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50 लाख रुपये से संवरेगा सप्त सरोवर
Updated Fri, 17 Nov 2017 07:58 PM IST
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सप्त सराेवर
- फोटो : अमर उजाला
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शासन को भेजा प्रस्ताव, दो थारू हट, सोलर पंप और पर्यटकों की सुरक्षा को बनेगी पिचिंग
सीएम के दौरे के बाद इको टूरिज्म को विकसित करने की बढ़ी आस
टाइगर रिजर्व में अब सप्त सरोवर के दिन भी बहुरने वाले हैं। यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए दो थारू हट बनाए जाएंगे। पानी सप्लाई को सोलर पंप के अलावा पर्यटकों की सुरक्षा के लिहाज से पिचिंग भी लगाई जाएगी। इसके अलावा हल्दी डेंगा क्षेत्र में वन्य जीवों को जंगल से बाहर जाने से रोकने को तार फेंसिंग और उनके पानी की सुविधा को वाटर हॉल बनाए जाएंगे।
टाइगर रिजर्व में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा और वनों एवं वन्य जीवों से जिलाधिकारी के लगाव के चलते टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी उत्साहित हैं। उन्हें आस बंधी है कि शायद अब टाइगर रिजर्व में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने को अच्छे बजट की व्यवस्था हो जाएगी। इसी क्रम में यहां बराही के जंगल में सप्त सरोवर को भी अच्छे ढंग से विकसित किए जाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। सप्त सरोवर को विकसित करने को लगभग 50 लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसके तहत सप्त सरोवर का सौंदर्यीकरण करने, पर्यटकों के ठहरने को दो थारू हटों का निर्माण, पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पिचिंग निर्माण और सरोवर में पानी सप्लाई का सोलर पंप लगाने आदि कार्य शामिल हैं। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही पर्यटकों की आमद सप्त सरोवर में भी शुरू हो जाएगी।
सप्त सरोवर और चूका बीच में यह दिखेगा अंतर
चूका बीच में जहां एक ओर हरे भरे जंगलों के बीच शारदा डैम का मनोहारी दृश्य देखने को मिलता है, वहीं सप्त सरोवर में ब्रिटिश काल की बनी सात झाल उसके सामने हरे-भरे जंगलों के एक ओर जंगल की तलहटी में दूर-दूर तक बसी बंगालियों की आबादी देखने को मिल सकेगी। इसी रेंज में ब्रिटिश काल में बना खूबसूरत बराही विश्राम भवन भी है। जहां कड़ाके की ठंड शुरू होते ही गेस्ट हाउस के चारों ओर वन्य जीव देखने को मिलते हैं। समीप रेशम फार्म के निकट भी वन्यजीव आसानी से देखने को मिल सकेंगे।
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हल्दीडेंगा में फिर मजबूत होगी तार फेंसिंग
तराई के हल्दीडेंगा क्षेत्र में वन्य जीव तार फेंसिंग लांघकर मैदानी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। जंगल से बाहर निकले वन्यजीव जंगल से सटे खेतों में फसलों को खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसको लेकर तार फेसिंग को और अधिक मजबूत किया जाएगा। साथ ही जंगल क्षेत्र में वन्यजीवों की पानी की सुविधा के लिए वाटर हॉल में बनाए जाएंगे।
इको टूरिज्म को बेहतर करने के लगातार चल रहे हैं। वन्यजीव जंगल से बाहर न जा सके, इसको लेकर हल्दीडेंगा में लगी तार फेसिंग को और अधिक मजबूत किया जाएगा।
अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी
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सीएम के दौरे के बाद इको टूरिज्म को विकसित करने की बढ़ी आस
टाइगर रिजर्व में अब सप्त सरोवर के दिन भी बहुरने वाले हैं। यहां पर्यटकों के ठहरने के लिए दो थारू हट बनाए जाएंगे। पानी सप्लाई को सोलर पंप के अलावा पर्यटकों की सुरक्षा के लिहाज से पिचिंग भी लगाई जाएगी। इसके अलावा हल्दी डेंगा क्षेत्र में वन्य जीवों को जंगल से बाहर जाने से रोकने को तार फेंसिंग और उनके पानी की सुविधा को वाटर हॉल बनाए जाएंगे।
टाइगर रिजर्व में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा और वनों एवं वन्य जीवों से जिलाधिकारी के लगाव के चलते टाइगर रिजर्व के अधिकारी भी उत्साहित हैं। उन्हें आस बंधी है कि शायद अब टाइगर रिजर्व में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने को अच्छे बजट की व्यवस्था हो जाएगी। इसी क्रम में यहां बराही के जंगल में सप्त सरोवर को भी अच्छे ढंग से विकसित किए जाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। सप्त सरोवर को विकसित करने को लगभग 50 लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसके तहत सप्त सरोवर का सौंदर्यीकरण करने, पर्यटकों के ठहरने को दो थारू हटों का निर्माण, पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पिचिंग निर्माण और सरोवर में पानी सप्लाई का सोलर पंप लगाने आदि कार्य शामिल हैं। यदि सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो जल्द ही पर्यटकों की आमद सप्त सरोवर में भी शुरू हो जाएगी।
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सप्त सरोवर और चूका बीच में यह दिखेगा अंतर
चूका बीच में जहां एक ओर हरे भरे जंगलों के बीच शारदा डैम का मनोहारी दृश्य देखने को मिलता है, वहीं सप्त सरोवर में ब्रिटिश काल की बनी सात झाल उसके सामने हरे-भरे जंगलों के एक ओर जंगल की तलहटी में दूर-दूर तक बसी बंगालियों की आबादी देखने को मिल सकेगी। इसी रेंज में ब्रिटिश काल में बना खूबसूरत बराही विश्राम भवन भी है। जहां कड़ाके की ठंड शुरू होते ही गेस्ट हाउस के चारों ओर वन्य जीव देखने को मिलते हैं। समीप रेशम फार्म के निकट भी वन्यजीव आसानी से देखने को मिल सकेंगे।
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हल्दीडेंगा में फिर मजबूत होगी तार फेंसिंग
तराई के हल्दीडेंगा क्षेत्र में वन्य जीव तार फेंसिंग लांघकर मैदानी क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। जंगल से बाहर निकले वन्यजीव जंगल से सटे खेतों में फसलों को खासा नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसको लेकर तार फेसिंग को और अधिक मजबूत किया जाएगा। साथ ही जंगल क्षेत्र में वन्यजीवों की पानी की सुविधा के लिए वाटर हॉल में बनाए जाएंगे।
इको टूरिज्म को बेहतर करने के लगातार चल रहे हैं। वन्यजीव जंगल से बाहर न जा सके, इसको लेकर हल्दीडेंगा में लगी तार फेसिंग को और अधिक मजबूत किया जाएगा।
अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी