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निलंबन की कार्रवाई करना डीडीओ को पड़ा महंगा
Updated Sat, 21 Jul 2018 11:08 PM IST
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बाबू को निलंबित किया तो डीडीओ को मिली विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि
अफसरों ने चार दिन दबाए रखा मामला, कमिश्नर ने की कार्रवाई
जेडीसी के जारी आदेश को ताक पर रख की कार्रवाई, विभाग में मचा हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। नियमों को ताक पर रखकर संयुक्त विकास आयुक्त (जेडीसी) बरेली, कार्यालय से सम्बद्ध लिपिक पर निलंबन की कार्रवाई करना जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) को महंगा पड़ गया। कमिश्नर ने जांच के बाद डीडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी। डीडीओ की यह नाकामी छिपाने के लिए यह मामला चार दिन तक विभागीय अफसर छिपाए रहे, इसी बीच विकास विभाग के कर्मचारियों से सूचना लीक होने पर यह मामला खुला तो बैकफुट पर आए अफसर भी डीडीओ द्वारा गलत तरीके से कार्रवाई करने की बात कर कमिश्नर के आदेश पर प्रतिकूल प्रविष्टि देने की बात स्वीकारने लगे।
सात जुलाई को डीडीओ सुशील कुमार उपाध्याय ने जेडीसी श्रीकृष्ण त्रिपाठी के जारी आदेश को दरकिनार व पद का दुरुपयेग कर नियमों को ताक पर रखकर उनके कार्यालय से सम्बद्ध लिपिक अनीता सक्सेना को निलंबित कर बिलसंडा से सम्बद्धीकरण करने का आदेश जारी कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद लिपिक अनीता सक्सेना ने मामले की शिकायत कमिश्नर पीवी जगमोहन से की। जांच में पता चला कि जेडीसी के आदेश पर लिपिक को सम्बद्ध किया गया था। जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई निरस्त करते हुए कमिश्रर पीवी जगमोहन ने डीडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी। साथ ही भविष्य में उच्चाधिकारियों के जारी आदेश के खिलाफ जाने पर कठोर कार्रवाई किए जाने को कहा है। इस बात का पता चलने पर विभाग में हड़कंप सा मचा हुआ है।
जारी पत्र में लिखा...
कमिश्नर द्वारा जारी पत्र में डीडीओ सुशील कुमार उपाध्याय की कार्रवाई को गलत ठहराने के साथ ही लिखा है कि श्री उपाध्याय उच्चाधिकारियों के पारित आदेश के विरुद्ध आचरण करने, अनुशासनहीनता बरतने, उद्धंड होने, पद का दुरुपयोग कर स्वेच्छाचारिता से कार्य करने के लिए दोषी हैं। जिसके लिए उन्हें प्रतिकृल प्रविष्टि प्रदान की जाती है।
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विभागीय कर्मियों ने खोली पोल
फजीहत होने के डर से चार दिन से अफसर इस मामले को छिपाए हुए थे। इस बीच शुक्रवार को विकास विभाग कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर डीडीओ पर कमिश्नर द्वारा की गई कार्रवाई की सूचना उजागर कर दी। जिसके बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
डीडीओ ने गलत तरीके से कार्रवाई की थी। कमिश्नर के आदेश पर लिपिक अनीता सक्सेना को बहाल कर दिया गया। कमिश्रर कार्यालय का जारी आदेश भी प्राप्त हो गया है।- वीके भागवत, सीडीओ
लिपिक अनीता सक्सेना का निलंबन करने का अधिकार डीडीओ को नहीं था। मामले की जांच के बाद कमिश्नर के आदेश पर डीडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। साथ ही गलती की पुनरावृत्ति होने पर कार्यवाई को लिखा है।- श्रीकृष्ण त्रिपाठी, संयुक्त विकास आयुक्त
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अफसरों ने चार दिन दबाए रखा मामला, कमिश्नर ने की कार्रवाई
जेडीसी के जारी आदेश को ताक पर रख की कार्रवाई, विभाग में मचा हड़कंप
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। नियमों को ताक पर रखकर संयुक्त विकास आयुक्त (जेडीसी) बरेली, कार्यालय से सम्बद्ध लिपिक पर निलंबन की कार्रवाई करना जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) को महंगा पड़ गया। कमिश्नर ने जांच के बाद डीडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी। डीडीओ की यह नाकामी छिपाने के लिए यह मामला चार दिन तक विभागीय अफसर छिपाए रहे, इसी बीच विकास विभाग के कर्मचारियों से सूचना लीक होने पर यह मामला खुला तो बैकफुट पर आए अफसर भी डीडीओ द्वारा गलत तरीके से कार्रवाई करने की बात कर कमिश्नर के आदेश पर प्रतिकूल प्रविष्टि देने की बात स्वीकारने लगे।
सात जुलाई को डीडीओ सुशील कुमार उपाध्याय ने जेडीसी श्रीकृष्ण त्रिपाठी के जारी आदेश को दरकिनार व पद का दुरुपयेग कर नियमों को ताक पर रखकर उनके कार्यालय से सम्बद्ध लिपिक अनीता सक्सेना को निलंबित कर बिलसंडा से सम्बद्धीकरण करने का आदेश जारी कर दिया था। इस कार्रवाई के बाद लिपिक अनीता सक्सेना ने मामले की शिकायत कमिश्नर पीवी जगमोहन से की। जांच में पता चला कि जेडीसी के आदेश पर लिपिक को सम्बद्ध किया गया था। जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई निरस्त करते हुए कमिश्रर पीवी जगमोहन ने डीडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी। साथ ही भविष्य में उच्चाधिकारियों के जारी आदेश के खिलाफ जाने पर कठोर कार्रवाई किए जाने को कहा है। इस बात का पता चलने पर विभाग में हड़कंप सा मचा हुआ है।
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जारी पत्र में लिखा...
कमिश्नर द्वारा जारी पत्र में डीडीओ सुशील कुमार उपाध्याय की कार्रवाई को गलत ठहराने के साथ ही लिखा है कि श्री उपाध्याय उच्चाधिकारियों के पारित आदेश के विरुद्ध आचरण करने, अनुशासनहीनता बरतने, उद्धंड होने, पद का दुरुपयोग कर स्वेच्छाचारिता से कार्य करने के लिए दोषी हैं। जिसके लिए उन्हें प्रतिकृल प्रविष्टि प्रदान की जाती है।
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विभागीय कर्मियों ने खोली पोल
फजीहत होने के डर से चार दिन से अफसर इस मामले को छिपाए हुए थे। इस बीच शुक्रवार को विकास विभाग कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर डीडीओ पर कमिश्नर द्वारा की गई कार्रवाई की सूचना उजागर कर दी। जिसके बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
डीडीओ ने गलत तरीके से कार्रवाई की थी। कमिश्नर के आदेश पर लिपिक अनीता सक्सेना को बहाल कर दिया गया। कमिश्रर कार्यालय का जारी आदेश भी प्राप्त हो गया है।- वीके भागवत, सीडीओ
लिपिक अनीता सक्सेना का निलंबन करने का अधिकार डीडीओ को नहीं था। मामले की जांच के बाद कमिश्नर के आदेश पर डीडीओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। साथ ही गलती की पुनरावृत्ति होने पर कार्यवाई को लिखा है।- श्रीकृष्ण त्रिपाठी, संयुक्त विकास आयुक्त