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तेज तर्रार डीएम की छवि छोड़कर जाएंगी शीतल
Updated Sat, 17 Mar 2018 08:56 PM IST
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तेज तर्रार डीएम की छवि छोड़कर जाएंगी शीतल वर्मा
चारों विधायकों की नाराजगी के बाद भी संभाले रहीं मोर्चा
17 पीबीटीपी 24
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। करीब एक साल तक जिले की कमान संभालने वाली डीएम शीतल वर्मा को सीतापुर का डीएम बनाया गया है। जिले में तैनाती के दौरान चारों विधायकों की खिलाफत के बाद भी डटे रहने एवं अपनी तेज तर्रार छवि के लिए भी चर्चित रहीं। उनके स्थान पर डॉ. अखिलेश मिश्रा पीलीभीत के नए जिलाधिकारी बनाए गए हैं।
डीएम शीतल वर्मा ने पहली अप्रैल 2017 को जिले में आमद कराई थी। पहले दिन से ही उनके तेज तेवरों का भान अधिकारियों कर्मचारियों को हो गया था जब चार्ज ग्रहण करने के बाद मिलने पहुंचे अधिकारियों को उन्होंने ड्यूटी निपटाने के बाद शाम को आने की हिदायत देकर लौटा दिया था। उनके काम करने की तेज गति और त्वरित निर्णय से जहां अधिकारी चकरघिन्नी बने रहे हैं। कुछ समय बाद ही उन्होंने जिले के एसडीएम बदल दिए। एक ओर जहां केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी एवं भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश गंगवार से भी उनके मधुर संबंध रहे वहीं दूसरी ओर जिले के भाजपा चारों विधायकों की नाराजगी खुलकर जनता के सामने आई। चारों विधायकों ने उनके खिलाफ न सिर्फ मोर्चा खोला बल्कि डीएम की मौजूदगी के कार्यक्रमों का बहिष्कार शुरू कर दिया। इससे माना जा रहा था कि अब डीएम का जिले में रह पाना मुश्किल है। शासन में उनके काम की पहचान और पहुंच के चलते विधायकों को भी मन मारना पड़ा। इस दौरान स्वयं मुख्यमंत्री ने दो बार जिले का दौरा किया जिसमें पास हुई।
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चारों विधायकों की नाराजगी के बाद भी संभाले रहीं मोर्चा
17 पीबीटीपी 24
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। करीब एक साल तक जिले की कमान संभालने वाली डीएम शीतल वर्मा को सीतापुर का डीएम बनाया गया है। जिले में तैनाती के दौरान चारों विधायकों की खिलाफत के बाद भी डटे रहने एवं अपनी तेज तर्रार छवि के लिए भी चर्चित रहीं। उनके स्थान पर डॉ. अखिलेश मिश्रा पीलीभीत के नए जिलाधिकारी बनाए गए हैं।
डीएम शीतल वर्मा ने पहली अप्रैल 2017 को जिले में आमद कराई थी। पहले दिन से ही उनके तेज तेवरों का भान अधिकारियों कर्मचारियों को हो गया था जब चार्ज ग्रहण करने के बाद मिलने पहुंचे अधिकारियों को उन्होंने ड्यूटी निपटाने के बाद शाम को आने की हिदायत देकर लौटा दिया था। उनके काम करने की तेज गति और त्वरित निर्णय से जहां अधिकारी चकरघिन्नी बने रहे हैं। कुछ समय बाद ही उन्होंने जिले के एसडीएम बदल दिए। एक ओर जहां केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी एवं भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश गंगवार से भी उनके मधुर संबंध रहे वहीं दूसरी ओर जिले के भाजपा चारों विधायकों की नाराजगी खुलकर जनता के सामने आई। चारों विधायकों ने उनके खिलाफ न सिर्फ मोर्चा खोला बल्कि डीएम की मौजूदगी के कार्यक्रमों का बहिष्कार शुरू कर दिया। इससे माना जा रहा था कि अब डीएम का जिले में रह पाना मुश्किल है। शासन में उनके काम की पहचान और पहुंच के चलते विधायकों को भी मन मारना पड़ा। इस दौरान स्वयं मुख्यमंत्री ने दो बार जिले का दौरा किया जिसमें पास हुई।
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