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मौके पर जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा सके वनअफसर
Updated Tue, 20 Jun 2017 07:03 PM IST
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पीलीभीत। टाइगर के लगातार हो रहे हमलों से लोगों आक्रोश बढ़ रहा है। मंगलवार को घटना स्थल पर जमा ग्रामीणों का आक्रोश देख वनविभाग के अफसर एवं कर्मचारी मौके पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। महोफ रेंज में बैठकर वन अफसर पल-पल की जानकारी लेते रहे। मौके पर मौजूद एसडीएम और सीओ सदर मोर्चा संभाले रहे।
टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में यह 14वीं घटना है जबकि इस क्षेत्र में पांचवीं घटना है। अभी दो रदिन पूर्व ही इसी क्षेत्र के रूपपुर मरौरी निवासी केवल प्रसाद को बाघ ने मार डाला था। एक दिन बाद ही एक और घटना होने से ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया। घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीण बार बार डीएफओ को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। गुस्सा इतना था कि गालियां तक दे रहे थे और यदि कोई वनकर्मी मौके पर पहुंच जाता तो हमला निश्चित था। इसकी सूचना मिलने पर वनविभाग के अफसर मौके पर जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा सके। इस बीच भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची एसडीएम सदर पूर्णिमा सिंह व सीओ सदर धर्मसिंह ने मोर्चा संभाला और ग्रामीणों, प्रधान, मृतक के घरवालों से कई बार अलग अलग वार्ता की। इस दौरान एसडीएम ने वनाधिकारियों से भी मुआवजे को लेकर वार्ता की। वार्ता के बाद एसडीएम ने घरवालों को वनविभाग और राजस्व प्रशासन की ओर से 10 का मुआवजा दिलाने और जंगल की तार फेसिंग के लिए बजट मिलते ही काम शुरू कराने का आश्वासन देकर दिया। इसके बाद वह लोग शव का पंचनामा कराने को राजी हुए। इसके बाद शव पोस्टमार्टम को भेजा जा सका।
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एसडीएम को समझते रहे डीएम
घटना के बाद एसडीएम पूर्णिमा सिंह फोर्स के साथ पहुंची। मौके पर मौजूद ग्रामीण काफी आक्रोशित थे और बार बार डीएफओ को मौके पर बुलाने की बात कह रहे थे। इस बीच एसडीएम को देख किसी ने कहा कि लो डीएम साहब आ गईं। इसके बाद वहां मौजूद सभी लोग उन्हें डीएम समझकर ही वार्ता करते रहे और उनके आश्वासन पर शांत भी हो गए। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक को भी डीएम के मौके पर होने की सूचना दे दी, लेकिन विधायक के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने पर पोल तब खुल गई जब उन्होंने पूछा डीएम कहा हैं। यहां एसीएम ने उन्हें बताया कि मौके पर उन्होंने ही वार्ता की है। इस पर पीएम हाउस पर मौजूद ग्रामीण भी भौचक्के रह गए।
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टाइगर रिजर्व से सटे क्षेत्र में यह 14वीं घटना है जबकि इस क्षेत्र में पांचवीं घटना है। अभी दो रदिन पूर्व ही इसी क्षेत्र के रूपपुर मरौरी निवासी केवल प्रसाद को बाघ ने मार डाला था। एक दिन बाद ही एक और घटना होने से ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया। घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीण बार बार डीएफओ को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे थे। गुस्सा इतना था कि गालियां तक दे रहे थे और यदि कोई वनकर्मी मौके पर पहुंच जाता तो हमला निश्चित था। इसकी सूचना मिलने पर वनविभाग के अफसर मौके पर जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा सके। इस बीच भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची एसडीएम सदर पूर्णिमा सिंह व सीओ सदर धर्मसिंह ने मोर्चा संभाला और ग्रामीणों, प्रधान, मृतक के घरवालों से कई बार अलग अलग वार्ता की। इस दौरान एसडीएम ने वनाधिकारियों से भी मुआवजे को लेकर वार्ता की। वार्ता के बाद एसडीएम ने घरवालों को वनविभाग और राजस्व प्रशासन की ओर से 10 का मुआवजा दिलाने और जंगल की तार फेसिंग के लिए बजट मिलते ही काम शुरू कराने का आश्वासन देकर दिया। इसके बाद वह लोग शव का पंचनामा कराने को राजी हुए। इसके बाद शव पोस्टमार्टम को भेजा जा सका।
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एसडीएम को समझते रहे डीएम
घटना के बाद एसडीएम पूर्णिमा सिंह फोर्स के साथ पहुंची। मौके पर मौजूद ग्रामीण काफी आक्रोशित थे और बार बार डीएफओ को मौके पर बुलाने की बात कह रहे थे। इस बीच एसडीएम को देख किसी ने कहा कि लो डीएम साहब आ गईं। इसके बाद वहां मौजूद सभी लोग उन्हें डीएम समझकर ही वार्ता करते रहे और उनके आश्वासन पर शांत भी हो गए। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक को भी डीएम के मौके पर होने की सूचना दे दी, लेकिन विधायक के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने पर पोल तब खुल गई जब उन्होंने पूछा डीएम कहा हैं। यहां एसीएम ने उन्हें बताया कि मौके पर उन्होंने ही वार्ता की है। इस पर पीएम हाउस पर मौजूद ग्रामीण भी भौचक्के रह गए।
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