताया है।
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मोदी, माया और अखिलेश ने लगाया है जोर
भाजपा प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ अप्रैल को पीलीभीत पहुंचे थे। 12 अप्रैल को पूरनपुर में सपा मुखिया अखिलेश यादव और 15 अप्रैल को बसपा सुप्रीमो मायावती भी अपने-अपने प्रत्याशी के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश कर चुकी हैं। सभी दल व प्रत्याशी अपने-अपने फार्मूले से चुनाव लड़ रहे हैं।
जातीय समीकरण तय करेंगे जीत और हार
इस सीट पर मुस्लिम और कुर्मी बिरादरी के मतदाता ही चुनावी समीकरण तय करते हैं। लोध, किसान और राजपूत मतदाताओं की भी भूमिका अहम मानी जाती है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 60 से 70 हजार, बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र में 70 से 80 हजार, बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र में 30 हजार कुर्मी मतदाता हैं। पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र में नाम मात्र के कुर्मी हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में शामिल बरेली के बहेड़ी विधानसभा क्षेत्र में लगभग 85 हजार कुर्मी मतदाता हैं। पूरे लोकसभा क्षेत्र में 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं।

जातिगत आंकड़े



मुस्लिम पांच लाख, लोधी किसान 4.35 लाख, कुर्मी 2.15 लाख, मौर्य 70 हजार, पासी 70 हजार, जाटव 65 हजार, बंगाली 50 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, सिख 45 हजार, कश्यप 40 हजार, भुर्जी 28 हजार, बढ़ई 26 हजार, धोबी 26 हजार, ठाकुर 22 हजार, नाई 19 हजार, यादव 18 हजार, बनिया 18 हजार, कुम्हार 18 हजार, राठौर 17 हजार, खटीक 12 हजार, कोरी 12 हजार, जाट 12 हजार, कायस्थ 12 हजार, अन्य 59 हजार।

नोट : यह आंकड़े विभिन्न राजनीतिक दलों के आकलन के आधार पर है। इसमें बदलाव भी संभव है।


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अपने प्रत्याशी को जानिए
नाम : जितिन प्रसाद
पार्टी : भाजपा
शिक्षा : दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम और दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान से एमबीए।

सियासी सफर : वर्ष 2021 में भाजपा से जुड़ने वाले जितिन प्रसाद शाहजहांपुर निवासी हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव भी रहे हैं। जितिन प्रसाद ने वर्ष 2004 में शाहजहांपुर से आम चुनाव लड़ा और जीते थे। वर्ष 2009 में धाैरहरा से सांसद बने और सरकार में मंत्री भी बने थे। इनके पास सड़क-परिवहन व पेट्रोलियम आदि महत्वपूर्ण मंत्रालय रहे। वर्ष 2014 व 2019 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2017 में तिलहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हारे।
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नाम : भगवत सरन गंगवार
पार्टी : सपा
शिक्षा : इंटरमीडिएट

सियासी सफर : नवाबगंज के गांव अहमदाबाद के रहने वाले भगवत सरन गंगवार वर्ष 1991 और 1993 में भाजपा के टिकट पर बरेली के नवाबगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। वर्ष 1996 के चुनाव में हार के बाद वर्ष 2002 में वह सपा में शामिल हो गए। सपा के टिकट पर वर्ष 2002, 2007, 2012 में लगातार तीन बार विधायक और मंत्री रहे। 2009 में बरेली संसदीय सीट से आम चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।



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नाम : अनीस अहमद खां उर्फ फूलबाबू
पार्टी : बसपा
शिक्षा : स्नातक

सियासी सफर : बीसलपुर के मोहल्ला हबीबुल्ला खां जैनुबी के रहने वाले अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू वर्ष 1996 में पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक बने थे। इसके बाद वर्ष 2002 और 2007 में भी चुनाव जीते, मंत्री भी रहे। राजनीति की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की थी। वर्ष 1989 में उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता ली थी। वर्ष 1990 में वह बसपा में शामिल हो गए। वर्ष 1991, 1993 में बसपा से चुनाव लड़े पर कामयाबी नहीं मिली।

भाजपा प्रत्याशी जितिन प्रसाद ।

भाजपा प्रत्याशी जितिन प्रसाद ।

भाजपा प्रत्याशी जितिन प्रसाद ।

भाजपा प्रत्याशी जितिन प्रसाद ।

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