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स्वकर निर्धारण व्यवस्था एक कदम भी नहीं बढ़ी आगे

Wed, 13 Jul 2016 11:26 PM IST
पीलीभीत, ब्यूरो
पीलीभीत, ब्यूरो Updated Wed, 13 Jul 2016 11:26 PM IST
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नगर पालिका की टैक्स व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए शहर में स्वकर निर्धारण व्यवस्था लागू की जा चुकी है, लेकिन यह व्यवस्था अभी एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी। ऐसे में ढाई लाख की आबादी वाले इस शहर में इस बार टैक्स की भरपाई कैसे होगी, यह आने वाले समय में पालिका के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।
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शासन ने नगर पालिका की टैक्स प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने को सितंबर 2011 में स्वकर निर्धारण प्रक्रिया का शासनादेश जारी किया था। इस प्रक्रिया के तहत शहर के 25 हजार उपभोक्ता द्वारा स्वयं ही गृह व जलकर का निर्धारण किया जाना था, लेकिन दरें आदि तय न होने के चलते मामला टलता रहा। इधर शासन द्वारा सख्ती के बाद करीब तीन माह पूर्व बायलाज तैयार कर उसे भेजा गया। शासन द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद इसे एक अप्रैल से लागू कर दिया गया था।
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इधर पालिका प्रशासन ने स्वकर निर्धारण व्यवस्था लागू होने के बाद एक प्रपत्र जारी किया। यह प्रपत्र सभी उपभोक्ताओं को पालिका के टैक्स विभाग से लेना था और उपभोक्ताओं को यह प्रपत्र जारी होने के 15 दिन के भीतर इसमें संपूर्ण विवरण भरकर जमा करना था। बताते हैं कि इस नई कर व्यवस्था का प्रचार-प्रसार न होने के चलते महज 60-70 उपभोक्ता प्रपत्र लेने तो पहुंचे, लेकिन उसे भरकर जमा एक भी उपभोक्ता ने नहीं किया। हालांकि, पालिका का टैक्स विभाग अब इसको लेकर सख्ती बरतने के मूड में दिख रहा है। 
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प्रपत्र भरना भी आसान नहीं
यदि उपभोक्ता पालिका से प्रपत्र ले भी लेते हैं तो उनके लिए यह प्रपत्र भरना आसान नहीं होगा। मसलन प्रपत्र में सभी कमरों के के अलावा बरामदे, बालकनी, कॉरीडार आदि का आंतरिक आयाम (वर्ग फीट में) भरना होगा। जो एक आम उपभोक्ता के लिए संभव नहीं है। वहीं गलत सूचना अंकित करने पर दो हजार जुर्माने का प्रावधान भी है। ऐसे में यह व्यवस्था पालिका के साथ साथ उपभोक्ताओं के लिए भी सिर दर्द बन सकती है।



स्वकर निर्धारण व्यवस्था एक अप्रैल से लागू कर दी गई है। हालांकि, इसमें अभी तक अच्छे परिणाम देखने को नहीं मिले हैं। प्रक्रिया में परिवर्तन कर अब यह प्रपत्र टैक्स विभाग के कर्मचारियों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाएंगे।
वीपी सिंह, अधिशासी अधिकारी
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