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टाइगर रिजर्व को ढाई साल बाद भी नहीं मिला एफडी
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Sat, 18 Feb 2017 10:05 PM IST
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जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले ढाई साल का समय बीत गया है लेकिन अभी तक फील्ड डायरेक्टर तक उपलब्ध नहीं हुआ। स्टाफ की कमी के चलते जंगल की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। जिले के लगभग 73 हजार हेक्टेअर में फैले जंगल को नौ जून 2014 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। उस समय यहां डीएफओ के रूप में आईएफएस अधिकारी तैनात थे लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद पीएफएस अधिकारी को डीएफओ का चार्ज दिया गया है जबकि नियमत: यहां एफडी (फील्ड डायरेक्ट) तैनात होना चाहिए। टाइगर रिजर्व बनने के ढाई साल बाद भी शासन ने यहां एफडी को तैनात नहीं किया है। इसके अलावा अन्य स्टाफ की भी कमी हैं। एसडीओ, डिप्टी रेंजर, वनदरोगा और वाचरों की कमी के चलते जंगल की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में बाघ की घटनाएं बढ़ने पर उसकी मॉनीटरिंग के चलते दिक्कत और बढ़ जाती है। चुनाव के समय भी जनप्रतिनिधियों ने टाइगर रिजर्व घोषित कराने को अपनी उपलब्धियों में गिनाया लेकिन आधे अधूरे संसाधन के चलते यहां कैसे काम चलाया जा रहा है इसकी चिंता उन्हें भी हैं। यही कारण है कि जंगल में पेड़ व घास कटने, लकड़ी चोरी होने के साथ ही वन्यजीवों के बाहर आकर हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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