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जिला पंचायत की सातवीं अध्यक्ष बनी आरती
पीलीभीत।
Updated Thu, 07 Jan 2016 10:54 PM IST
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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतकर सपा की आरती देवी ने जिले की सातवीं
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और तीसरी महिला अध्यक्ष होने का गौरव हासिल किया है। आरती से पूर्व रुकैइया
और अनीता वर्मा महिला अध्यक्ष रही हैं जबकि पोथीराम गंगवार पहले अध्यक्ष
बने थे।
1994-95 में कल्याण सिंह की सरकार में जिला परिषद को जिला पंचायत का दर्जा दिया गया था। उस समय पोथीराम गंगवार जिला परिषद के अध्यक्ष थे। जिला परिषद से जिला पंचायत बनने पर पोथीराम गंगवार ही पहले अध्यक्ष रहे। हालांकि कुछ समय बाद ही चुनाव हुआ जिसमें बुद्धसेन वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए।
इसके बाद वर्ष 2000 में गुरदयाल को अध्यक्ष चुना गया। गुरदयाल सिंह के बाद वर्ष 2005 में बुद्धसेन वर्मा की पत्नी अनीता वर्मा विजयी रहीं। वर्ष 2010 में भी अनीता वर्मा चुनाव जीतीं लेकिन प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से उन्हें हटाकर राज्यमंत्री हाजी रियाज अहमद की पुत्री रूकैइया आरिफ जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुई।
अब संपन्न हुए चुनाव में सपा की आरती देवी ने जीत हासिल कर जिले की सातवीं और तीसरी महिला अध्यक्ष होने का गौरव हासिल किया है।
सबसे कम उम्र की अध्यक्ष बनने का बनाया रिकार्ड
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतकर आरती देवी ने सबसे कम उम्र की जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का रिकार्ड बनाया है। उन्होंने यह गौरव मात्र 23 साल सात माह की आयु में हासिल किया है जबकि इससे पूर्व यह रिकार्ड निर्वतमान जिला पंचायत अध्यक्ष रूकैया आरिफ के नाम था जो 27 साल की उम्र में जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं।
जिले की सातवीं जिला पंचायत अध्यक्ष बनी आरती देवी ने प्राइमरी शिक्षा शहर के ही प्राथमिक विद्यालय से हासिल की थी और वर्तमान में वह अंग्रेजी से एमए हैं। पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने के बाद पूरनपुर विधायक पीतमराम ने अपने पुत्र डॉ. महेंद्र के साथ आनन फानन में विवाह कराया था।
शादी के चंद दिनों बाद ही चुनाव जीत कर उन्होंने न सिर्फ अपने विधायक ससुर की इच्छाओं को पूरा कर उनका कद वहीं स्वयं भी जिले की प्रथम नागरिक बनने का गौरव हासिल किया।
जिले के विकास में आएगी और तेजी
जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद प्रेस को अपनी प्रथम प्रतिक्रिया देते हुए आरती ने कहा जनता और जनप्रतिनिधियों ने जिस उम्मीद के साथ मुझे चुना है उस पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी। जिले में चल रहे विकास कार्यों में और तेजी लाई जाएगी। उन्होंने साथ में मौजूद निर्वतमान जिला पंचायत अध्यक्ष रूकैइया की ओर मुखातिब होते हुए कि इनका भी सहयोग और रायमशविरा लेकर विकास को गति दी जाएगी।
सपा के तीनों विधायकों के पास हो गई लालबत्ती
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा होने के साथ ही सपा के तीनों विधायकों के पास लालबत्ती हो गई है। जिले में सपा के दो विधायक पहले ही मंत्री बनाए हैं वहीं पुत्रवधू के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने से अब विधायक पीतमराम के घर भी लालबत्ती पहुंच गई है।
जिले की चार विधानसभाओं में तीन क्रमश: सदर, बरखेड़ा और पूरनपुर में सपा के विधायक हैं। इसमें शहर विधायक हाजी रियाज अहमद को सरकार बनने के बाद ही राज्यमंत्री बना दिया गया था, जबकि पिछले माह हुए फेरबदल में स्वतंत्र प्रभार देकर उनका कद भी बढ़ा दिया गया। वहीं बरखेड़ा विधायक हेमराज वर्मा को भी राज्यमंत्री बना दिया गया था।
बरखेड़ा विधायक को राज्यमंत्री बनाने के समय ही पूरनपुर विधायक को भी जिला पंचायत अध्यक्ष के बहाने लालबत्ती देने की रणनीति तैयार हो गई थी। हाईकमान से हरी झंडी मिलने के बाद ही विधायक ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी थी और शायद यही कारण रहा कि सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो जाने बाद उन्होंने आनन फानन में अपने पुत्र डा. महेंद्र की शादी आरती से कराई।
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बृहस्पतिवार को हुए चुनाव में आरती के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के साथ ही पूरनपुर विधायक पीतमराम के घर भी लालबत्ती पहुंच गई।
1994-95 में कल्याण सिंह की सरकार में जिला परिषद को जिला पंचायत का दर्जा दिया गया था। उस समय पोथीराम गंगवार जिला परिषद के अध्यक्ष थे। जिला परिषद से जिला पंचायत बनने पर पोथीराम गंगवार ही पहले अध्यक्ष रहे। हालांकि कुछ समय बाद ही चुनाव हुआ जिसमें बुद्धसेन वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए।
इसके बाद वर्ष 2000 में गुरदयाल को अध्यक्ष चुना गया। गुरदयाल सिंह के बाद वर्ष 2005 में बुद्धसेन वर्मा की पत्नी अनीता वर्मा विजयी रहीं। वर्ष 2010 में भी अनीता वर्मा चुनाव जीतीं लेकिन प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से उन्हें हटाकर राज्यमंत्री हाजी रियाज अहमद की पुत्री रूकैइया आरिफ जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुई।
अब संपन्न हुए चुनाव में सपा की आरती देवी ने जीत हासिल कर जिले की सातवीं और तीसरी महिला अध्यक्ष होने का गौरव हासिल किया है।
सबसे कम उम्र की अध्यक्ष बनने का बनाया रिकार्ड
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतकर आरती देवी ने सबसे कम उम्र की जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का रिकार्ड बनाया है। उन्होंने यह गौरव मात्र 23 साल सात माह की आयु में हासिल किया है जबकि इससे पूर्व यह रिकार्ड निर्वतमान जिला पंचायत अध्यक्ष रूकैया आरिफ के नाम था जो 27 साल की उम्र में जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं।
जिले की सातवीं जिला पंचायत अध्यक्ष बनी आरती देवी ने प्राइमरी शिक्षा शहर के ही प्राथमिक विद्यालय से हासिल की थी और वर्तमान में वह अंग्रेजी से एमए हैं। पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने के बाद पूरनपुर विधायक पीतमराम ने अपने पुत्र डॉ. महेंद्र के साथ आनन फानन में विवाह कराया था।
शादी के चंद दिनों बाद ही चुनाव जीत कर उन्होंने न सिर्फ अपने विधायक ससुर की इच्छाओं को पूरा कर उनका कद वहीं स्वयं भी जिले की प्रथम नागरिक बनने का गौरव हासिल किया।
जिले के विकास में आएगी और तेजी
जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद प्रेस को अपनी प्रथम प्रतिक्रिया देते हुए आरती ने कहा जनता और जनप्रतिनिधियों ने जिस उम्मीद के साथ मुझे चुना है उस पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी। जिले में चल रहे विकास कार्यों में और तेजी लाई जाएगी। उन्होंने साथ में मौजूद निर्वतमान जिला पंचायत अध्यक्ष रूकैइया की ओर मुखातिब होते हुए कि इनका भी सहयोग और रायमशविरा लेकर विकास को गति दी जाएगी।
सपा के तीनों विधायकों के पास हो गई लालबत्ती
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा होने के साथ ही सपा के तीनों विधायकों के पास लालबत्ती हो गई है। जिले में सपा के दो विधायक पहले ही मंत्री बनाए हैं वहीं पुत्रवधू के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने से अब विधायक पीतमराम के घर भी लालबत्ती पहुंच गई है।
जिले की चार विधानसभाओं में तीन क्रमश: सदर, बरखेड़ा और पूरनपुर में सपा के विधायक हैं। इसमें शहर विधायक हाजी रियाज अहमद को सरकार बनने के बाद ही राज्यमंत्री बना दिया गया था, जबकि पिछले माह हुए फेरबदल में स्वतंत्र प्रभार देकर उनका कद भी बढ़ा दिया गया। वहीं बरखेड़ा विधायक हेमराज वर्मा को भी राज्यमंत्री बना दिया गया था।
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बरखेड़ा विधायक को राज्यमंत्री बनाने के समय ही पूरनपुर विधायक को भी जिला पंचायत अध्यक्ष के बहाने लालबत्ती देने की रणनीति तैयार हो गई थी। हाईकमान से हरी झंडी मिलने के बाद ही विधायक ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी थी और शायद यही कारण रहा कि सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित हो जाने बाद उन्होंने आनन फानन में अपने पुत्र डा. महेंद्र की शादी आरती से कराई।
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बृहस्पतिवार को हुए चुनाव में आरती के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के साथ ही पूरनपुर विधायक पीतमराम के घर भी लालबत्ती पहुंच गई।