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देवहा नदी जिनारे ग्राम समाज की जमीन पर गेहूं बोकर फंसे किसान, काटने पर रोक
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बीसलपुर/पीलीभीत। देवहा नदी किनारे एक दर्जन से ज्यादा गांवों में ग्राम समाज की सैकड़ों एकड़ जमीन पर बोई गई गेहूं की फसल के कटान पर प्रशासन ने रोक लगा दी है। ऐसा गांव में पार्टीबंदी के चलते एक दूसरे की शिकायत किए जाने के बाद तय किया गया। फसल बोने वाले किसानों ने इस पर विरोध जताते हुए कहा कि धारा 146 की कार्रवाई कर रिसीवर नियुक्त कर पूरा गेहूं उसके सुपुर्द कर देेना चाहिए।
देवहा नदी के पूरब के गांव हीरूपुर दियूबी, अर्जुनपुर, ढुकुसी, कर्रखेड़ा, नगरिया फत्तेपुर, रमपुरा नौगवां और पश्चिम के गांव पटनिया, चौसर हरबोपट्टी, भगवंतापुर करोड़, अभयपुर टेना नकटिया, राजूपुर कुडरी और भौंरूआ गांवों में बड़ी संख्या में किसानों ने अपने खेत से लगी ग्राम समाज की सैकड़ों बीघा जमीन पर गेहूं की बुआई कर दी। कुछ जानबूझकर तो कुछ जगह भूलवश ग्राम समाज की जमीन पर गेहूं बो दिया गया। अब उस गेहूं को काटने में पेरशानी आ रही है। कोरोना के चलते वैसे ही भीड़ भाड़ से बचकर गेहूं काटने के निर्देश हैं। जब किसान ग्राम समाज की जमीन पर गेहूं काटकर गहाई करके उसका ढेर जमा कर लेते हैं तो विरोधियों की शिकायत पर अफसर उसे भरवाकर तहसील में जमा कर लेते हैं।
पटनिया गांव के किसान महेंद्र प्रसाद और कीर्ति प्रसाद का 50 क्विंटल गेहूं प्रशासनिक अफसर और लेखपाल भरवाकर ले गए। उनका कहना था कि ग्राम समाज की जमीन पर गेहूं की बुआई क्यों की। दोनों किसानों ने बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा से गेहूं जबरदस्ती उठाने की शिकायत की। विधायक ने भी एसडीएम से फोन पर बात कर किसानों का गेहूं ले जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियम यह है कि फसल जिसने बोई है, वही काटेगा। अगर वह जमीन ग्राम समाज की है तो प्रशासन अगली फसल किसानों को ना बोने दे। कहीं विवाद ज्यादा है तो वहां प्रशासन 146 की कार्रवाई कर फसल के मालिकाना हक पर फैसला आने तक रिसीवर नियुक्त कर दे। फिलहाल, कोरोना के लॉकडाउन में अपनी मेहनत की फसल ले जाने से नदी किनारे गांवों के सैकड़ों किसान परेशान हैं।
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ग्राम समाज की जमीन पर फसल की बुआई करना नियम विरुद्ध है। हमको जिस ग्राम पंचायत की शिकायतें मिल रही हैं, वहां जांच कराकर कार्रवाई कर रहे हैं। गेहूं भरकर लाने की बात जानकारी में नहीं है। -आशुतोष कुमार, तहसीलदार बीसलपुर
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देवहा नदी के पूरब के गांव हीरूपुर दियूबी, अर्जुनपुर, ढुकुसी, कर्रखेड़ा, नगरिया फत्तेपुर, रमपुरा नौगवां और पश्चिम के गांव पटनिया, चौसर हरबोपट्टी, भगवंतापुर करोड़, अभयपुर टेना नकटिया, राजूपुर कुडरी और भौंरूआ गांवों में बड़ी संख्या में किसानों ने अपने खेत से लगी ग्राम समाज की सैकड़ों बीघा जमीन पर गेहूं की बुआई कर दी। कुछ जानबूझकर तो कुछ जगह भूलवश ग्राम समाज की जमीन पर गेहूं बो दिया गया। अब उस गेहूं को काटने में पेरशानी आ रही है। कोरोना के चलते वैसे ही भीड़ भाड़ से बचकर गेहूं काटने के निर्देश हैं। जब किसान ग्राम समाज की जमीन पर गेहूं काटकर गहाई करके उसका ढेर जमा कर लेते हैं तो विरोधियों की शिकायत पर अफसर उसे भरवाकर तहसील में जमा कर लेते हैं।
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पटनिया गांव के किसान महेंद्र प्रसाद और कीर्ति प्रसाद का 50 क्विंटल गेहूं प्रशासनिक अफसर और लेखपाल भरवाकर ले गए। उनका कहना था कि ग्राम समाज की जमीन पर गेहूं की बुआई क्यों की। दोनों किसानों ने बीसलपुर विधायक रामसरन वर्मा से गेहूं जबरदस्ती उठाने की शिकायत की। विधायक ने भी एसडीएम से फोन पर बात कर किसानों का गेहूं ले जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियम यह है कि फसल जिसने बोई है, वही काटेगा। अगर वह जमीन ग्राम समाज की है तो प्रशासन अगली फसल किसानों को ना बोने दे। कहीं विवाद ज्यादा है तो वहां प्रशासन 146 की कार्रवाई कर फसल के मालिकाना हक पर फैसला आने तक रिसीवर नियुक्त कर दे। फिलहाल, कोरोना के लॉकडाउन में अपनी मेहनत की फसल ले जाने से नदी किनारे गांवों के सैकड़ों किसान परेशान हैं।
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ग्राम समाज की जमीन पर फसल की बुआई करना नियम विरुद्ध है। हमको जिस ग्राम पंचायत की शिकायतें मिल रही हैं, वहां जांच कराकर कार्रवाई कर रहे हैं। गेहूं भरकर लाने की बात जानकारी में नहीं है। -आशुतोष कुमार, तहसीलदार बीसलपुर