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अधिक वेतन ले रहे थे ड्रमंड कॉलेज के प्रधानाचार्य
Updated Wed, 11 Oct 2017 11:27 PM IST
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पीलीभीत।
शहर के ड्रमंड राजकीय कॉलेज के प्रधानाचार्य श्यामा कुमार पिछले कई माह से अधिक वेतन ले रहे थे। शिकायत में हुई जांच में मामला सामने आने पर डीआईओएस ने उनका वेतन 1,08800 रुपये प्रतिमाह से घटा कर 83300 रुपये निर्धारित कर दिया है। हालांकि इस कार्रवाई को प्रधानाचार्य ने अनुचित बताते हुए मामले में हाईकोर्ट से स्टे लाने की बात कही है।
ड्रमंड से पहले श्यामाकुमार 2005 से 2008 तक शाहजहांपुर के राजकीय इंटर कॉलेज कलान में प्रधानाचार्य रहे। उसके बाद इनकी तैनाती झांसी, सहारनपुर में भी राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य पद पर रही। सहारनपुुर से तीन साल पहले इनका स्थानांतरण शासन ने जिले के गभिया सहराई स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में कर दिया। करीब दो साल पहले इनका स्थानांतरण जिले के न्यूरिया इंटर कॉलेज में कर दिया गया। वहां से करीब डेढ़ साल पहले उनका स्थानांतरण शहर के ड्रमंड राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य पद पर कर दिया गया। बताया जाता है कि वर्ष 2008 में जब ये शाहजहांपुर में तैनात थे तभी उन्होंने अपना वेतन स्वयं निर्धारण कर लिया और उसे उच्चाधिकारी से अनुमोदित नहीं कराया। कमीशन से जब इनकी पहली नियुक्ति हुई तब इनका वेतनमान 8000-13500 रुपये था, जब छठा वेतनमान लगा तब इनका वेतनमान बढ़ कर 15600 से 39100 व ग्रेड पे 5400 हो गया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इन्हें छठे वेतन आयोग के लागू होने पर जो वेतनमान निर्धारित हुआ, वहीं इन्हें लेना चाहिए था, लेकिन इन्होंने शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान ही ग्रेड पे पहले 6600 कर लिया फिर बाद में 7600 कर लिया, जबकि ये ग्रेड पे संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर के अधिकारी को देय है।
करीब एक माह पहले किसी ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की गई। शासन के निर्देश पर डीएम ने इसकी जांच जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार वर्मा को सौंपी। डीआईओएस ने जब इसकी वित्तीय जांच वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा से कराई तो पता चला कि पिछले काफी समय से यह मूलवेतन के रूप में 1,08,800 रुपये प्रतिमाह लेते आ रहे थे जबकि इन्हें मात्र 83300 रुपये मिलना चाहिए था। इस तरह यह प्रतिमाह 25500 रुपये प्रतिमाह गलत ढंग से ले रहे थे। डीआईओएस ने लेखाधिकारी की रिपोर्ट के बाद उनका वेतन 83300 रुपये सितंबर माह से निर्धारित कर दिया है।
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मुझे जो वेतन प्राप्त हो रहा था वह सही है। अब वर्तमान में जो वेतन लेखाधिकारी द्वारा निर्धारित किया गया है वह गलत है। मैंने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इसमे मुझे स्टे मिल गया है।
श्यामा कुमार, प्रधानाचार्य ड्रमंड इंका
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जांच में पाया गया कि ड्रमंड कालेज के प्रधानाचार्य श्यामाकुमार स्वयं से वेतन निर्धारण कर 25500 रुपये प्रतिमाह अधिक वेतन ले रहे थे। लेखाधिकारी की रिपोर्ट के बाद उसे कम कर दिया गया है। हाईकोर्ट से स्टे की कोई जानकारी नहीं है न ही ऐसा कोई आदेश मुझे प्राप्त हुआ है।
राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस
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शहर के ड्रमंड राजकीय कॉलेज के प्रधानाचार्य श्यामा कुमार पिछले कई माह से अधिक वेतन ले रहे थे। शिकायत में हुई जांच में मामला सामने आने पर डीआईओएस ने उनका वेतन 1,08800 रुपये प्रतिमाह से घटा कर 83300 रुपये निर्धारित कर दिया है। हालांकि इस कार्रवाई को प्रधानाचार्य ने अनुचित बताते हुए मामले में हाईकोर्ट से स्टे लाने की बात कही है।
ड्रमंड से पहले श्यामाकुमार 2005 से 2008 तक शाहजहांपुर के राजकीय इंटर कॉलेज कलान में प्रधानाचार्य रहे। उसके बाद इनकी तैनाती झांसी, सहारनपुर में भी राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य पद पर रही। सहारनपुुर से तीन साल पहले इनका स्थानांतरण शासन ने जिले के गभिया सहराई स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में कर दिया। करीब दो साल पहले इनका स्थानांतरण जिले के न्यूरिया इंटर कॉलेज में कर दिया गया। वहां से करीब डेढ़ साल पहले उनका स्थानांतरण शहर के ड्रमंड राजकीय इंटर कालेज में प्रधानाचार्य पद पर कर दिया गया। बताया जाता है कि वर्ष 2008 में जब ये शाहजहांपुर में तैनात थे तभी उन्होंने अपना वेतन स्वयं निर्धारण कर लिया और उसे उच्चाधिकारी से अनुमोदित नहीं कराया। कमीशन से जब इनकी पहली नियुक्ति हुई तब इनका वेतनमान 8000-13500 रुपये था, जब छठा वेतनमान लगा तब इनका वेतनमान बढ़ कर 15600 से 39100 व ग्रेड पे 5400 हो गया। विभागीय सूत्रों के मुताबिक इन्हें छठे वेतन आयोग के लागू होने पर जो वेतनमान निर्धारित हुआ, वहीं इन्हें लेना चाहिए था, लेकिन इन्होंने शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान ही ग्रेड पे पहले 6600 कर लिया फिर बाद में 7600 कर लिया, जबकि ये ग्रेड पे संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर के अधिकारी को देय है।
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करीब एक माह पहले किसी ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की गई। शासन के निर्देश पर डीएम ने इसकी जांच जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार वर्मा को सौंपी। डीआईओएस ने जब इसकी वित्तीय जांच वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा से कराई तो पता चला कि पिछले काफी समय से यह मूलवेतन के रूप में 1,08,800 रुपये प्रतिमाह लेते आ रहे थे जबकि इन्हें मात्र 83300 रुपये मिलना चाहिए था। इस तरह यह प्रतिमाह 25500 रुपये प्रतिमाह गलत ढंग से ले रहे थे। डीआईओएस ने लेखाधिकारी की रिपोर्ट के बाद उनका वेतन 83300 रुपये सितंबर माह से निर्धारित कर दिया है।
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मुझे जो वेतन प्राप्त हो रहा था वह सही है। अब वर्तमान में जो वेतन लेखाधिकारी द्वारा निर्धारित किया गया है वह गलत है। मैंने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इसमे मुझे स्टे मिल गया है।
श्यामा कुमार, प्रधानाचार्य ड्रमंड इंका
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जांच में पाया गया कि ड्रमंड कालेज के प्रधानाचार्य श्यामाकुमार स्वयं से वेतन निर्धारण कर 25500 रुपये प्रतिमाह अधिक वेतन ले रहे थे। लेखाधिकारी की रिपोर्ट के बाद उसे कम कर दिया गया है। हाईकोर्ट से स्टे की कोई जानकारी नहीं है न ही ऐसा कोई आदेश मुझे प्राप्त हुआ है।
राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस
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