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शराब के नशे में उलझना डॉक्टर साहब को पड़ा महंगा, सिटी मजिस्ट्रेट ने अस्पताल से उठवाया
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पीलीभीत। मरीज की शिकायत पर पहुंचे एक जनप्रतिनिधि से ही प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर साहब उलझ गए। डीएम को पता चला तो उनके निर्देश पर पुलिस के साथ पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट अस्पताल से उठा ले गए। इसके बाद मेडिकल परीक्षण कराने की बात चलने लगी तो शराब पीने के कारण कार्रवाई के डर से डॉक्टर साहब ने माफी मांग ली। फिर शाम तक यह मामला रफादफा हो गया।
कस्बा जहानाबाद का रहने वाला एक ग्रामीण शनिवार दोपहर डिग्री कॉलेज रोड पर एक प्राइवेट अस्पताल में दवा लेने आया था। डॉक्टर ने सही तरीके से बात नहीं की। मरीज ने इसकी शिकायत एक जनप्रतिनिधि से कर दी। शिकायत सुनते ही जनप्रतिनिधि ने पहले डॉक्टर से फोन पर बात की। मगर, डॉक्टर साहब ने उनकी नहीं सुनी तो वह सीधे अस्पताल पहुंच गए। डॉक्टर अस्पताल में उनसे उलझने लगे तो जनप्रतिनिधि ने डीएम को फोन पर बताया।
डीएम के आदेश पर कुछ ही देर में सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार पुलिस बल के साथ प्राइवेट अस्पताल पहुंच गए। वह डॉक्टर को पकड़कर मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाने लगे। इतने में अन्य डॉक्टर भी आ गए। दोनों पक्षों के बीच बातचीत होने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डॉक्टर साहब ने मामला गरमाता देखकर जनप्रतिनिधि और अफसरों से माफी मांग ली। उसके बाद यह मामला रफादफा कर दिया गया। चूंकि मामला डॉक्टर और जनप्रतिनिधि से जुड़ा था, इसलिए हर कोई इससे बचता दिखा। प्राइवेट डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर कुछ देर में पूरे शहर में फैल गई। हर जगह यह चर्चा रही कि नशेड़ी डॉक्टर साहब आखिरकार थे कौन। वैसे, यह डॉक्टर मरीजों, तीमारदारों या सम्मानित व्यक्तियों से अपने खराब व्यवहार को लेकर आए दिन चर्चा में रहते हैं।
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कस्बा जहानाबाद का रहने वाला एक ग्रामीण शनिवार दोपहर डिग्री कॉलेज रोड पर एक प्राइवेट अस्पताल में दवा लेने आया था। डॉक्टर ने सही तरीके से बात नहीं की। मरीज ने इसकी शिकायत एक जनप्रतिनिधि से कर दी। शिकायत सुनते ही जनप्रतिनिधि ने पहले डॉक्टर से फोन पर बात की। मगर, डॉक्टर साहब ने उनकी नहीं सुनी तो वह सीधे अस्पताल पहुंच गए। डॉक्टर अस्पताल में उनसे उलझने लगे तो जनप्रतिनिधि ने डीएम को फोन पर बताया।
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डीएम के आदेश पर कुछ ही देर में सिटी मजिस्ट्रेट अरुण कुमार पुलिस बल के साथ प्राइवेट अस्पताल पहुंच गए। वह डॉक्टर को पकड़कर मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाने लगे। इतने में अन्य डॉक्टर भी आ गए। दोनों पक्षों के बीच बातचीत होने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार डॉक्टर साहब ने मामला गरमाता देखकर जनप्रतिनिधि और अफसरों से माफी मांग ली। उसके बाद यह मामला रफादफा कर दिया गया। चूंकि मामला डॉक्टर और जनप्रतिनिधि से जुड़ा था, इसलिए हर कोई इससे बचता दिखा। प्राइवेट डॉक्टर के पकड़े जाने की खबर कुछ देर में पूरे शहर में फैल गई। हर जगह यह चर्चा रही कि नशेड़ी डॉक्टर साहब आखिरकार थे कौन। वैसे, यह डॉक्टर मरीजों, तीमारदारों या सम्मानित व्यक्तियों से अपने खराब व्यवहार को लेकर आए दिन चर्चा में रहते हैं।
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