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बीएससी बॉटनी और केमिस्ट्री में साल भर नहीं कॉलेज में पढ़ाई नहीं हुई...अब देनी पड़ेगी परीक्षा
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राम लुभाई साहनी राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय।
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। रामलुभाई साहनी राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पांच वर्ष से बॉटनी और केमिस्ट्री पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक नहीं है। हर वर्ष छात्राएं दाखिले लेती हैं और अपने आप पढ़ाई करके परीक्षा देती हैं। एक बार फिर यही स्थिति है। परीक्षाएं 11 जून से प्रस्तावित हैं। कॉलेज में दोनों विषयों की पूरे वर्ष पढ़ाई नहीं हुई। आप खुद समझ सकते हैं कि बेटियों का भविष्य बनाने के लिए करोड़ों रुपये लगाकर खोले गए डिग्री कॉलेज में शिक्षा का स्तर क्या है।
पीलीभीत जिले का पहला राजकीय महिला महाविद्यालय 27 फरवरी 1997 को खुला था। विषय वार शिक्षक और प्राचार्य के पद सृजित हुए। प्राचार्य समेत नौ शिक्षक होने चाहिए लेकिन इस समय सिर्फ पांच शिक्षक सेवारत हैं। प्राचार्य और तीन विषयों के शिक्षक नहीं हैं। एक शिक्षक जेल में हैं। दो पद रिक्त हैं। केमिस्ट्री में 30 जून 2017 शिक्षक का पद और बॉटनी शिक्षक का पद 7 जुलाई 2017 से खाली है। गणित के शिक्षक दुष्कर्म के आरोप में नवंबर 2021 से जेल में बंद हैं। प्राचार्य का पद खाली है। कार्यवाहक प्राचार्य का कार्यभार जूलॉजी के शिक्षक डॉ. दिनेश चंद्रा के पास है। अब परीक्षाएं सिर पर हैं, जिन छात्राओं ने घर पर पढ़ाई की या फिर कोचिंग ज्वाइन की थी वे परीक्षा को लेकर सहज हैं लेकिन जिन छात्राओं ने पढ़ाई की उम्मीद में दाखिला लिया था उन्हें निराशा हाथ लग रही है। उनके सामने चिंता का विषय यही है कि बिना पढ़े परीक्षा कैसे दें। दूसरा सवाल यह है कि जब शिक्षक नहीं तैनात करने थे तो दाखिले क्यों लिए गए? क्या कॉलेज सिर्फ पंजीकरण और अग्रसारण केंद्र है?
क्या कहते हैं जिम्मेदार
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. दिनेश चंद्रा ने कहा कि रिक्त पदों के बारे में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के माध्यम से शासन को समय-समय पर अवगत कराया जाता है। विज्ञान विषय में प्रायोगिक परीक्षा के लिए कभी-कभार बीसलपुर के राजकीय डिग्री कॉलेज से शिक्षक बुला लिए जाते हैं।
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छात्राओं के भविष्य से हुआ खिलवाड़
बीएससी प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष में केमिस्ट्री पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या 314 है। बॉटनी की छात्राएं 216 हैं। इन छात्राओं के भविष्य के साथ शिक्षक न होने की वजह से खिलवाड़ हो रहा है। अब सवाल यह है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है? जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी।
सेल्फ स्टडी और कोचिंग है सहारा
सेल्फ स्टडी और कोचिंग ही छात्राओं का सहारा है। बीएससी में दाखिला लेने के बाद बॉटनी और केमिस्ट्रिी की इस वर्ष एक भी क्लास नहीं लगी। पढ़ाई का सत्र समाप्त हो गया। बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा दीपिका शर्मा ने बताया कि सेल्फ स्टडी के जरिये तैयारी की है। बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्राओं ने कहा कि परीक्षाएं सिर पर हैं। दो वर्ष से कॉलेज में दो विषयों की पढ़ाई नहीं हुई। खुद की तैयारी से उतनी तैयारी नहीं होती जो कॉलेज की पढ़ाई से होती है।
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पीलीभीत जिले का पहला राजकीय महिला महाविद्यालय 27 फरवरी 1997 को खुला था। विषय वार शिक्षक और प्राचार्य के पद सृजित हुए। प्राचार्य समेत नौ शिक्षक होने चाहिए लेकिन इस समय सिर्फ पांच शिक्षक सेवारत हैं। प्राचार्य और तीन विषयों के शिक्षक नहीं हैं। एक शिक्षक जेल में हैं। दो पद रिक्त हैं। केमिस्ट्री में 30 जून 2017 शिक्षक का पद और बॉटनी शिक्षक का पद 7 जुलाई 2017 से खाली है। गणित के शिक्षक दुष्कर्म के आरोप में नवंबर 2021 से जेल में बंद हैं। प्राचार्य का पद खाली है। कार्यवाहक प्राचार्य का कार्यभार जूलॉजी के शिक्षक डॉ. दिनेश चंद्रा के पास है। अब परीक्षाएं सिर पर हैं, जिन छात्राओं ने घर पर पढ़ाई की या फिर कोचिंग ज्वाइन की थी वे परीक्षा को लेकर सहज हैं लेकिन जिन छात्राओं ने पढ़ाई की उम्मीद में दाखिला लिया था उन्हें निराशा हाथ लग रही है। उनके सामने चिंता का विषय यही है कि बिना पढ़े परीक्षा कैसे दें। दूसरा सवाल यह है कि जब शिक्षक नहीं तैनात करने थे तो दाखिले क्यों लिए गए? क्या कॉलेज सिर्फ पंजीकरण और अग्रसारण केंद्र है?
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क्या कहते हैं जिम्मेदार
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. दिनेश चंद्रा ने कहा कि रिक्त पदों के बारे में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के माध्यम से शासन को समय-समय पर अवगत कराया जाता है। विज्ञान विषय में प्रायोगिक परीक्षा के लिए कभी-कभार बीसलपुर के राजकीय डिग्री कॉलेज से शिक्षक बुला लिए जाते हैं।
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छात्राओं के भविष्य से हुआ खिलवाड़
बीएससी प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ष में केमिस्ट्री पढ़ने वाली छात्राओं की संख्या 314 है। बॉटनी की छात्राएं 216 हैं। इन छात्राओं के भविष्य के साथ शिक्षक न होने की वजह से खिलवाड़ हो रहा है। अब सवाल यह है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है? जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी।
सेल्फ स्टडी और कोचिंग है सहारा
सेल्फ स्टडी और कोचिंग ही छात्राओं का सहारा है। बीएससी में दाखिला लेने के बाद बॉटनी और केमिस्ट्रिी की इस वर्ष एक भी क्लास नहीं लगी। पढ़ाई का सत्र समाप्त हो गया। बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा दीपिका शर्मा ने बताया कि सेल्फ स्टडी के जरिये तैयारी की है। बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्राओं ने कहा कि परीक्षाएं सिर पर हैं। दो वर्ष से कॉलेज में दो विषयों की पढ़ाई नहीं हुई। खुद की तैयारी से उतनी तैयारी नहीं होती जो कॉलेज की पढ़ाई से होती है।