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जिम्मेदार बने रहे लापरवाह, कूड़ाघर बना शहर
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Fri, 05 May 2017 10:32 PM IST
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जिम्मेदार बने रहे लापरवाह, कूड़ाघर बना शहर
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स्वच्छ भारत सर्वे में पीलीभीत शहर 374वें स्थान पर रहा। वजह भी साफ है कि करीब ढाई लाख की आबादी वाले इस शहर में सफाई व्यवस्था को कभी प्राथमिकता नहीं दी गई। जिम्मेदार तो लापरवाह बने ही रहे, वहीं शहरवासियों ने भी इसको लेकर कभी आवाज बुलंद नहीं की। मोदी के स्वच्छता अभियान का डंका भी गली-गली बजा, लेकिन उसका असर इक्का दुक्का स्थानों पर ही असर देखने को मिला।
चार दशक पुराने हेल्थ मैनुअल पर टिकी सफाई
शहर में 27 वार्ड हैं। इन वार्डों में पालिका प्रशासन द्वारा चार दशक पुराने हेल्थ मैनुअल के अनुसार ही सफाई कराई जा रही है। अगर पुराने हेल्थ मैनुअल के आधार पर गौर करें तो उसके मुताबिक यहां सफाईकर्मियों के सृजित 338 पदों के सापेक्ष मात्र 195 कर्मी ही तैनात है। वहीं कूड़ा निस्तारण का कोई प्रबंध न होने के चलते जगह-जगह कूड़े के ढेर व गंदगी देखी जा सकत है।
स्वच्छता मिशन के नाम पर महज दिखावा
पालिका प्रशासन के मुताबिक स्वच्छता मिशन के तहत समय समय पर सफाई अभियान चलाने के साथ शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है, लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। सफाई अभियानों के नाम पर कुछ स्थानों को छोड़कर महज खानापूरी ही की गई। शौचालय निर्माण की गति भी धीमी रही। कूड़ा निस्तारण को लेकर अस्थाई डलावघर भी नहीं तलाशा जा सका।
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शौचालय का लक्ष्य तो मिला, नहीं मिली धनराशि
स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2012 में हुए सर्वे के तहत जिले में 3,49,316 शौचालय का निर्माण होना था। जिसमें अब तक 1,87,352 शौचालय का निर्माण किया जा चुका है। अभी 1,63, 826 शौचालयों का निर्माण 31 दिसंबर 2017 पूरा करने का लक्ष्य है लेकिन हैरत की बात यह है कि इसके लिए इस वर्ष अब तक मात्र सात करोड़ रुपये जारी किए गए जिससे लगभग पांच हजार शौचालय निर्माण होना ही संभव है। कमोवेश शहर का भी यही हाल है। शहर में 1250 शौचालय निर्माण का लक्ष्य है, लेकिन अभी तक मात्र 250 शौचालय को लेकर ही पहली किस्त जारी की गई है।
डलावघर न होने से कूड़ा उठान व्यवस्था बेपटरी
हैरानगी की बात यह है कि शहर में कूड़ा निस्तारण की कोई स्थाई डलावघर ही नहीं है। शहर के करीब 30 अस्थाई डलावघरों का कूड़ा शहर से सटी देवहा नदी की तलटही में डाला जा रहा है। हालांकि संसाधनों के बढ़ने के बाद कूड़ा उठान की व्यवस्था में पिछले सालों की अपेक्षा सुधार आया है।
यह है आगामी योजनाएं
पालिका प्रशासन के मुताबिक स्वच्छता मिशन के तहत कूड़ा निस्तारण को स्थाई डलावघर की व्यवस्था प्राथमिकता के तौर पर की जाएगी। शौचालयों का निर्माण व अवेयरनेस प्रोग्राम आदि किए जाएंगे। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा डालने वाले अस्पतालों व बारातघरों पर सख्ती की जाएगी। मलिन बस्तियों में प्रत्येक घर को डस्टबिन उपलब्ध कराई जाएगी।
यह है शहर की सफाई व्यवस्था का हाल
शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने को करीब 30 अस्थाई डलावघर बने हैं, लेकिन यह अस्थाई डलावघर ही मुसीबत का सबब बने हैं। शहर के स्टेशन रोड, स्टेडियम रोड, आयुर्वेदिक कॉलेज रोड, जेपी रोड के आसपास सालों से कूड़ा डाला जा रहा है। समय से कूड़ा उठान न होने से पड़ा कूड़ा आधी सड़क तक आ जाता है। कमोवेश यही हाल शहर के गली मोहल्लों का भी है। कई-कई दिन तक कूड़ा न उठने से लोगों को गंदगी के बीच ही दिन गुजारने पड़ रहे हैं। नाले नालियों की भी यही दशा है। बड़े नालों तो गंदगी के ढेर से पटते ही जा रहे हैं। बजबजाती नालियों से उठती दुर्गंध हर किसी को बेचैन कर रही है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को साथ सुथरा बनाने के पूरे प्रयास किए गए। सफाईकर्मियों को एक की जगह दो शिफ्टों में लगाकर सफाई कराई जा रही है। कूड़ा उठान के बाद कीटनाशक दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है, लेकिन लोगों में अवेयरनेस की कमी के चलते व्यवस्थाएं पूरी तरह से बेहतर नहीं हो सकी। वहीं सफाईकर्मियों की बेतहाशा कमी बनी हुई है। - प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष नगरपालिका परिषद
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चार दशक पुराने हेल्थ मैनुअल पर टिकी सफाई
शहर में 27 वार्ड हैं। इन वार्डों में पालिका प्रशासन द्वारा चार दशक पुराने हेल्थ मैनुअल के अनुसार ही सफाई कराई जा रही है। अगर पुराने हेल्थ मैनुअल के आधार पर गौर करें तो उसके मुताबिक यहां सफाईकर्मियों के सृजित 338 पदों के सापेक्ष मात्र 195 कर्मी ही तैनात है। वहीं कूड़ा निस्तारण का कोई प्रबंध न होने के चलते जगह-जगह कूड़े के ढेर व गंदगी देखी जा सकत है।
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स्वच्छता मिशन के नाम पर महज दिखावा
पालिका प्रशासन के मुताबिक स्वच्छता मिशन के तहत समय समय पर सफाई अभियान चलाने के साथ शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है, लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। सफाई अभियानों के नाम पर कुछ स्थानों को छोड़कर महज खानापूरी ही की गई। शौचालय निर्माण की गति भी धीमी रही। कूड़ा निस्तारण को लेकर अस्थाई डलावघर भी नहीं तलाशा जा सका।
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शौचालय का लक्ष्य तो मिला, नहीं मिली धनराशि
स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2012 में हुए सर्वे के तहत जिले में 3,49,316 शौचालय का निर्माण होना था। जिसमें अब तक 1,87,352 शौचालय का निर्माण किया जा चुका है। अभी 1,63, 826 शौचालयों का निर्माण 31 दिसंबर 2017 पूरा करने का लक्ष्य है लेकिन हैरत की बात यह है कि इसके लिए इस वर्ष अब तक मात्र सात करोड़ रुपये जारी किए गए जिससे लगभग पांच हजार शौचालय निर्माण होना ही संभव है। कमोवेश शहर का भी यही हाल है। शहर में 1250 शौचालय निर्माण का लक्ष्य है, लेकिन अभी तक मात्र 250 शौचालय को लेकर ही पहली किस्त जारी की गई है।
डलावघर न होने से कूड़ा उठान व्यवस्था बेपटरी
हैरानगी की बात यह है कि शहर में कूड़ा निस्तारण की कोई स्थाई डलावघर ही नहीं है। शहर के करीब 30 अस्थाई डलावघरों का कूड़ा शहर से सटी देवहा नदी की तलटही में डाला जा रहा है। हालांकि संसाधनों के बढ़ने के बाद कूड़ा उठान की व्यवस्था में पिछले सालों की अपेक्षा सुधार आया है।
यह है आगामी योजनाएं
पालिका प्रशासन के मुताबिक स्वच्छता मिशन के तहत कूड़ा निस्तारण को स्थाई डलावघर की व्यवस्था प्राथमिकता के तौर पर की जाएगी। शौचालयों का निर्माण व अवेयरनेस प्रोग्राम आदि किए जाएंगे। सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा डालने वाले अस्पतालों व बारातघरों पर सख्ती की जाएगी। मलिन बस्तियों में प्रत्येक घर को डस्टबिन उपलब्ध कराई जाएगी।
यह है शहर की सफाई व्यवस्था का हाल
शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने को करीब 30 अस्थाई डलावघर बने हैं, लेकिन यह अस्थाई डलावघर ही मुसीबत का सबब बने हैं। शहर के स्टेशन रोड, स्टेडियम रोड, आयुर्वेदिक कॉलेज रोड, जेपी रोड के आसपास सालों से कूड़ा डाला जा रहा है। समय से कूड़ा उठान न होने से पड़ा कूड़ा आधी सड़क तक आ जाता है। कमोवेश यही हाल शहर के गली मोहल्लों का भी है। कई-कई दिन तक कूड़ा न उठने से लोगों को गंदगी के बीच ही दिन गुजारने पड़ रहे हैं। नाले नालियों की भी यही दशा है। बड़े नालों तो गंदगी के ढेर से पटते ही जा रहे हैं। बजबजाती नालियों से उठती दुर्गंध हर किसी को बेचैन कर रही है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को साथ सुथरा बनाने के पूरे प्रयास किए गए। सफाईकर्मियों को एक की जगह दो शिफ्टों में लगाकर सफाई कराई जा रही है। कूड़ा उठान के बाद कीटनाशक दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है, लेकिन लोगों में अवेयरनेस की कमी के चलते व्यवस्थाएं पूरी तरह से बेहतर नहीं हो सकी। वहीं सफाईकर्मियों की बेतहाशा कमी बनी हुई है। - प्रभात जायसवाल, अध्यक्ष नगरपालिका परिषद