फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   baagh

कानपुर चिडिय़ाघर भेजा गया पकड़ा गया बाघ

Sat, 04 Apr 2020 11:53 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 04 Apr 2020 11:53 PM IST
विज्ञापन
baagh
पीलीभीत। दो ग्रामीणों को निवाला बनाने के बाद पकड़े गए बाघ को शुक्रवार रात कानपुर चिड़ियाघर भेज दिया है। टाइगर रिजर्व प्रशासन के मुताबिक बाघ वहां 30 दिन की निगरानी में रहेगा, उसके बाद ही उच्चाधिकारी फैसला लेंगे कि उसे किस जंगल में छोड़ा जाए।
विज्ञापन

टाइगर रिजर्व की माला रेंज के इलाके में 14 दिन के भीतर बाघ चार लोगों को निवाला बना चुका है। बाघ ने 21 मार्च को माला कॉलोनी के पास रहने वाली रमोनी देवी और 30 मार्च को कृष्णा राय को अपना निवाला बना डाला था। मौतों का सिलसिला इतने पर ही नहीं थमा। बाघ ने दो अप्रैल की रात रिछोला फार्म में किसान निंदर सिंह और उनके नौकर को उस समय मार डाला, जब दोनों अपने घर से करीब 200 मीटर दूर खेत मेें बनी एक कोठरी में सो रहे थे। लगातार बाघ के हमलों में हुई मौतों के बाद टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने शुक्रवार को प्रमुख मुख्य वन सरंक्षक (वन्यजीव) को अवगत कराया। उन्होंने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने के निर्देश दिए। इसके बाद अधिकारियों के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने शुक्रवार दोपहर ही बाघ को उसी इलाके में ट्रैंक्युलाइज कर पिंजरे में कैद कर लिया। फिर बाघ को गढ़ा रेंज में रखा गया। बाघ की निगरानी में लगे एसडीओ प्रवीण खरे ने बताया कि कैद में रखे बाघ को मुर्गा खाने को दिया गया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एसडीओ प्रवीण खरे और पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके राठौर की देखरेख में बाघ शुक्रवार शाम 8:30 बजे कानपुर चिड़ियाघर रवाना कर दिया गया। शनिवार को एसडीओ प्रवीण खरे ने बताया कि बाघ को सुरक्षित कानपुर चिड़ियाघर में छोड़ दिया गया है। वहां बाघ की 30 दिन तक निगरानी के बाद तय किया जाएगा कि उसे कहां छोड़ा जाए।
विज्ञापन

अब तक पकड़े गए सात बाघ और पांच तेंदुए:
- मार्च 2014 को पूरनपुर रोड के गढ़वाखेड़ा से से पकड़े गए बाघ को कानपुर चिड़ियाघर भेजा।
- नवंबर 2016 को गांव मल्लपुर से पकड़े गए बाघ को महोफ रेंज के जंगल में छोड़ा।
- फरवरी 2017 को गांव सुखदासपुर नवदिया से पकड़े गए बाघ को लखनऊ चिड़ियाघर ले जाया गया।
- जून 2017 को जटपुरा से पकड़े गए तेंदुए को लखनऊ चिड़ियाघर भेजा।
- फरवरी 2018 को विधिपुर से पकड़े गए बाघ को कतर्निया घाट पर छोड़ा।
- मार्च 2018 को चांदपुर से पकड़े गए बाघ को दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा।
- सितंबर 2018 गांव बूंदीभूड़ से पकड़े गए तेंदुए को महोफ रेंज के जंगल में छोड़ा।
- दिसंबर 2018 को गांव महाराजपुर से पकड़े गए तेंदुए को महोफ रेंज के जंगल में छोड़ा।
- फरवरी 2019 में गांव नौजल्हा से पकड़े गए तेंदुए को दियूरिया रेंज में छोड़ा।
- मई 2019 में खजुरिया पचपेड़ा में पकड़े गए बाघ को लखनऊ चिड़ियाघर भेजा।
- सितंबर 2019 को सेल्हा से पकड़े गए तेंदुए को कानपुर चिड़ियाघर भेजा।
- 04 अप्रैल 2020 को रिच्छोला से पकड़े गए बाघ को कानपुर चिड़ियाघर भेजा।
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पकड़े गए बाघ को सुरक्षित कानपुर चिड़ियाघर पहुंचा दिया गया है। वहां बाघ की 30 दिन तक निगरानी की जाएगी। इसके बाद ही उच्चाधिकारी तय करेंगे कि बाघ कहां छोड़ा जाए। -एच राजामोहन, फील्ड डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed