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अधिक मुनाफे के लिए सेहत से खिलवाड़
Pilibhit
Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। शासन-प्रशासन के लाख दावों के बावजूद मिलावटखोर मुनाफे के लिए लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे है। बाजार में खुलेआम नवरात्र पर मिलावटी मावा और कुट्टू आटे की ब्रिकी हो रही है। सैंपलिंग के नाम पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हर बार की तरह नवरात्र शुरू होते ही मिलावटी मावा लोगों की सेहत को जहर साबित होने लगा है।
हर साल मावा उपवास रखने वालों को बीमार कर देता है। बाजार में मावा के दाम के डेढ़ सौ से 180 रुपये के बीच हैं। त्योहारों पर मावा में जबर्दस्त मिलावट होती है। वहीं अक्तूबर और नवंबर में दीवाली जैसे बड़े त्योहार आने बाकी हैं। मिलवाटखोरों ने अभी से ही बड़े पैमाने पर इसकी तैयारियां गुपचुप तरीखे से शुरू कर दी है। इसकेलिए मिलावट खोरों ने बेसन में मटर और चावल को पीसकर तैयार करने का फार्मूला निकाला है। मैदा में भी चावल की कनकी, खुले मसालों में धान की भूसी, कलर पालिश , तेजपात के पत्ते , चावल की कनकी और केमिकल का प्रयोग भी होता है। सबसे ज्यादा बारे के न्यारे खाद्य तेलों के कारोबारी करते हैं। सरसों के तेल में अन्य पड़ोसी जिलों से बड़ी मात्रा में अलसी, अंडी और चावल का तेल मंगवाया जा रहा है। बाजार में तमाम घटिया कंपनी के वनस्पति घी की भी धमक है। मिलावटखोरी का जाल इस तरफ फैला हुआ है। कि इसको रोकना आसान नहीं है। सैंपल भरे जाते हैं, मुकदमा भी दर्ज होता है, लेकिन उनकी पैरवी ठीक से न होने के कारण मिलावटखोर सलाखों तक पहुंचने से बच जाते हैं।
कैसे पहचानें मिलावटी वस्तुओं को?
हल्दी : पानी में घोलें, ऊपर का पानी धीरे से निकाल दें।
मैदा : नीचे अगर सफेद रंग का कुछ दिखे, तो समझिए चावल की कनकी है।
धनिया : पहले सूंघें, अगर शक हो तो चखकर भी मिलावट का पता लग जाएगा।
लालमिर्च : मिलावटी मिर्च का रंग मटमैला और गहरा लाल होता है। इसे पानी में घोलें। रंग छोड़ दो तो समझो मिलावट।
सरसों तेल : तेल को हथेली में रखकर रगड़ें। अगर चिपचिपाए तो मिलावट। महक सूंघकर भी पता चल जाएगा।
मावा : इसे चखकर ही पता लगाया जा सकता है।
उम्र कैद की सजा का प्रावधान
इस तरह के प्रकरण में आजीवन कारावास का प्रावधान है। आईपीसी की धारा 272, 273 और 420 में कार्रवाई की जाती है। जिसको खाने वाला गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। इसमें उसकी जान भी जा सकती है। मामला बेहद गंभीर है। इसमें जमानत होने में करीब छह माह लगते हैं।
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दूध और तेल समेत दस के नमूने फेल
अगस्त में सेफ्टी फूड एक्ट लागू किया गया था। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सितंबर माह में पॉच नमूने लिए थे। जिनमें तीन नमूने फेल हो गए। वहीं जनवरी से अब तक पचास से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। जिनमें अभी तक पांच फेल हुए हैं। अक्तूबर माह में खाद्य विभाग द्वारा कोई भी सैंपल नहीं लिया गया है।
आमतौर पर मिलावट का पता नहीं चलता है। दूध, घी, पनीर में फार्मेलिन, कास्टिक सोड़ा आदि मिला होने के संकेत मिलने पर पकड़ा जाता है। मौके पर मिले साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई जाती है।
- अशोक मिश्रा, खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी
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हर साल मावा उपवास रखने वालों को बीमार कर देता है। बाजार में मावा के दाम के डेढ़ सौ से 180 रुपये के बीच हैं। त्योहारों पर मावा में जबर्दस्त मिलावट होती है। वहीं अक्तूबर और नवंबर में दीवाली जैसे बड़े त्योहार आने बाकी हैं। मिलवाटखोरों ने अभी से ही बड़े पैमाने पर इसकी तैयारियां गुपचुप तरीखे से शुरू कर दी है। इसकेलिए मिलावट खोरों ने बेसन में मटर और चावल को पीसकर तैयार करने का फार्मूला निकाला है। मैदा में भी चावल की कनकी, खुले मसालों में धान की भूसी, कलर पालिश , तेजपात के पत्ते , चावल की कनकी और केमिकल का प्रयोग भी होता है। सबसे ज्यादा बारे के न्यारे खाद्य तेलों के कारोबारी करते हैं। सरसों के तेल में अन्य पड़ोसी जिलों से बड़ी मात्रा में अलसी, अंडी और चावल का तेल मंगवाया जा रहा है। बाजार में तमाम घटिया कंपनी के वनस्पति घी की भी धमक है। मिलावटखोरी का जाल इस तरफ फैला हुआ है। कि इसको रोकना आसान नहीं है। सैंपल भरे जाते हैं, मुकदमा भी दर्ज होता है, लेकिन उनकी पैरवी ठीक से न होने के कारण मिलावटखोर सलाखों तक पहुंचने से बच जाते हैं।
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कैसे पहचानें मिलावटी वस्तुओं को?
हल्दी : पानी में घोलें, ऊपर का पानी धीरे से निकाल दें।
मैदा : नीचे अगर सफेद रंग का कुछ दिखे, तो समझिए चावल की कनकी है।
धनिया : पहले सूंघें, अगर शक हो तो चखकर भी मिलावट का पता लग जाएगा।
लालमिर्च : मिलावटी मिर्च का रंग मटमैला और गहरा लाल होता है। इसे पानी में घोलें। रंग छोड़ दो तो समझो मिलावट।
सरसों तेल : तेल को हथेली में रखकर रगड़ें। अगर चिपचिपाए तो मिलावट। महक सूंघकर भी पता चल जाएगा।
मावा : इसे चखकर ही पता लगाया जा सकता है।
उम्र कैद की सजा का प्रावधान
इस तरह के प्रकरण में आजीवन कारावास का प्रावधान है। आईपीसी की धारा 272, 273 और 420 में कार्रवाई की जाती है। जिसको खाने वाला गंभीर रूप से बीमार हो जाता है। इसमें उसकी जान भी जा सकती है। मामला बेहद गंभीर है। इसमें जमानत होने में करीब छह माह लगते हैं।
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दूध और तेल समेत दस के नमूने फेल
अगस्त में सेफ्टी फूड एक्ट लागू किया गया था। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सितंबर माह में पॉच नमूने लिए थे। जिनमें तीन नमूने फेल हो गए। वहीं जनवरी से अब तक पचास से अधिक नमूने लिए जा चुके हैं। जिनमें अभी तक पांच फेल हुए हैं। अक्तूबर माह में खाद्य विभाग द्वारा कोई भी सैंपल नहीं लिया गया है।
आमतौर पर मिलावट का पता नहीं चलता है। दूध, घी, पनीर में फार्मेलिन, कास्टिक सोड़ा आदि मिला होने के संकेत मिलने पर पकड़ा जाता है। मौके पर मिले साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई जाती है।
- अशोक मिश्रा, खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी