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दस फीसदी भी नहीं हैं महिला अधिवक्ता, अब जागी उम्मीद
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पीलीभीत। महिला अधिवक्ताओं को न्यायपालिका में 50 फीसदी आरक्षण की वकालत देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण ने कर दी। इसके साथ ही न्यायपालिका महिलाओं की भागीदारी को लेकर चर्चा परिचर्चा होने लगी। जनपद की महिला अधिवक्ताओं ने सीजेआई की पहल को सराहा है। महिला अधिवक्ताओं ने बातचीत में उन समस्याओं का जिक्र किया जिनकी वजह से न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी अभी पुरुष अधिवक्ताओं की तुलना में दस फीसदी भी नहीं है। महिलाओं का कहना था कि अगर माहौल मिले तो आने वाले समय में महिला अधिवक्ताओं की संख्या भी बढ़ेगी। महिला जज भी बड़ी संख्या में नजर आएंगी। इस मामले में सीजेआई की बयान ने महिलाओं को न्यायिक सेवाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है लेकिन इसके लिए बहुत कुछ किया जाना जरूरी है। मसलन सभी महिला अधिवक्ताओं को कचहरी में प्राथमिकता के आधार पर चेंबर दिए जाएं। उन्हें न्यायिक सेवाओँ में आबादी के अनुसार आरक्षण दिया जाए। महिलाओँ की भागीदारी से देश में न्याय व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद महिला अधिवक्ताओं ने जाहिर की है। जिले में न्यायिक व्यवस्थाओं को चलाने के लिए करीब 760 अधिवक्ता विभिन्न बार एसोसिएशन में पंजीकृत हैं। जो फौजदारी और अन्य तरह के मामलों में केस लड़ते हैं। महिलाओं की संख्या तकरीबन 50 बताई गई है।
मैं 2006 से वकालत कर रही हूं। महिलाओं को पुरुष से बराबर बताया तो जाता है लेकिन आज भी भेदभाव की नजर से देखा जाता है। ऐसे में महिलाओं अपने हक के लिए एकजुट होने की जरूरत है। यही बात सीजेआई ने कही है दुनिया की महिलाओं एक हो जाओ। अब इसमें देरी की जाए।
विनीता सक्सेना
मैं 2017 से प्रैक्टिस कर रही हूं। मौलिक अधिकारों के लिए लड़ना मेरा लक्ष्य है। जब मैं वकालत में आई तो लगा कि न्यायिक सेवाओं में भी बराबरी का हक पाने के लिए काम करने की जरूरत है। इस मामले में लोगों को भी अपनी सोच बदलने होगी क्योंकि महिलाएं किसी क्षेत्र में अब पीछे नहीं हैं।
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निशात बी
मैं 2018 से वकालत करने आई। परिवार ने सपोर्ट दिया। हौसला भी बढ़ाया लेकिन कचहरी में छोटी छोटी समस्याएं आती हैं और ऐसा लगता है कि कुछ लोग हतोत्साहित कर रहे हैं लेकिन हम अपने हौसले से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले दिनों में महिलाएं न्यायिक सेवाओं में अच्छा मुकाम हासिल करेंगी। -अनु वर्मा
जब पिता के साथ मैं वकालत में आईं तो कुछ रिश्तेदारों ने भी हतोत्साहित किया लेकिन पिता ने मुझे आगे बढ़ाया। वकालत में आने के बाद मैंने देखा कि कचहरी में महिलाओं को लेकर तमाम तरह की समस्या रहती हैं। महिलाओं को हिम्मत नहीं हरानी चाहिए। अपने मजबूत इरादे से महिलाएं न्यायिक क्षेत्र में मुकाम हासिल करेंगी।
आशिया फात्मा, सहसचिव संयुक्त बार एसोसिएशन
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मैं 2006 से वकालत कर रही हूं। महिलाओं को पुरुष से बराबर बताया तो जाता है लेकिन आज भी भेदभाव की नजर से देखा जाता है। ऐसे में महिलाओं अपने हक के लिए एकजुट होने की जरूरत है। यही बात सीजेआई ने कही है दुनिया की महिलाओं एक हो जाओ। अब इसमें देरी की जाए।
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विनीता सक्सेना
मैं 2017 से प्रैक्टिस कर रही हूं। मौलिक अधिकारों के लिए लड़ना मेरा लक्ष्य है। जब मैं वकालत में आई तो लगा कि न्यायिक सेवाओं में भी बराबरी का हक पाने के लिए काम करने की जरूरत है। इस मामले में लोगों को भी अपनी सोच बदलने होगी क्योंकि महिलाएं किसी क्षेत्र में अब पीछे नहीं हैं।
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निशात बी
मैं 2018 से वकालत करने आई। परिवार ने सपोर्ट दिया। हौसला भी बढ़ाया लेकिन कचहरी में छोटी छोटी समस्याएं आती हैं और ऐसा लगता है कि कुछ लोग हतोत्साहित कर रहे हैं लेकिन हम अपने हौसले से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले दिनों में महिलाएं न्यायिक सेवाओं में अच्छा मुकाम हासिल करेंगी। -अनु वर्मा
जब पिता के साथ मैं वकालत में आईं तो कुछ रिश्तेदारों ने भी हतोत्साहित किया लेकिन पिता ने मुझे आगे बढ़ाया। वकालत में आने के बाद मैंने देखा कि कचहरी में महिलाओं को लेकर तमाम तरह की समस्या रहती हैं। महिलाओं को हिम्मत नहीं हरानी चाहिए। अपने मजबूत इरादे से महिलाएं न्यायिक क्षेत्र में मुकाम हासिल करेंगी।
आशिया फात्मा, सहसचिव संयुक्त बार एसोसिएशन