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गर्मी बढ़ने के साथ ही बीमारियों में इजाफा
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Sat, 22 Apr 2017 10:51 PM IST
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अस्पपताला में लगी भ्ाीड़
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गर्मी बढ़ने के साथ ही अस्पतालों में जलजनित बीमारियों के रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा होने लगा है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की किल्लत मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी है। अगर जिला अस्पताल के आंकड़ों को ही लें तो यहां ओपीडी में रोजाना एक हजार के आसपास मरीज पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इनमें सबसे ज्यादा रोगी जलजनित बीमारियों डायरिया, पीलिया, उल्टी-दस्त के होते हैं।
जिला अस्पताल में घट रही डॉक्टरों की संख्या
जिला अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे करीब एक हजार रोगियों के इलाज के लिए महज 16 डॉक्टर हैं। हालांकि अस्पताल में सीएमएस समेत 27 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें एक डॉक्टर सतेंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। दो डॉक्टर वीआरएस लेने की औपचारिकताएं पूरी करने में लगे हैं। ऐेसे में अब यहां सीएमएस सहित 16 डॉक्टर ही शेष हैं। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को किस स्तर का इलाज मिल रहा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
यह बीमारियां दे रहीं हैं दस्तक
1. हीट स्ट्रोक/डायरिया
लक्षण : तेज प्यास लगना, चक्कर आना, पेट खराब हो जाना, बेहोशी आना, शरीर का तापमान एकाएक बढ़ना।
बचाव : भरपूर पानी पीयें। ओआरएस का इस्तेमाल करें। तला-भुना, गरिष्ठ और बासी भोजन करने से परहेज करें। फलों का सेवन अधिक करें।
3. हाइपर एसिडिटी
लक्षण : दस्त आना, जी मिचलाना, उल्टियां आना, पेट में जलन होना, खट्टी डकारें आना।
बचाव : चाय, कॉफी और अल्कोहल के सेवन से बचें। नींबू पानी, ठंडा दूध, दही का सेवन करें।
4. टाइफाइड
लक्षण : तेज बुखार आना। शाम होते-होते बुखार बढ़ना। अत्यधिक कमजोरी महसूस होना और भूख न लगना।
बचाव : बासी और गरिष्ठ भोजन से परहेज करें। पानी को उबालकर पीयें।
5. मलेरिया
लक्षण : ठंड के साथ बुखार आना। कुछ भी खाने की इच्छा न करना। हाथ-पैरों में दर्द होना।
बचाव : मच्छरदानी, क्वाइल, स्प्रे का प्रयोग करें। घर के अंदर और बाहर पानी न भरने दें। कूलर का पानी बदलते रहें।
शुद्धता ही बीमारियों से बचाव
मौसम के परिवर्तन के दौरान ही जलजनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ता है। अस्पताल में भी इन रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्वच्छ भोजन और शुद्ध पानी के प्रयोग से बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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- डॉ. पीके मिश्रा, फिजीशियन, जिला अस्पताल
मरीजों के साप्ताहिक आंकड़े
दिन मरीजों की संख्या
17 अप्रैल 1043
18 अप्रैल 1012
19 अप्रैल 996
20 अप्रैल 679
21 अप्रैल 1016
22 अप्रैल 1110
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जिला अस्पताल में घट रही डॉक्टरों की संख्या
जिला अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे करीब एक हजार रोगियों के इलाज के लिए महज 16 डॉक्टर हैं। हालांकि अस्पताल में सीएमएस समेत 27 डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें एक डॉक्टर सतेंद्र सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। दो डॉक्टर वीआरएस लेने की औपचारिकताएं पूरी करने में लगे हैं। ऐेसे में अब यहां सीएमएस सहित 16 डॉक्टर ही शेष हैं। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को किस स्तर का इलाज मिल रहा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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यह बीमारियां दे रहीं हैं दस्तक
1. हीट स्ट्रोक/डायरिया
लक्षण : तेज प्यास लगना, चक्कर आना, पेट खराब हो जाना, बेहोशी आना, शरीर का तापमान एकाएक बढ़ना।
बचाव : भरपूर पानी पीयें। ओआरएस का इस्तेमाल करें। तला-भुना, गरिष्ठ और बासी भोजन करने से परहेज करें। फलों का सेवन अधिक करें।
3. हाइपर एसिडिटी
लक्षण : दस्त आना, जी मिचलाना, उल्टियां आना, पेट में जलन होना, खट्टी डकारें आना।
बचाव : चाय, कॉफी और अल्कोहल के सेवन से बचें। नींबू पानी, ठंडा दूध, दही का सेवन करें।
4. टाइफाइड
लक्षण : तेज बुखार आना। शाम होते-होते बुखार बढ़ना। अत्यधिक कमजोरी महसूस होना और भूख न लगना।
बचाव : बासी और गरिष्ठ भोजन से परहेज करें। पानी को उबालकर पीयें।
5. मलेरिया
लक्षण : ठंड के साथ बुखार आना। कुछ भी खाने की इच्छा न करना। हाथ-पैरों में दर्द होना।
बचाव : मच्छरदानी, क्वाइल, स्प्रे का प्रयोग करें। घर के अंदर और बाहर पानी न भरने दें। कूलर का पानी बदलते रहें।
शुद्धता ही बीमारियों से बचाव
मौसम के परिवर्तन के दौरान ही जलजनित रोगों के फैलने का खतरा बढ़ता है। अस्पताल में भी इन रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्वच्छ भोजन और शुद्ध पानी के प्रयोग से बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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- डॉ. पीके मिश्रा, फिजीशियन, जिला अस्पताल
मरीजों के साप्ताहिक आंकड़े
दिन मरीजों की संख्या
17 अप्रैल 1043
18 अप्रैल 1012
19 अप्रैल 996
20 अप्रैल 679
21 अप्रैल 1016
22 अप्रैल 1110