सुरसती जिंदा हैं: छह साल तक जीवित होने के सुबूत लेकर भटकीं, प्रशासन ने अब माना, खाते से रोक हटी
सुरसती देवी छह साल से खुद को जीवित साबित करने के लिए सुबूत लेकर भटक रही थीं। अमर उजाला ने सुरसती की व्यथा को प्रमुख प्रकाशित किया। इसके बाद अफसरों ने उनसे संपर्क साधा। उनका बंद खाता दोबारा शुरू कराया।
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पीलीभीत में आखिरकार छह साल बाद प्रशासन ने यह स्वीकार कर ही लिया कि वृद्धा सुरसती देवी जीवित हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बैंक से संपर्क कर उनका खाता भी खुलवा दिया है। अब पेंशन शुरू करने को लेकर अभिलेखों की तलाश की जा रही है।
पूरनपुर क्षेत्र के गांव लुकुटियाई की रहने वालीं सुरसती देवी को समाज कल्याण विभाग की ओर से वृद्धा पेंशन दी जा रही थी। वर्ष 2017 में सत्यापन के दौरान तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी राजेश शर्मा ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। विभाग की ओर से जब अभिलेख जब बैंक में पहुंचे, तो खाते को बंद कर दिया गया।
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अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी खबर
खुद को जिंदा साबित करने के लिए महिला छह साल से घूम रहीं थी। ऐसे में दो दिन पहले महिला की व्यथा को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर छपने के बाद अधिकारियों में खलबली मच गई। महिला से संपर्क करने का प्रयास शुरू किया गया।
महिला का खाता कराया गया शुरू
समाज कल्याण विभाग ने बैंक के शाखा प्रबंधक से संपर्क साधकर खाते के संबंध में जानकारी जुटाई। महिला के जिंदा होने की बात बताते हुए उनका खाता फिर से शुरू करवा दिया। खाता शुरू होने से महिला और उसके बेटा खुश हैं। खाता शुरू होने के बाद अब रोकी गई पेंशन चालू करने की दिशा में कवायद तेज कर दी गई है।
समाज कल्याण अधिकारी विपिन वर्मा ने बताया कि सत्यापन के दौरान मृत घोषित महिला के मामले में शाखा प्रबंधक से वार्ता करने के बाद खाते को दोबारा शुरू करवा दिया गया है। पेंशन को लेकर अभिलेखों को तलाशा जा रहा है।