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बेहोश कर पकड़ा जाएगा बाघ, शासन ने ट्रंक्युलाइज करने की दी अनुमति

Sat, 23 Jan 2021 01:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jan 2021 01:16 AM IST
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पीलीभीत। रिहायशी इलाके में पिछले दो माह से दहशत का पर्याय बना बाघ जल्द ही बेहोश कर पकड़ा जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति दे दी है। इसके लिए टीम का भी गठन किया गया है। टीम में उत्तराखंड के जिम कार्बेट पार्क, दुधवा और पीटीआर के चिकित्सक शामिल रहेेंगे। फिलहाल बाघ को पकड़ने के बाद कहां ले जाया जाएगा, इसका निर्णय बाघ के परीक्षण के बाद लिया जाएगा। फिलहाल बाघ को ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से भटककर एक बाघ पिछले साल नवंबर के अंतिम सप्ताह में माधोटांडा क्षेत्र में आ पहुंचा था। 29 नवंबर को दो छुट्टा मवेशियों को निवाला बनाने के बाद बाघ हरदोई ब्रांच नहर के चित्तरपुर पुल के आसपास डेरा जमाया। इसके बाद बाघ ने शाहगढ़ क्षेत्र की खन्नौत नदी के नरकुल वाले क्षेत्र में नया ठिकाना बना लिया। बाघ की बढ़ती चहलकदमी को देखकर 27 दिसंबर को खन्नौत नदी के समीप बाघ को पकड़ने के लिए पिंजड़ा लगाया, मगर बाघ हत्थे नहीं चढ़ा। इस पर 30 दिसंबर को उसी क्षेत्र के आसपास दूसरा पिजड़ा भी लगाया गया। कई दिन तक चहलकदमी करने के बाद बाघ ने छह जनवरी को गजरौला क्षेत्र के सिसैया गांव में छुट्टा पशु और रात में ही सिसैया गांव में एक ग्रामीण की पशुशाला में घुसकर एक बकरी को मार डाला। नौ जनवरी की रात बाघ ने पूरनपुर क्षेत्र में दस्तक दी और नवदिया सुल्तानपुर में एक फार्महाउस में जा घुसा। यहां से बाघ ने पूरनपुर क्षेत्र के ही मनहरियाखुर्द इलाके में पहुंचकर डेरा जमा लिया। यहां बाघ करीब सप्ताह भर से अधिक समय तक डेरा डाले रहा। इसी क्षेत्र में वन अफसरों और निगरानी टीम को किसानों का कई बार आक्रोश झेलना पड़ा। उस दौरान नौबत तो यहां तक आ गई थी कि कुछ लोग तलवारें लेकर बाघ की ओर दौड़ पड़े, मगर मौके पर मौजूद एक रेंजर से समझाबुझाकर वापस भेज दिया। मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए पीटीआर के फील्ड डायरेक्टर जावेद अख्तर ने बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की अनुमति मांगी, मगर इस पर उस दौरान कोई निर्णय नहीं लिया गया। इस पर किसानों के बढ़ते आक्रोश को देख अफसरों ने एक-एक मनहरियाखुर्द इलाके में दो पिजड़े लगाए, मगर पिजड़े लगते ही बाघ ने एक बार फिर अपना ठिकाना बदल दिया। पूरनपुर के गजरौला जप्ती, खांडेपुर, पचपेड़ा प्रहलादपुर में चहलकदमी के बाद बाघ अब फिर से अपने पुराने ठिकाने यानी हरदोई ब्रांच की ओर बढ़ रहा है। इस दौरान बाघ ने करीब एक पालतू पशु समेत पांच पशुओं को निवाला बनाया और किसी भी इंसान पर हमलावर नहीं हुआ। बाघ भले ही हत्थे न चढ़ा हो, लेकिन सामाजिक वानिकी पूरनपुर के रेंजर अयूब हसन और बीसलपुर रेंजर वजीर हसन लगातार बाघ की मॉनिटरिंग में लगे हुए हैं।
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इधर बृहस्पतिवार देर शाम प्रधान मुख्य वन संरक्षक पीके शर्मा ने रिहायशी इलाके में घूम रहे बाघ को ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ने की अनुमति दे दी है। इसकी पुष्टि भी वन अफसरों ने कर दी है। इसको लेकर तीन सदस्यीय ट्रैंक्युलाइज टीम भी गठित कर दी गई। टीम में उत्तराखंड जिम कार्बेट पार्क के डॉ. दुष्यंत सिंह, दुधवा पार्क के डॉ. दया और पीटीआर के डॉ. दक्ष गंगवार को टीम में शामिल किया गया। फील्ड डायरेक्टर जावेद अख्तर की देखरेख में बाघ को पकड़ने का अभियान संभवत: शनिवार या रविवार से शुरू हो सकता है। बाघ को पकड़ने के बाद कहां ले जाया जाएगा, इसका अभी निर्णय नहीं लिया जा सका सका है।
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जंगल से भटककर आबादी क्षेत्र में घूम रहे बाघ को पकड़ने के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव ने अनुमति दे दी है। तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलते ही अभियान शुरू कर दिया जाएगा।
- संजीव कुमार, डीएफओ, सामाजिक वानिकी प्रभाग
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