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चूका ही नहीं, और भी बहुत कुछ खास है पीटीआर में
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
Updated Tue, 06 Nov 2018 06:24 PM IST
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टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र नजदीक है। इसको लेकर चल रही तैयारियां भी लगभग पूरी हो चुकीं हैं। सत्र के दौरान चूका बीच पर्यटकों से गुलजार दिखाई देता है, लेकिन पीटीआर के जंगल में सिर्फ चूका बीच ही नहीं उसके अलावा बराही रेंज के जंगल में स्थित सप्त सरोवर, नहरों के जाल समेत कई ऐसी धरोहर भी हैं पर्यटकों को खूब लुभाती हैं।
टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज के कोर एरिया व शारदा डैम से सटा इको टूरिज्म चूका बीच का पर्यटन सत्र 15 नवंबर से शुरू हो रहा है। सीजन में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए हटो की रंगाई-पुताई व मरम्मत का कार्य अंतिम रूप में है। जंगल व चूका बीच का आनंद लेने के लिए पर्यटक काफी उत्साहित रहते हैं। सत्र के दौरान प्रदेश भर के अलावा अन्य राज्यों से भी पर्यटकों की आमद यहां होती रहती है। वहीं कुछ विदेशी पर्यटक भी चूका बीच का लुफ्त उठाना नहीं भूलते हैं। इधर सत्र को लेकर टाइगर रिजर्व भी पूरी तैयारियां कर चूका है। जिसमें चूका बीच का इंट्री प्वाइंट मुस्ताफाबाद गेस्ट को दुरस्त कर लिया गया है। जंगल सफारी की जिम्मेदारी संभाल रहे गाइड व चालकों को भी निर्देशित कर दिया गया है। इधर चूका बीच में आने वाले पर्यटकों के लिए जंगल सफारी के दौरान कई और भी ऐसी ब्रिटिशकाल की धरोहर भी पर्यटकों को खूब पसंद आती हैं।
ब्रिटिश कालीन सप्तसरोवर भी है यहां
पर्यटन सत्र के दौरान चूका बीच के अलावा वर्ष 1926 में बना ब्रिटिश कालीन सात झाल (सप्तसरोवर) भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। जिसे अब सप्तसरोवर के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिश काल में सप्तसरोवर का निर्माण बाइफरकेशन पहुंचने वाले फालूत पानी को कम करने के लिए कराया गया था। इसके लिए बाइफरकेशन से जंगल क्षेत्र के अंतर्गत एक खारजा नहर खोदकर सात झाल (सप्त सरोवर) में डाली गई थी। यह पानी झालों से होते हुए शारदा नदी में डाला जाता था। प्रथम पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत डैम बनाने के बाद से इस नहर को बंद कर दिया गया। जहां वर्तमान में नहर में वन विभाग की ओर से सागौन, शीशम व खैर का वृक्षारोपण कर दिया है।
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बेहतर ग्रासलैंड व वन्यजीव है खास
टाइगर रिजर्व का जंगल प्रकृति की अनमोल धरोहर माना जाता है। नहरों के जाल के बीच खूबसूरत ग्रासलैंड से घिरा जंगल सत्र के दौरान पर्यटकों को यहां आने पर मजबूर कर देता है। जंगल में विचरण करते बाघ व तेंदुए समेत अन्य वन्यजीव भी पर्यटकों के आनंद को दोगुना कर देते हैं।
यहां दिखती नहरों की खूबसूरती
पर्यटन सत्र के दौरान वैसे तो चूका बीच के अलावा बाइफरकेशन व सप्तसरोवर पर्यटमों को खूब लुभाते ही हैं। वहीं टाइगर रिजर्व में नहरों की खूबसूरती भी देखने को मिलती है। बाइफरकेशन से निकलने वाली खीरी ब्रांच नहर व डैम से निकलने वाली सबसीडरी हरदोई ब्रांच नहर जंगल क्षेत्र के एक ही स्थान से उपर नीचे होकर आगे की ओर गुजरती है। नहरों का यह अदभुत नजारा भी पर्यटकों खूब लुभाता है।
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टाइगर रिजर्व की महोफ रेंज के कोर एरिया व शारदा डैम से सटा इको टूरिज्म चूका बीच का पर्यटन सत्र 15 नवंबर से शुरू हो रहा है। सीजन में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए हटो की रंगाई-पुताई व मरम्मत का कार्य अंतिम रूप में है। जंगल व चूका बीच का आनंद लेने के लिए पर्यटक काफी उत्साहित रहते हैं। सत्र के दौरान प्रदेश भर के अलावा अन्य राज्यों से भी पर्यटकों की आमद यहां होती रहती है। वहीं कुछ विदेशी पर्यटक भी चूका बीच का लुफ्त उठाना नहीं भूलते हैं। इधर सत्र को लेकर टाइगर रिजर्व भी पूरी तैयारियां कर चूका है। जिसमें चूका बीच का इंट्री प्वाइंट मुस्ताफाबाद गेस्ट को दुरस्त कर लिया गया है। जंगल सफारी की जिम्मेदारी संभाल रहे गाइड व चालकों को भी निर्देशित कर दिया गया है। इधर चूका बीच में आने वाले पर्यटकों के लिए जंगल सफारी के दौरान कई और भी ऐसी ब्रिटिशकाल की धरोहर भी पर्यटकों को खूब पसंद आती हैं।
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ब्रिटिश कालीन सप्तसरोवर भी है यहां
पर्यटन सत्र के दौरान चूका बीच के अलावा वर्ष 1926 में बना ब्रिटिश कालीन सात झाल (सप्तसरोवर) भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। जिसे अब सप्तसरोवर के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिश काल में सप्तसरोवर का निर्माण बाइफरकेशन पहुंचने वाले फालूत पानी को कम करने के लिए कराया गया था। इसके लिए बाइफरकेशन से जंगल क्षेत्र के अंतर्गत एक खारजा नहर खोदकर सात झाल (सप्त सरोवर) में डाली गई थी। यह पानी झालों से होते हुए शारदा नदी में डाला जाता था। प्रथम पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत डैम बनाने के बाद से इस नहर को बंद कर दिया गया। जहां वर्तमान में नहर में वन विभाग की ओर से सागौन, शीशम व खैर का वृक्षारोपण कर दिया है।
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बेहतर ग्रासलैंड व वन्यजीव है खास
टाइगर रिजर्व का जंगल प्रकृति की अनमोल धरोहर माना जाता है। नहरों के जाल के बीच खूबसूरत ग्रासलैंड से घिरा जंगल सत्र के दौरान पर्यटकों को यहां आने पर मजबूर कर देता है। जंगल में विचरण करते बाघ व तेंदुए समेत अन्य वन्यजीव भी पर्यटकों के आनंद को दोगुना कर देते हैं।
यहां दिखती नहरों की खूबसूरती
पर्यटन सत्र के दौरान वैसे तो चूका बीच के अलावा बाइफरकेशन व सप्तसरोवर पर्यटमों को खूब लुभाते ही हैं। वहीं टाइगर रिजर्व में नहरों की खूबसूरती भी देखने को मिलती है। बाइफरकेशन से निकलने वाली खीरी ब्रांच नहर व डैम से निकलने वाली सबसीडरी हरदोई ब्रांच नहर जंगल क्षेत्र के एक ही स्थान से उपर नीचे होकर आगे की ओर गुजरती है। नहरों का यह अदभुत नजारा भी पर्यटकों खूब लुभाता है।