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बिलसंडा में हुआ रिश्ते का खून

Pilibhit Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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बिलसंडा। गांव मुड़िगवां में मकान के आगे मिट्टी डालने को लेकर हुए विवाद में एक व्यक्ति परिजनों की मदद से सगे भाई की भाला घोंपकर हत्या कर दी। मृतक के पुत्र की ओर से पुलिस ने मां -बेटी समेत चार लोगों को नामजद किया है। मृतक की भाभी को पुलिस ने हिरासत में लिया है। घटना से गांव में शोक है।
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मुड़िगवां निवासी अनिल कुमार ने दर्ज कराई गई रिपोर्ट में कहा है कि उसके पिता श्रीकृष्ण जाटव (45) बृहस्पतिवार की सुबह करीब छह बजे अपने मकान के सामने खाली पड़ी जगह पर डाली गई मिट्टी को कूटकर समतल कर रहे थे। इसी बीच उसके ताऊ मनोज उर्फ शहजादे आए और उन्होंने मिट्टी समतल करने का विरोध किया। इस पर दोनों भाइयों में कहासुनी हो गई। अनिल ने बताया कि इसी दौरान उसकी ताई मीना देवी, तहेरी बहन अनीता और तहेरा भाई संजीव कुमार भाला और लाठी डंडा लेकर आ गए। संजीव ने भाला अपने पिता के हाथ पकड़ा दिया। गुस्साए शहजादे ने अपने उसके पिता के सीने में भाला घोंपदिया, जिससे वह घायल होकर गिर गए। कुछ देर में ही उनकी मौत हो गई।
इस घटना से गांव में दहशत फैल गई। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने मृतक के पुत्र अनिल कुमार की ओर से हत्या करने के आरोप में मनोज उर्फ शहजादे, उसके पुत्र संजीव उर्फ गुड्डू और पत्नी मीना देवी और पुत्री अनीता देवी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने नामजद हत्याभियुक्त मीना देवी को मौके पर गिरफ्तार भी कर लिया। उधर, सीओ तौफीक हुसैन ने गांव पहुंचकर मृतक की पत्नी और उनके लड़के से घटना की बाबत जानकारी की। साथ ही हत्याभियुक्तों को गिरफ्तार करने को पुलिस को निर्देश दिए।
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...एक झटके में तोड़ दी रिश्ते की डोर
सुरेश जायसवाल
बिलसंडा। बदलते परिवेश में लोगों को रिश्ते नातों की जरा सी भी परवाह नहीं है और जरा-जरा सी बात पर रिश्तों का खून करने से भी नहीं हिचकते। गांव मुड़िगवां में शहजादे ने अपने अनुज श्रीकृष्ण का खून करके यह साबित कर दिया है।
मृतक श्रीकृष्ण तीन भाइयों में दूसरे नंबर का था। पिता झम्मन लाल ने अपने जीते जी तीनों लड़कों के लिए बराबर-बराबर मकान की जगह दे दी थी, लेकिन उनकी मौत के बाद से श्रीकृष्ण और शहजादे में कभी सामंजस्य नहीं रहा। शहजादे ने बसपा सरकार में अपने अनुज को पुलिस से भी काफी परेशान कराया, क्योंकि वह बसपा सरकार के तत्कालीन मंत्री के दरबार में जाता रहता था। श्रीकृष्ण को शायद यह उम्मीद नहीं थी कि जरा-जरा सी बात पर होने वाला विवाद उसकी जान पर आ बनेगा। शहजादे को अगर भाई जैसे पवित्र रिश्ते की जरा सी भी परवाह होती तो शायद वह इतना बड़ा कदम नहीं उठाता।
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दो वर्ष पहले बेटों ने की थी मां-बाप की हत्या
रिश्तों का खून करने की यह कोई पहली घटना नहीं है। 4 फरवरी 2010 की सुबह गांव कनपरा में बच्चू लाल और मुन्नू लाल ने अपने पिता और मां ओमा देवी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना से सभी का दिल दहल गया था। घटना के पीछे कोई विशेष वजह नहीं थी। दोनों भाइयों ने मां-बाप का कत्ल महज इसलिए कर दिया था, क्योंकि मां के कहने पर बाप ने अपनी जमीन का कुछ हिस्सा बेटी के नाम कर दिया था। इससे पूर्व गांव जमुनिया महुआ में भी चार वर्ष पहले एक कलियुगी बेटे ने मां-बाप को मौत के घाट उतार दिया था।
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टूट गया श्रीकृष्ण का परिवार
श्रीकृष्ण की मौत से उसका छोटा सा परिवार पूरी तरह टूट गया। पत्नी सुदामा देवी पर तो जैसे पहाड़ सा टूट गया हो। उसे यह बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि उसके अपने ही उसका सुहाग उजाड़ देंगे। श्रीकृष्ण के दो पुत्र अनिल और अंकित हैं। बेटी का वह पिछले वर्ष विवाह कर चुका है। परिवार का भरण पोषण करने के लिए महज आठ बीघा जमीन है।

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