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प्रधान सहायक को सीडीओ ने निलंबित किया
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Thu, 22 Dec 2016 11:11 PM IST
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दत्तक पुत्र के रूप में ग्राम पंचायत अधिकारी की नियुक्ति मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। डीएम के निर्देश पर प्रधान सहायक को सीडीओ ने निलंबित कर दिया है जबकि संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी की नौैकरी जाना भी तय माना जा रहा है। बिलसंडा ब्लाक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी बटन लाल की मृत्यु के बाद ब्लाक में तैनात एक अन्य ग्राम पंचायत अधिकारी बाबूराम के पुत्र राजीव प्रकाश ने बटन लाल के दत्तक पुत्र के रूप में अभिलेख प्रस्तुत कर ग्राम पंचायत अधिकारी की नौकरी हासिल कर ली थी। इसकी शिकायत होने पर ग्राम पंचायत अधिकारी राजीव प्रकाश को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर लिया गया। इसके खिलाफ राजीव प्रकाश ने कोर्ट में याचिका दायर की जो उनपर ही भारी पड़ी। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच के आदेश दिये हैं। इसके बाद शुरू हुई विभागीय जांच से हड़कंप मच गया है। करीब एक माह तक चली जांच में कई लोग फंस सकते हैं। जांच पूरी होने पर सीडीओ ने रिपोर्ट डीएम को भेजी। उन्होंने कार्रवाई के निर्देश दिए। इस पर सीडीओ ने कार्रवाई की शुरुआत करते हुए इस मामले में प्रधान सहायक केंद्र सक्सेना को निलंबित कर दिया है। प्रधान सहायक को निलंबित कर मामले की जांच पीडी आरबी भास्कर को सौंपी गई है।
ग्राम पंचायत अधिकारी की नौकरी जाना तय
दत्तक पुत्र के रूप में नौकरी हासिल करने वाले राजीव प्रकाश की नौकरी जाना भी तय माना जा रहा है। इस मामले में हुई जांच में गोदनामा सहित कई अभिलेख गलत पाए गए हैं।
कई और की फंसेगी गर्दन
गलत तथ्यों पर नियुक्ति के साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी पर तत्कालीन बीडीओ सहित संबंधित अधिकारियों ने काफी मेहरबानियां की। नियुक्ति के महज 15 दिन बाद ही उसे दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों का दायित्व सौंप दिया। इसके बाद इन ग्राम पंचायतों के खातों में लाखों रुपये निकाले गए। यदि नियुक्ति के बाद के कार्य आवंटन एवं धन निकासी की जांच हुई तो कई पर गाज गिरेगी।
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जांच में ग्राम पंचायत अधिकारी की नियुक्ति के मामले में प्रधान सहायक को दोषी पाया गया है। इसपर डीएम के निर्देश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
- इंद्रदेव द्विवेदी, मुख्य विकास अधिकारी
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ग्राम पंचायत अधिकारी की नौकरी जाना तय
दत्तक पुत्र के रूप में नौकरी हासिल करने वाले राजीव प्रकाश की नौकरी जाना भी तय माना जा रहा है। इस मामले में हुई जांच में गोदनामा सहित कई अभिलेख गलत पाए गए हैं।
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कई और की फंसेगी गर्दन
गलत तथ्यों पर नियुक्ति के साथ ही संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी पर तत्कालीन बीडीओ सहित संबंधित अधिकारियों ने काफी मेहरबानियां की। नियुक्ति के महज 15 दिन बाद ही उसे दो दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों का दायित्व सौंप दिया। इसके बाद इन ग्राम पंचायतों के खातों में लाखों रुपये निकाले गए। यदि नियुक्ति के बाद के कार्य आवंटन एवं धन निकासी की जांच हुई तो कई पर गाज गिरेगी।
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जांच में ग्राम पंचायत अधिकारी की नियुक्ति के मामले में प्रधान सहायक को दोषी पाया गया है। इसपर डीएम के निर्देश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है।
- इंद्रदेव द्विवेदी, मुख्य विकास अधिकारी