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आस्था बदली फिर भी बेलने पड़ रहे पापड़
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Wed, 19 Apr 2017 11:03 PM IST
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सत्ता परिवर्तन के बाद ब्लॉक प्रमुख ने कुर्सी बचाने को भले ही भाजपा में आस्था जताकर केंद्रीय मंत्री से आशीर्वाद ले लिया हो, लेकिन कुर्सी बचाने के लिए उनको तमाम पापड़ बेलने पड़ सकते हैं। वजह पहले से मोर्चा बंदी की तैयारी कर रहे लोग सक्रिय हो गए है। एक ग्रुप के लोगों ने एक नोटरी वकील को साथ लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्यों से संपर्क कर अविश्वास प्रस्ताव को शपथ पत्र बनवाने शुरू कर दिए हैं, वहीं केंद्रीय मंत्री के समर्थकों का एक खेमा और कुछ भाजपाई कुर्सी पाने को ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पलटने की जुगत में जुट गए हैं। फरवरी 2016 को ब्लॉक प्रमुख के हुए चुनाव में केंद्रीय मंत्री के कट्टर समर्थक लक्ष्मीकांत भारद्वाज की पत्नी रेखा देवी सहित छह प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। सपाइयों के गुट ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंकी थी। परिणाम स्वरूप ब्लॉक प्रमुख राजप्रीत कौर ने अपनी प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी रेखा देवी को 162 वोटों से पराजित किया था। शत प्रतिशत हुई वोटिंग में 11 वोट निरस्त हुए थे। राजप्रीत कौर को 208, मनप्रीत कौर को छह, परवीन जहां को तीन जबकि बिलकीस और सुनीता को कोई वोट नहीं मिला था। सत्ता परिवर्तन के बाद कुछ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री के करीबी अविश्वास प्रस्ताव की रूपरेखा बना रहे थे, ताकि किसी तरह से तख्ता पलट कर कुर्सी को हथिया सके। ब्लॉक प्रमुख की सीट पर खतरे के बादल मंडराने पर ब्लॉक प्रमुख ने एक दिन पहले दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय मंत्री से मिलकर भाजपा में आस्था व्यक्त कर उनका आशीर्वाद लिया है। इसकी जानकारी पर केंद्रीय मंत्री के कट्टर समर्थक माने जाने वाले कुछ लोग और कुछ भाजपा नेता सक्रिय हो गए हैं। उनका कहना है कि आस्था तो कोई कही भी जता सकता है, लेकिन ब्लॉक प्रमुख का भाजपा से कोई ताल्लुक नहीं है। उधर, चुनाव लड़ाने वाले सपा नेता भी नाखुश हो गए है। विरोधी गुट के कुछ लोगों ने मोर्चा भी खोल दिया है। एक नोटरी वकील को साथ लेकर अविश्वास प्रस्ताव को लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्यों से संपर्क कर उनके शपथ पत्र लिए जा रहे हैं। मामला लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि कुछ भी हो। ब्लॉक प्रमुख को सत्ता परिवर्तन के बाद ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी बचाने को तमाम पापड़ बेलने पड़ सकते हैं।
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