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कामयाब होने को अभ्यास और एकाग्रता जरूरी: पारकर
Updated Thu, 01 Feb 2018 07:48 PM IST
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कामयाब होने को अभ्यास और एकाग्रता जरूरी: पारकर
टूर्नामेंट में पहुंचे मुबंई के पूर्व रणजी खिलाड़ी
01 पीबीटीपी 37
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। रणजी ट्राफी में मुंबई की ओर से खेेल चुके जुल्फिकार पारकर ने पीलीभीत में में चल रही राज्यस्तरीय प्रतियोगिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि कामयाबी के लिए लगन और अभ्यास के साथ एकाग्रता जरूरी है।
भारतीय टीम में सुनील गावस्कर के साथ ओपनर रहे गुलाम पारकर के छोटे भाई एवं मुंबई की ओर से 1977 से 1984 तक रणजी ट्राफी खेल चुके जुल्फिकार पारकर ब़ृहस्पतिवार को अमरोहा की टीम के साथ पीलीभीत पहुंचे। इस दौरान अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि 12 वर्ष की आयु से क्रिकेट खेलना शुरू किया। लेकिन 1976 में सीके नायडू ट्राफी में 65 रन बनाने के बाद सीनियर्स की निगाहों में आए। इसके बाद उनका चयन मुंबई (तब बंबई) क्रिकेट टीम में हुआ। वह विकेट कीपर बल्लेबाज रहे। 1977 से 1984 तक मुंबई के लिए खेलते हुए 129 कैच पकड़कर और 23 स्टांप किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह अमरोहा में क्रिकेट एकेडमी चलछाकर क्रिकेटर्स की नई पौध तैयार कर रहे हैं। उनके दो खिलाड़ी मंयक तेवतिया और रिंवजर दफेदार मुंबई की ओर से खेल रहे हैं। आज के युवाओं में बढ़ते क्रिकेट प्रेम के बाबत पूछने पर उन्होंने कहा इसमें पैसे के साथ ग्लेमर भी है लेकिन इसमें पहुंचना अब आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि कामयाब होने के लिए कड़ी मेहनत के अलावा लगन और एकाग्रता भी जरूरी है। पीलीभीत में चल रहे राज्य स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि रणजी ट्राफी स्तर की व्यवस्थाएं यहां देखने को मिली हैं। भविष्य में यहां रणजी ट्राफी भी कराई जानी चाहिए।
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टूर्नामेंट में पहुंचे मुबंई के पूर्व रणजी खिलाड़ी
01 पीबीटीपी 37
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। रणजी ट्राफी में मुंबई की ओर से खेेल चुके जुल्फिकार पारकर ने पीलीभीत में में चल रही राज्यस्तरीय प्रतियोगिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि कामयाबी के लिए लगन और अभ्यास के साथ एकाग्रता जरूरी है।
भारतीय टीम में सुनील गावस्कर के साथ ओपनर रहे गुलाम पारकर के छोटे भाई एवं मुंबई की ओर से 1977 से 1984 तक रणजी ट्राफी खेल चुके जुल्फिकार पारकर ब़ृहस्पतिवार को अमरोहा की टीम के साथ पीलीभीत पहुंचे। इस दौरान अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि 12 वर्ष की आयु से क्रिकेट खेलना शुरू किया। लेकिन 1976 में सीके नायडू ट्राफी में 65 रन बनाने के बाद सीनियर्स की निगाहों में आए। इसके बाद उनका चयन मुंबई (तब बंबई) क्रिकेट टीम में हुआ। वह विकेट कीपर बल्लेबाज रहे। 1977 से 1984 तक मुंबई के लिए खेलते हुए 129 कैच पकड़कर और 23 स्टांप किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह अमरोहा में क्रिकेट एकेडमी चलछाकर क्रिकेटर्स की नई पौध तैयार कर रहे हैं। उनके दो खिलाड़ी मंयक तेवतिया और रिंवजर दफेदार मुंबई की ओर से खेल रहे हैं। आज के युवाओं में बढ़ते क्रिकेट प्रेम के बाबत पूछने पर उन्होंने कहा इसमें पैसे के साथ ग्लेमर भी है लेकिन इसमें पहुंचना अब आसान नहीं है। उन्होंने बताया कि कामयाब होने के लिए कड़ी मेहनत के अलावा लगन और एकाग्रता भी जरूरी है। पीलीभीत में चल रहे राज्य स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि रणजी ट्राफी स्तर की व्यवस्थाएं यहां देखने को मिली हैं। भविष्य में यहां रणजी ट्राफी भी कराई जानी चाहिए।
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