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Pilibhit News: ईई और एई पर कार्रवाई के बाद चार अभियंता और रडार पर
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पीलीभीत। पीलीभीत-माधोटांडा मार्ग का ओवर एस्टीमेट बनाने के मामले में अधिशासी अभियंता (ईई) और सहायक अभियंता (एई) पर कार्रवाई हो चुकी है। अभी इस मामले में तीन अभियंताओं पर और कार्रवाई होनी है। यह तीनों अब उच्चाधिकारियों के रडार पर हैं। उच्चाधिकारियों ने रोड के ओवर एस्टीमेट में चार अभियंताओं को नोटिस जारी किया था।
पीलीभीत- माधोटांडा रोड 30 किलाेमीटर की है। यह रोड पूरी तरह से खराब हो गई है। कई बार लाखों रुपये से गड्ढे भी भरे जा चुके हैं। सड़क को ठीक कराने के लिए लोनिवि की ओर से एस्टीमेट बनाया गया था। इसमें करीब छह किलोमीटर का टुकड़ा ठीक होने पर भी एस्टीमेट में शामिल कर ओवर बना दिया गया था।
मामले का खुलासा होने पर उच्चाधिकारियों ने इसमें अवर अभियंताओं के अलावा अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को नोटिस जारी किया था। इसके बाद इसमें अधिशासी अभियंता उदय नरायन और सहायक अभियंता राजीव गंगवार को मुख्यालय लखनऊ से अटैच कर दिया गया था। इन दो अधिकारियों के साथ ही अब चार अभियंता संतोष मौर्य, अमोल सक्सेना, अजय सिंह और नवनीत सक्सेना भी कार्रवाई के रडार पर हैं। खुद को कार्रवाई से बचाने के लिए चारों ने राजधानी लखनऊ की दौड़ लगाना शुरु कर दी है।
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अधिशासी अभियंता के कार्यकाल में हर सड़क पर उठा सवाल
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता उदय नरायन के कार्यकाल में जो भी सड़क बनी, अधिकांश पर सवाल उठे। कागजों में सड़क को चकाचक दिखाया जाता था, जबकि वास्तविक हाल कुछ और ही था। कई सड़कों को ग्रामीणों ने हाथ से उखाड़कर वीडियो वायरल किए, लेकिन विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाल यह है कि उनके कार्यकाल में बनी जिले की शायद ही कोई सड़क ठीक होगी। इतना ही नहीं विभाग में बाबुओं की कमीशनबाजी के चलते ठेकेदार परेशान थे। एक बाबू विभाग में चर्चा में भी है। शिकायत के बाद भी अधिशासी अभियंता ने उसे नहीं हटाया।
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पीलीभीत- माधोटांडा रोड 30 किलाेमीटर की है। यह रोड पूरी तरह से खराब हो गई है। कई बार लाखों रुपये से गड्ढे भी भरे जा चुके हैं। सड़क को ठीक कराने के लिए लोनिवि की ओर से एस्टीमेट बनाया गया था। इसमें करीब छह किलोमीटर का टुकड़ा ठीक होने पर भी एस्टीमेट में शामिल कर ओवर बना दिया गया था।
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मामले का खुलासा होने पर उच्चाधिकारियों ने इसमें अवर अभियंताओं के अलावा अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता को नोटिस जारी किया था। इसके बाद इसमें अधिशासी अभियंता उदय नरायन और सहायक अभियंता राजीव गंगवार को मुख्यालय लखनऊ से अटैच कर दिया गया था। इन दो अधिकारियों के साथ ही अब चार अभियंता संतोष मौर्य, अमोल सक्सेना, अजय सिंह और नवनीत सक्सेना भी कार्रवाई के रडार पर हैं। खुद को कार्रवाई से बचाने के लिए चारों ने राजधानी लखनऊ की दौड़ लगाना शुरु कर दी है।
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अधिशासी अभियंता के कार्यकाल में हर सड़क पर उठा सवाल
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता उदय नरायन के कार्यकाल में जो भी सड़क बनी, अधिकांश पर सवाल उठे। कागजों में सड़क को चकाचक दिखाया जाता था, जबकि वास्तविक हाल कुछ और ही था। कई सड़कों को ग्रामीणों ने हाथ से उखाड़कर वीडियो वायरल किए, लेकिन विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाल यह है कि उनके कार्यकाल में बनी जिले की शायद ही कोई सड़क ठीक होगी। इतना ही नहीं विभाग में बाबुओं की कमीशनबाजी के चलते ठेकेदार परेशान थे। एक बाबू विभाग में चर्चा में भी है। शिकायत के बाद भी अधिशासी अभियंता ने उसे नहीं हटाया।