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एएनएम सस्पेंड, डीआईओ को सौंपी जांच
पीलीभीत, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Sep 2016 11:26 PM IST
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गांव कल्यानपुर खास में टीकाकरण के बाद बच्चों की हालत बिगड़ने के मामले में सीएमओ ने एएनएम को दोषी पाते हुए उसे सस्पेंड कर दिया है। मामले की जांच जिला प्रतिरक्षण अधिकारी (डीआईओ) को सौंपी गई है।
ललौरीखेड़ा ब्लॉक के गांव कल्यानपुर खास स्थित प्राइमरी स्कूल में बृहस्पतिवार को 66 बच्चों को डीपीटी के टीके लगाए गए थे। टीकाकरण एएनएम मधुबाला ने किया था। टीकाकरण के कुछ देर बाद ही बच्चों को उल्टी और दर्द की शिकायत होने लगी। कुछ देर में ही तमाम बच्चों की हालत बिगड़ गई। तुरंत ही बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीएमओ और सीएमएस ने इसे वैक्सीन का नॉर्मल साइड इफेक्ट बताते हुए बच्चों को मामूली परेशानी होने की बात कही थी। एनएचएम के महाप्रबंधक अनिल मिश्र ने भी बच्चों का हाल जाना। उन्होंने सीएमएस को बच्चों को रात भर अस्पताल में रखकर निगरानी करने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार सुबह बच्चों को अस्पताल से उनके घर भेज दिया गया। सीएमओ डॉ. ओपी सिंह ने प्रथम दृष्टया एएनएम मधुबाला को दोषी पाते उन्हें सस्पेंड कर दिया। उन्होंने मामले की जांच जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सीएम चतुर्वेदी को सौंप दी है। सीएमओ ने बताया कि टीकाकरण से पहले उससे होने वाली परेशानियों के बारे में अभिभावकों को बताना चाहिए था लेकिन एएनएम ने ऐसा नहीं किया।
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ललौरीखेड़ा ब्लॉक के गांव कल्यानपुर खास स्थित प्राइमरी स्कूल में बृहस्पतिवार को 66 बच्चों को डीपीटी के टीके लगाए गए थे। टीकाकरण एएनएम मधुबाला ने किया था। टीकाकरण के कुछ देर बाद ही बच्चों को उल्टी और दर्द की शिकायत होने लगी। कुछ देर में ही तमाम बच्चों की हालत बिगड़ गई। तुरंत ही बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीएमओ और सीएमएस ने इसे वैक्सीन का नॉर्मल साइड इफेक्ट बताते हुए बच्चों को मामूली परेशानी होने की बात कही थी। एनएचएम के महाप्रबंधक अनिल मिश्र ने भी बच्चों का हाल जाना। उन्होंने सीएमएस को बच्चों को रात भर अस्पताल में रखकर निगरानी करने के निर्देश दिए थे। शुक्रवार सुबह बच्चों को अस्पताल से उनके घर भेज दिया गया। सीएमओ डॉ. ओपी सिंह ने प्रथम दृष्टया एएनएम मधुबाला को दोषी पाते उन्हें सस्पेंड कर दिया। उन्होंने मामले की जांच जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. सीएम चतुर्वेदी को सौंप दी है। सीएमओ ने बताया कि टीकाकरण से पहले उससे होने वाली परेशानियों के बारे में अभिभावकों को बताना चाहिए था लेकिन एएनएम ने ऐसा नहीं किया।
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