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एक्सपर्ट की फौज फिर भी हत्थे नहीं चढ़ रहा बाघ
Updated Sun, 20 Aug 2017 05:11 PM IST
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पीलीभीत। खूनी हो चुके बाघ को पकड़ने के लिए एक्सपर्ट की टीम पिछले 10 दिन से डेरा डाले हुए है। बाघ के संभावित स्थानों पर पड्डे बांधे गए साथ ही पिंजरों में भी मांस लगाया गया लेकिन दिन के समय बाघ की चहलकदमी न होने के कारण सब कवायद बेकार होती नजर आ रही है। अब एक और पड्डे को बांधने के साथ खेत में 15 फिट ऊंचा मचान बनाया गया है।
वनकटी के जंगल से निकलकर जहानाबाद और अमरिया क्षेत्र में पहुंचे खूनी बाघ ने 10 अगस्त को कुंवरसेन के रूप में तीसरा शिकार किया था। इसके बाद ट्रैंक्युलाइजिंग एक्सपर्ट, वन्यजीव विशेषज्ञ सहित कई अधिकारी लखनऊ, दिल्ली एवं दुधवा नेशनल पार्क से पीलीभीत पहुंचे हैं। जहानाबाद क्षेत्र के गांव हिमकनपुर के निकट बाघ के पदचिह्न मिलने पर गन्ने के खेत में पड्डे बांध कर बाघ को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बाघ अब तक तीन पड्डे मार चुका है। इतना ही नहीं खेत के पास खड़े किए गए ट्रैक्टर के टायर से बांधकर जो मांस रखा गया उसे भी बाघ खींच ले गया लेकिन वनविभाग की टीम उसे पकड़ने में नाकामयाब रही। शनिवार को वनसंरक्षक वीके सिंह ने स्वयं हिमकनपुर पहुंच बाघ पकड़ने की व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने एक पड्डा और बांधने एवं मचान बनाने के निर्देश दिए थे। वन संरक्षक के निर्देश पर पड्डा बांधने के साथ मचान बनाने का काम शुरू हुआ जो रविवार को पूरा हो गया। वन संरक्षक ने बताया कि बाघ को लोकेट कर लिया गया है। सही समय और सही मौके का इंतजार है। कभी भी उसे बेहोश कर पकड़ा जा सकता है।
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खेत में पानी के चलते आ रही दिक्कत
हिमकनपुर में जिस स्थान पर बाघ के पदचिह्न मिल रहे हैं उस क्षेत्र में खेतों में भी पानी भरा है साथ ही कुछ दूरी पर नदी भी है। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसने पकड़ने को लगी टीम को यदि दिन के समय गन्ने केे खेत में बाघ दिख भी गया तो भी उसे ट्रैंक्युलाइज नहीं किया जा सकेगा क्योंकि बेहोशी का इंजेक्शन लगने के बाद पानी में गिरने पर बाघ की मौत भी हो सकती है। दूसरी सबसे बड़ी समस्या बाघ रात के समय ही खेतों में पहुंचकर पड्डों को मार रहा है। चूंकि एनटीसीए की गाइड लाइन के अनुसार बाघ को पकड़ने का अभियान सुबह 4.30 बजे से शाम 5.30 तक ही चल सकता है। इसके अलावा क्षेत्र में गन्ने के साथ नरकुल, सेंट, बड़ी घास व नदी में उसे छिपने की पर्याप्त जगह मिल रही है। इसको देखते हुए अब वन विभाग ने पानी के खेत से कुछ हटकर दूसरे सूखे खेत में पड्डा बांधा है साथ ही उस तक पहुंचने के लिए मांस के कुछ टुकड़े भी डाले हैं।
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कैमरे में दिखी चहलकदमी
खूनी बाघ की निगरानी के लिए आसपास लगे कैमरों में पहले उसकी फोटो आई थी। अब शनिवार की रात एक वीडियो भी रिकार्ड हुआ है। इस वीडियो में टाइगर नदी की ओर से टहलता हुआ गन्ने के खेत तक आता दिखाई दिया है।
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बाघ को पकड़ने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। पड्डा बांधने के साथ ही मचान भी बनाया गया है। रात को बाघ के दिखने पर उसे ट्रैक्युलाइज करना तो मुश्किल है लेकिन एक बार दिखने पर उसकी खोजने में मदद मिल सकती है। उम्मीद है बाघ जल्द पकड़ा जाएगा।
- वीके सिंह, वन संरक्षक
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वनकटी के जंगल से निकलकर जहानाबाद और अमरिया क्षेत्र में पहुंचे खूनी बाघ ने 10 अगस्त को कुंवरसेन के रूप में तीसरा शिकार किया था। इसके बाद ट्रैंक्युलाइजिंग एक्सपर्ट, वन्यजीव विशेषज्ञ सहित कई अधिकारी लखनऊ, दिल्ली एवं दुधवा नेशनल पार्क से पीलीभीत पहुंचे हैं। जहानाबाद क्षेत्र के गांव हिमकनपुर के निकट बाघ के पदचिह्न मिलने पर गन्ने के खेत में पड्डे बांध कर बाघ को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बाघ अब तक तीन पड्डे मार चुका है। इतना ही नहीं खेत के पास खड़े किए गए ट्रैक्टर के टायर से बांधकर जो मांस रखा गया उसे भी बाघ खींच ले गया लेकिन वनविभाग की टीम उसे पकड़ने में नाकामयाब रही। शनिवार को वनसंरक्षक वीके सिंह ने स्वयं हिमकनपुर पहुंच बाघ पकड़ने की व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने एक पड्डा और बांधने एवं मचान बनाने के निर्देश दिए थे। वन संरक्षक के निर्देश पर पड्डा बांधने के साथ मचान बनाने का काम शुरू हुआ जो रविवार को पूरा हो गया। वन संरक्षक ने बताया कि बाघ को लोकेट कर लिया गया है। सही समय और सही मौके का इंतजार है। कभी भी उसे बेहोश कर पकड़ा जा सकता है।
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खेत में पानी के चलते आ रही दिक्कत
हिमकनपुर में जिस स्थान पर बाघ के पदचिह्न मिल रहे हैं उस क्षेत्र में खेतों में भी पानी भरा है साथ ही कुछ दूरी पर नदी भी है। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसने पकड़ने को लगी टीम को यदि दिन के समय गन्ने केे खेत में बाघ दिख भी गया तो भी उसे ट्रैंक्युलाइज नहीं किया जा सकेगा क्योंकि बेहोशी का इंजेक्शन लगने के बाद पानी में गिरने पर बाघ की मौत भी हो सकती है। दूसरी सबसे बड़ी समस्या बाघ रात के समय ही खेतों में पहुंचकर पड्डों को मार रहा है। चूंकि एनटीसीए की गाइड लाइन के अनुसार बाघ को पकड़ने का अभियान सुबह 4.30 बजे से शाम 5.30 तक ही चल सकता है। इसके अलावा क्षेत्र में गन्ने के साथ नरकुल, सेंट, बड़ी घास व नदी में उसे छिपने की पर्याप्त जगह मिल रही है। इसको देखते हुए अब वन विभाग ने पानी के खेत से कुछ हटकर दूसरे सूखे खेत में पड्डा बांधा है साथ ही उस तक पहुंचने के लिए मांस के कुछ टुकड़े भी डाले हैं।
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कैमरे में दिखी चहलकदमी
खूनी बाघ की निगरानी के लिए आसपास लगे कैमरों में पहले उसकी फोटो आई थी। अब शनिवार की रात एक वीडियो भी रिकार्ड हुआ है। इस वीडियो में टाइगर नदी की ओर से टहलता हुआ गन्ने के खेत तक आता दिखाई दिया है।
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बाघ को पकड़ने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। पड्डा बांधने के साथ ही मचान भी बनाया गया है। रात को बाघ के दिखने पर उसे ट्रैक्युलाइज करना तो मुश्किल है लेकिन एक बार दिखने पर उसकी खोजने में मदद मिल सकती है। उम्मीद है बाघ जल्द पकड़ा जाएगा।
- वीके सिंह, वन संरक्षक