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सीमा पर देश की रक्षा और घर में परिवार संभालने का दायित्व निभा रहीं अपराजिता
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पीलीभीत। समाज में महिलाओं की भागीदारी विषय पर हुई गोष्ठी में महिलाओं ने खुलकर विचार व्यक्त किए। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत गोदावरी स्टेट कॉलोनी में हुई गोष्ठी में मुख्य वक्ता सरिता तोमर ने कहा कि महिलाएं किसी से कम नहीं है। हर क्षेत्र में कामयाबी हासिल कर चुकी हैं। घर में परिवार संभालने का दायित्व हो या फिर सीमा पर तैनात रहकर देश की रक्षा की जिम्मेदारी, दोनों में ही महिलाएं पीछे नहीं है। हथियार उठाकर दुश्मनों का सामना करना भी महिलाएं सीख चुकी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक काल में महिलाओं की दशा में काफी सुधार हुआ है। कुछ स्थानों पर अभी भी महिलाओं और पुरुषों में लोग अंतर समझते हैं। बेटे के जन्म पर खुशियां और बेटी के जन्म पर अफसोस जताया जाता है। मगर यह सोच अब बदल चुकी है। वैदिक काल से ही नारियों को पूजनीय समझा जाता रहा है। आधी आबादी हर क्षेत्र में अपने कामयाबी का परचम लहरा चुकी है। छात्राओं को परिस्थितियों से डरकर नहीं बल्कि डटकर सामना करना चाहिए।
कॉलोनी की ही संगीता नेगी ने कहा कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने से कामयाबी खुद मिल जाती है। महिलाओं ने अमर उजाला अपराजिता अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को खुले मंच पर विचार रखने का मौका मिला। इस अभियान से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा दीपशिखा गुप्ता, लक्ष्मी अग्रवाल, नीलम सक्सेना, नीता तोमर, प्रभा जोशी, सीमा पांडेय, संतोष सिंह, कुंती लोधी, कल्पना सिंह, लीना बेलाल, रेनू सोनकर, संगीता नेगी, कश्मीरी देवी, विनिता कर्नाटक, शिल्पी सक्सेना, पिंकी सक्सेना ने भी विचार रखे।
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कोरोना काल में भी महिलाओं ने निभाई अहम भूमिका
महिलाओं की समाज में अहम भूमिका है। परिवार के बीच में कई जिम्मेदारी निभाती है। कोरोना काल में भी महिलाओं ने डटकर मुकाबला किया। खुद को और परिवार दोनों को संभाले रखा।- लीना बेलाल
पढ़ लिखकर समाज में नाम रोशन करतीं है बेटियां
शिक्षा से बेटियों के संस्कारों की नींव मजबूत होती है। पढ़ी लिखी बेटियां समाज में अपना और परिवार दोनों का नाम रोशन करतीं है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।- दीपशिखा गुप्ता
समाज की सोच बदलनी जरूरी
महिलाओं पर बचपन से ही पाबंदियां लगाई जाती हैं, जबकि पुरुषों को खुली छूट दे दी जाती है। समाज की इस दोहरी मानसिकता में बदलाव आए तो नारी को अपराजिता बनने से कोई नहीं रोक सकता।- नीलम सक्सेना
देश की सुरक्षा के लिए बॉर्डर पर खड़ी हैं महिलाएं
नारी शिक्षा पर जोर देना चाहिए। हमारी बेटिया हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। मौजूदा समय में वित्तमंत्री भी महिला है। देश की सुरक्षा के लिए महिलाएं बॉर्डर पर खड़ी है। शिक्षित महिला दो घरों को शिक्षित करती है।- डौली यादव
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उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक काल में महिलाओं की दशा में काफी सुधार हुआ है। कुछ स्थानों पर अभी भी महिलाओं और पुरुषों में लोग अंतर समझते हैं। बेटे के जन्म पर खुशियां और बेटी के जन्म पर अफसोस जताया जाता है। मगर यह सोच अब बदल चुकी है। वैदिक काल से ही नारियों को पूजनीय समझा जाता रहा है। आधी आबादी हर क्षेत्र में अपने कामयाबी का परचम लहरा चुकी है। छात्राओं को परिस्थितियों से डरकर नहीं बल्कि डटकर सामना करना चाहिए।
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कॉलोनी की ही संगीता नेगी ने कहा कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने से कामयाबी खुद मिल जाती है। महिलाओं ने अमर उजाला अपराजिता अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को खुले मंच पर विचार रखने का मौका मिला। इस अभियान से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा दीपशिखा गुप्ता, लक्ष्मी अग्रवाल, नीलम सक्सेना, नीता तोमर, प्रभा जोशी, सीमा पांडेय, संतोष सिंह, कुंती लोधी, कल्पना सिंह, लीना बेलाल, रेनू सोनकर, संगीता नेगी, कश्मीरी देवी, विनिता कर्नाटक, शिल्पी सक्सेना, पिंकी सक्सेना ने भी विचार रखे।
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कोरोना काल में भी महिलाओं ने निभाई अहम भूमिका
महिलाओं की समाज में अहम भूमिका है। परिवार के बीच में कई जिम्मेदारी निभाती है। कोरोना काल में भी महिलाओं ने डटकर मुकाबला किया। खुद को और परिवार दोनों को संभाले रखा।- लीना बेलाल
पढ़ लिखकर समाज में नाम रोशन करतीं है बेटियां
शिक्षा से बेटियों के संस्कारों की नींव मजबूत होती है। पढ़ी लिखी बेटियां समाज में अपना और परिवार दोनों का नाम रोशन करतीं है। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।- दीपशिखा गुप्ता
समाज की सोच बदलनी जरूरी
महिलाओं पर बचपन से ही पाबंदियां लगाई जाती हैं, जबकि पुरुषों को खुली छूट दे दी जाती है। समाज की इस दोहरी मानसिकता में बदलाव आए तो नारी को अपराजिता बनने से कोई नहीं रोक सकता।- नीलम सक्सेना
देश की सुरक्षा के लिए बॉर्डर पर खड़ी हैं महिलाएं
नारी शिक्षा पर जोर देना चाहिए। हमारी बेटिया हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। मौजूदा समय में वित्तमंत्री भी महिला है। देश की सुरक्षा के लिए महिलाएं बॉर्डर पर खड़ी है। शिक्षित महिला दो घरों को शिक्षित करती है।- डौली यादव