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Pilibhit News: हर्षित के दसवां संस्कार में पहुंचे लोग बोले- अफसर बचा सकते थे दो जानें
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पूरनपुर। बदायूं में एचपीसीएल के प्लांट में उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। उधर, हर्षित मिश्रा के दसवां संस्कार में शामिल होने आए लोगों का कहना था कि जब दोनों अधिकारियों ने सुरक्षा मांगी थी तो अफसर अगर सजगता दिखाते तो उनकी जानें बच सकती थीं।
एचपीसीएल के सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा का सोमवार को नगर के देवीस्थान के समीप दसवां संस्कार हुआ। दसवां संस्कार में शामिल हुए अधिकांश लोग एचपीसीएल के दोनों अफसरों के हत्याकांड पर चर्चा करते रहे। चर्चा में सुधीर गुप्ता की ओर से चार फरवरी को मूसाझाग थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट भी रही।
लोगों का कहना था कि मुख्य आरोपी ने पहली बार ही प्लांट में घुसकर घटना को अंजाम नहीं दिया। इससे पहले 13 जनवरी को भी मुख्य आरोपी एक ठेकेदार की टैक्सी को जबरन कब्जे में लेकर प्लांट में घुसा था। इतना ही नहीं कांफ्रेंस रूम में खाना खा रहे दोनों अफसरों को सबक सिखाने की धमकी दी थी।
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सुधीर गुप्ता ने चार फरवरी को इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जान को खतरा की आशंका पर हर्षित मिश्रा और सुधीर गुप्ता कई बार वहां के डीएम, एसपी से मिले। एचपीसीएल अफसरों को भी जानमाल की आशंका की जानकारी देने के साथ पत्राचार किया था। सुधीर गुप्ता ने तो बीआरएस लेने को कागजी कार्रवाई पूरी कर ली थी।
हर्षित भी दूसरी जगह स्थानांतरण की मांग कर रहे थे। अगर उनकी गुहार पर अफसर ध्यान देते तो दोनोंं की जान बच सकती थी। दसवां संस्कार में चर्चा के दौरान भी लोग पुलिस, प्रशासनिक अफसरों के अलावा विभागीय अफसरों को भी घटना का दोषी होने का तर्क देते रहे। दसवां संस्कार में सपा नेता आरती महेंद्र ने भी पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सुमति के पिता से भी जानकारी ली। संवाद
सबूत देने के बाद भी कार्रवाई में ढिलाई पर रोष
दसवां संस्कार में सबूत देने के बाद भी कार्रवाई में ढिलाई पर भी कुछ लोग चर्चा करते रहे। इसमें लोगों का कहना था कि घटना के बाद हर्षित मिश्रा के पिता सुशील मिश्रा और सुधीर गुप्ता के परिजन ने भी बंद लिफाफा में कुछ सबूत पुलिस को दिए। इसमें घटना से पहले दोनों अफसरों की ओर से उच्च अफसरों को किए गए पत्राचार, विभागीय पत्राचार, पूर्व में सुधीर गुप्ता की ओर से कराई गई एफआईआर आदि अभिलेख देने के बाद भी पुलिस ढिलाई कर रही है।
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एचपीसीएल के सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा का सोमवार को नगर के देवीस्थान के समीप दसवां संस्कार हुआ। दसवां संस्कार में शामिल हुए अधिकांश लोग एचपीसीएल के दोनों अफसरों के हत्याकांड पर चर्चा करते रहे। चर्चा में सुधीर गुप्ता की ओर से चार फरवरी को मूसाझाग थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट भी रही।
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लोगों का कहना था कि मुख्य आरोपी ने पहली बार ही प्लांट में घुसकर घटना को अंजाम नहीं दिया। इससे पहले 13 जनवरी को भी मुख्य आरोपी एक ठेकेदार की टैक्सी को जबरन कब्जे में लेकर प्लांट में घुसा था। इतना ही नहीं कांफ्रेंस रूम में खाना खा रहे दोनों अफसरों को सबक सिखाने की धमकी दी थी।
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सुधीर गुप्ता ने चार फरवरी को इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जान को खतरा की आशंका पर हर्षित मिश्रा और सुधीर गुप्ता कई बार वहां के डीएम, एसपी से मिले। एचपीसीएल अफसरों को भी जानमाल की आशंका की जानकारी देने के साथ पत्राचार किया था। सुधीर गुप्ता ने तो बीआरएस लेने को कागजी कार्रवाई पूरी कर ली थी।
हर्षित भी दूसरी जगह स्थानांतरण की मांग कर रहे थे। अगर उनकी गुहार पर अफसर ध्यान देते तो दोनोंं की जान बच सकती थी। दसवां संस्कार में चर्चा के दौरान भी लोग पुलिस, प्रशासनिक अफसरों के अलावा विभागीय अफसरों को भी घटना का दोषी होने का तर्क देते रहे। दसवां संस्कार में सपा नेता आरती महेंद्र ने भी पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने सुमति के पिता से भी जानकारी ली। संवाद
सबूत देने के बाद भी कार्रवाई में ढिलाई पर रोष
दसवां संस्कार में सबूत देने के बाद भी कार्रवाई में ढिलाई पर भी कुछ लोग चर्चा करते रहे। इसमें लोगों का कहना था कि घटना के बाद हर्षित मिश्रा के पिता सुशील मिश्रा और सुधीर गुप्ता के परिजन ने भी बंद लिफाफा में कुछ सबूत पुलिस को दिए। इसमें घटना से पहले दोनों अफसरों की ओर से उच्च अफसरों को किए गए पत्राचार, विभागीय पत्राचार, पूर्व में सुधीर गुप्ता की ओर से कराई गई एफआईआर आदि अभिलेख देने के बाद भी पुलिस ढिलाई कर रही है।