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सोशल मीडिया से हटेंगे नेताओं के फोटो और संदेश
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पीलीभीत। सोशल मीडिया से नेताओं के फोटो और संदेश हटेंगे। सरकारी वेबसाइटों से भी फोटो हटाए जाएंगे। सरकार के सभी संदेश और चुनाव को प्रभावित करने वाले स्लोगन, भाषण को भी हटाया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने इसको लेकर आदेश जारी किया है।
प्रथम चरण में 11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव होगा। इसको लेकर निर्वाचन आयोग ने चारों तरफ से घेराबंदी करानी शुरू कर दी है। वोटरों के लिए जहां सुविधा दी जा रही है, वहीं चुनाव को प्रभावित करने वाले उन सभी बिंदुओं पर कार्य किया जा रहा है जिससे वोटर भ्रमित होकर मतदान करेंगे। इसको लेकर चुनाव आयोग की सबसे पहली नजर सोशल मीडिया पर है। इसको लेकर आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया से लेकर सरकारी वेबसाइटों से नेताओं के फोटो को हटाया जाएगा। यह ही नहीं उनके द्वारा जारी किए गए संदेश और स्लोगन भी मिटाए जाएंगे। सोशल मीडिया पर प्रभावी तरीके से निगरानी रखी जाएगी। ताकि नेताओं का फोटो या संदेश डालकर चुनाव को प्रभावित न किया जा सके। आयोग के निर्देश पर जिला स्तरीय एमसीएम (मीडिया सर्टिफेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी) के सदस्य इस पर नजर रखेंगे। अधिसूचना के बाद इस तरह के नेताओं के फोटो को हटवाने की कार्रवाई की जाएगी। एमसीएम के सदस्य सिटी मजिस्ट्रेट ऋतु पुनिया ने बताया कि समिति में अध्यक्ष डीएम और उपाध्यक्ष एडीएम है। विधानसभा वार सदस्यों को इसकी जिम्मेदारी मिलेगी। अमल नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के लिए सोशल मीडिया बनेगा चुनौती
मतदान के दौरान फेसबुक और व्हाट्सएप पर सूचनाओं पर प्रतिबंध लगाना प्रशासन के लिए चुनौती रहेगा। हर घर में चार-पांच लोग फेसबुक और व्हाट्सएप चलाते हैं। लोग ट्विटर पर भी सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा एसएमएस का भी लोग इस्तेमाल कर लेते है। इन सभी गतिविधियों पर नजर रखना प्रशासन पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी रहेगा।
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प्रथम चरण में 11 अप्रैल को लोकसभा चुनाव होगा। इसको लेकर निर्वाचन आयोग ने चारों तरफ से घेराबंदी करानी शुरू कर दी है। वोटरों के लिए जहां सुविधा दी जा रही है, वहीं चुनाव को प्रभावित करने वाले उन सभी बिंदुओं पर कार्य किया जा रहा है जिससे वोटर भ्रमित होकर मतदान करेंगे। इसको लेकर चुनाव आयोग की सबसे पहली नजर सोशल मीडिया पर है। इसको लेकर आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया से लेकर सरकारी वेबसाइटों से नेताओं के फोटो को हटाया जाएगा। यह ही नहीं उनके द्वारा जारी किए गए संदेश और स्लोगन भी मिटाए जाएंगे। सोशल मीडिया पर प्रभावी तरीके से निगरानी रखी जाएगी। ताकि नेताओं का फोटो या संदेश डालकर चुनाव को प्रभावित न किया जा सके। आयोग के निर्देश पर जिला स्तरीय एमसीएम (मीडिया सर्टिफेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी) के सदस्य इस पर नजर रखेंगे। अधिसूचना के बाद इस तरह के नेताओं के फोटो को हटवाने की कार्रवाई की जाएगी। एमसीएम के सदस्य सिटी मजिस्ट्रेट ऋतु पुनिया ने बताया कि समिति में अध्यक्ष डीएम और उपाध्यक्ष एडीएम है। विधानसभा वार सदस्यों को इसकी जिम्मेदारी मिलेगी। अमल नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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प्रशासन के लिए सोशल मीडिया बनेगा चुनौती
मतदान के दौरान फेसबुक और व्हाट्सएप पर सूचनाओं पर प्रतिबंध लगाना प्रशासन के लिए चुनौती रहेगा। हर घर में चार-पांच लोग फेसबुक और व्हाट्सएप चलाते हैं। लोग ट्विटर पर भी सक्रिय रहते हैं। इसके अलावा एसएमएस का भी लोग इस्तेमाल कर लेते है। इन सभी गतिविधियों पर नजर रखना प्रशासन पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी रहेगा।
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