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अधिकारों के प्रति जागरूक होकर बन सकती हैं अपराजिता
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पीलीभीत। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत महिला सशक्तीकरण के तहत सोमवार को पुष्प इंस्टीट्यूट में गोष्ठी हुई। इसमें बतौर मुख्य अतिथि एआरटीओ अमिताभ राय ने कहा कि अपराजिता का मतलब जिसे कोई पराजित न कर सके। इसके लिए अपने अधिकारों की जानकारी और जागरूक होना जरूरी है। चाहे क्षेत्र कोई भी हो। जब लड़कियां और महिलाएं खुद की सुरक्षा के प्रति सजग रहेंगी, तभी मजबूत और सुरक्षित होेंगी। गोष्ठी के दौरान ट्रैफिक नियमों और नारी गरिमा की शपथ दिलाई गई।
एआरटीओ अमिताभ राय ने कहा कि महिलाएं अपनी शक्ति को पहचानें। पहले महिलाएं कम पढ़ी लिखी होने के बाद भी मानसिक और बौद्धिक विकास में कम नहीं थीं। वे अपने परिवार और आने वाली पीढ़ी को एक अच्छी दिशा की ओर ले जाती थीं। अब बेटियां शिक्षित हो रही हैं। हर मुकाम हासिल कर रही हैं। ऐसे में खुद को सशक्त बनाने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। वे खुद जानकारी रखने के साथ दूसरों को भी जागरूक करने की जिम्मेदारी निभाएं। सरकार भी महिला सशक्तीकरण को लेकर कई योजनाओं को चला रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान बस, टैक्सी या फिर ऑटो में ही क्यों न सफर कर रहे हों। सबसे पहले चालक का नाम, वाहन का नंबर जरूरत नोट कर लें, और परिवार वालों को भी बताएं। बीच-बीच में परिजन को अपनी लोकेशन देते रहें। इस तरह सावधानी बरतने पर सफर भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट जरूर लगाएं।
विशिष्ट अतिथि व कॉलेज के प्रबंध निदेशक एसपीएस संधू ने कहा कि घर या स्कूल से निकलते वक्त ट्रैफिक नियमों का पालन करें। बच्चे अजनबी लोगों से उचित दूरी बनाकर रहें। बेवजह किसी से बातचीत नहीं करनी चाहिए। छात्राएं खुद सुरक्षा के प्रति गंभीर रहेंगी, तभी अपराजिता बनकर मुसीबत को हरा सकेंगी। गोष्ठी में प्राचार्य मोहम्मद सलीम और उप प्राचार्य गीतिका शुक्ला ने भी संबोधित किया। समापन से पूर्व सभी को नारी गरिमा और यातायात नियमों का पालन करने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का संचालन कुमारी अरीना ने किया। कार्यक्रम में करीब 120 छात्राएं शामिल रहीं।
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लोगों की सोच बदलना जरूरी
बेटा-बेटी में भेदभाव न समझा जाए। लोगों की सोच में अभी भी परिवर्तन की जरूरत है। सरकार ने महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कड़े कानून बनाए हैं। कुछ गलत हो रहा है तो उसे बर्दाश्त न करें। मुकाबला करें और महिला हेल्प लाइन के जरिये पुलिस की मदद लें। - शिवानी, छात्रा
महिलाएं जाने खुद के अधिकार
मजबूत समाज और देश के लिए महिलाओं का सशक्त व अधिकारों के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। महिलाएं शिक्षा के साथ खुद को आत्मनिर्भर बनाने से सशक्त हो सकती हैं। मौजूदा समय में पहले से स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन अभी कई क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है। - मेधावी, छात्रा
शिक्षा के बिना सशक्त होना असंभव
मजबूत समाज के लिए महिलाओं का सशक्त होना बेहद जरूरी है। यह सब शिक्षा कि बिना संभव नहीं है। इसलिए अपराजिता बनने के लिए खुद को शिक्षित करें। महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। घर-परिवार के अलावा सरकार का भी सहयोग मिल रहा है।
- अंजू गंगवार, छात्रा
जागरूक हों तभी बन सकती हैं अपराजिता
पुरुष प्रधान समाज और रूढ़िवादी विचारों के आगे महिलाएं बेबस हैं। इसका सबसे बड़ा कारण महिलाओं का अशिक्षित होना है। इसलिए महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है। जब तक महिलाएं आत्म सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगी तब तक महिला सशक्तीकरण का सपना पूरा नहीं हो सकता। - संजना राठौर, छात्रा
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एआरटीओ अमिताभ राय ने कहा कि महिलाएं अपनी शक्ति को पहचानें। पहले महिलाएं कम पढ़ी लिखी होने के बाद भी मानसिक और बौद्धिक विकास में कम नहीं थीं। वे अपने परिवार और आने वाली पीढ़ी को एक अच्छी दिशा की ओर ले जाती थीं। अब बेटियां शिक्षित हो रही हैं। हर मुकाम हासिल कर रही हैं। ऐसे में खुद को सशक्त बनाने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। वे खुद जानकारी रखने के साथ दूसरों को भी जागरूक करने की जिम्मेदारी निभाएं। सरकार भी महिला सशक्तीकरण को लेकर कई योजनाओं को चला रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान बस, टैक्सी या फिर ऑटो में ही क्यों न सफर कर रहे हों। सबसे पहले चालक का नाम, वाहन का नंबर जरूरत नोट कर लें, और परिवार वालों को भी बताएं। बीच-बीच में परिजन को अपनी लोकेशन देते रहें। इस तरह सावधानी बरतने पर सफर भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि दो पहिया वाहन चलाते समय हेलमेट जरूर लगाएं।
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विशिष्ट अतिथि व कॉलेज के प्रबंध निदेशक एसपीएस संधू ने कहा कि घर या स्कूल से निकलते वक्त ट्रैफिक नियमों का पालन करें। बच्चे अजनबी लोगों से उचित दूरी बनाकर रहें। बेवजह किसी से बातचीत नहीं करनी चाहिए। छात्राएं खुद सुरक्षा के प्रति गंभीर रहेंगी, तभी अपराजिता बनकर मुसीबत को हरा सकेंगी। गोष्ठी में प्राचार्य मोहम्मद सलीम और उप प्राचार्य गीतिका शुक्ला ने भी संबोधित किया। समापन से पूर्व सभी को नारी गरिमा और यातायात नियमों का पालन करने की शपथ दिलाई गई। कार्यक्रम का संचालन कुमारी अरीना ने किया। कार्यक्रम में करीब 120 छात्राएं शामिल रहीं।
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लोगों की सोच बदलना जरूरी
बेटा-बेटी में भेदभाव न समझा जाए। लोगों की सोच में अभी भी परिवर्तन की जरूरत है। सरकार ने महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कड़े कानून बनाए हैं। कुछ गलत हो रहा है तो उसे बर्दाश्त न करें। मुकाबला करें और महिला हेल्प लाइन के जरिये पुलिस की मदद लें। - शिवानी, छात्रा
महिलाएं जाने खुद के अधिकार
मजबूत समाज और देश के लिए महिलाओं का सशक्त व अधिकारों के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। महिलाएं शिक्षा के साथ खुद को आत्मनिर्भर बनाने से सशक्त हो सकती हैं। मौजूदा समय में पहले से स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन अभी कई क्षेत्रों में काम करने की जरूरत है। - मेधावी, छात्रा
शिक्षा के बिना सशक्त होना असंभव
मजबूत समाज के लिए महिलाओं का सशक्त होना बेहद जरूरी है। यह सब शिक्षा कि बिना संभव नहीं है। इसलिए अपराजिता बनने के लिए खुद को शिक्षित करें। महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। घर-परिवार के अलावा सरकार का भी सहयोग मिल रहा है।
- अंजू गंगवार, छात्रा
जागरूक हों तभी बन सकती हैं अपराजिता
पुरुष प्रधान समाज और रूढ़िवादी विचारों के आगे महिलाएं बेबस हैं। इसका सबसे बड़ा कारण महिलाओं का अशिक्षित होना है। इसलिए महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है। जब तक महिलाएं आत्म सम्मान और अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगी तब तक महिला सशक्तीकरण का सपना पूरा नहीं हो सकता। - संजना राठौर, छात्रा