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नीलकंठ महादेव मंदिर से जुड़ी भक्तों की आस्था

Sun, 13 Jul 2014 05:34 AM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Sun, 13 Jul 2014 05:34 AM IST
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बिलसंडा। नगर से महज चार किलोमीटर दूरी पर स्थित गांव लिलहर छोटी काशी के रूप में विख्यात है। यहां स्थित नीलकंठ बाबा देवस्थल से लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है। श्रावण मास में श्रद्धालु कछला से गंगाजल भरकर यहां कांवड़ चढ़ाते हैं। रविवार से शुरू हो रहे श्रावण मास की वजह से मंदिर में आज विशेष रूप से साफ सफाई कराई गई। मान्यता है कि शिव सरोवर में पवित्र स्नान करने मात्र से चर्मरोग दूर हो जाता है। मन से मांगी गईं मुरादें भी पूरी होती हैं।
मान्यता है कि राजा मोरध्वज केे भाई नीलध्वज द्वारा इस विशाल शिव सरोवर की खुदाई कराकर भगवान नीलकंठ बाबा की स्थापना कराई थी। उनके समय की तमाम किदवंतिया आज भी जुड़ी हुई हैं। बताते हैं कि नीलध्वज कोढ़ रोग से पीड़ित थे और वह अपनी सेना के साथ इधर से गुजरते समय रास्ते में शौच गए। हाथ धोने के लिए उन्होंने यहां स्थित तालाब के पानी में जैसे ही अपने हाथ डाले कि उनका रोग दूर हो गया। उसके बाद उन्होंने यहां काफी दिन रहकर नित्य स्नानकर भगवान नीलकंठ की पूजा अर्चना की। इतना ही नहीं विशाल सरोवर भी खुदवाया, लेकिन तब से आज तक इस सरोवर की न तो खुदाई कराई गई और न ही सौन्दर्यीकरण की दिशा में कोई प्रयास हुए। हालांकि नगर के सर्राफ व्यवसायी धर्मपाल वर्मा ने हाल ही में इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार कराया है। प्रत्येक माह मेें अमावस के दिन यहां विशाल मेला लगता है। लाखों की तादात में श्रद्धालु यहां आकर पवित्र सरोवर में स्नान कर भगवान नीलकंठ बाबा के मंदिर में प्रासाद चढ़ाकर मनौतियां मांगते हैं।
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गौरीशंकर महादेव मंदिर में होता जलाभिषेक
बिलसंडा। गांव मझिगवां स्थित भगवान गौरीशंकर महादेव का प्राचीन मंदिर भी आस्था का केंद्र है। यहां भी श्रावण मास भर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। श्रद्धालु नियमित वेलपत्र चढ़ाकर मनौतियां मांगते हैं। बता दें कि इस मंदिर का निर्माण नगर के टीकाराम वैश्य ने कराया था, लेकिन सौन्दर्यीकरण नगर के प्रमुख सर्राफ व्यवसायी गौरीशंकर वर्मा ने कराया। इस मंदिर के पास करीब 16 एकड़ उपजाऊ भूमि है। जिसके रख रखाव के लिए मंदिर के महंत श्री सिद्धेश्वरानंद जी महाराज ने ट्रस्ट भी बनवा रखा है। मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से जिसने भी जो भी मनोकामना की उसकी पूरी हुई। श्रद्धालु इस मंदिर में भी बड़ी संख्या में कांवड़ चढ़ाते हैं।
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