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जिले में चरम पर बुखार, किशोर सहित पांच की चली गई जान

Tue, 18 Sep 2018 12:07 AM IST
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:07 AM IST
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जिले में चरम पर बुखार, किशोर सहित पांच की चली गई जान
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बुखार का सितम, किशोर सहित पांच की चली गई जान
एक बच्चे की मौत पर जिला अस्पताल में हंगामा
बीस दिन में बुखार से 26 लोग गवां चुके हैं जान, कई बीमार
क्रासर..
केंद्रीय मंत्री के आदर्श गांव में भी बुखार से एक की मौत
पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे सुधार के दावे, बीस दिन से फैली बुखार की बीमारी ने खोखले साबित कर दिए है। मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मरीजों को इलाज के लिए की गई व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। बीते 24 घंटे में बुखार से पांच लोगों की मौत हो गई। जिले में अब बुखार से बीस दिन में मरने वालों की संख्या 26 पहुंच गई है। भारी संख्या में अभी भी लोग बीमार हैं। मेडिकल टीमें भले ही चेकअप के बाद मरीजों को दवाएं मुहैया कराने का दावा कर रही हो, लेकिन ऐसा कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाया जा सका है। जिससे तेजी से फैल रहे बुखार की रोकथाम हो सके।
बीसलपुर के गांव अखौली निवासी बादाम सिंह का बेटा आशुतोष (11) बुखार से पीड़ित था। सात दिन पूर्व तेज बुखार आने पर आशुतोष को उपचार के लिए सीएचसी भर्ती कराया गया। रविवार रात करीब दो बजे आशुतोष की तबियत बिगड़ी तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां कुछ घंटे बाद ही तेज बुखार आने पर आशुतोष की जान चली गई। परिवारीजन ने नर्स पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। चिकित्सकों के मुताबिक आशुतोष कोमा में था, उसकी हालत ज्यादा खराब थी।
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न्यूरिया। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का आदर्श गांव पंडरी में बुखार ने कई लोगों को अपनी चपेट में ले रखा है। पडनी गांव के रहने वाले अमन कुमार मौर्य (17) की तेज बुखार से मौत हो गई। पिता राजेंद्र कुमार ने बताया कि सात दिन पूर्व बुखार आने पर अमन को शहर के निजी अस्पताल भर्ती कराया। यहां बुखार नहीं उतरने पर अमन को बरेली के निजी अस्पताल रेफर कर दिया। यहां से दो दिन पूर्व अमन की छुट्टी कर दी गई। रविवार रात आठ बजे अचानक तेज बुखार आने पर अमन की जान चली गई।
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बिलसंडा। गांव नवादा अमृत में कमलादेवी (45) की तेज बुखार से मौत हो गई। परिवारीजनों ने बताया कि सात दिन से कमला देवी बुखार से ग्रसित थी। रविवार शाम वह बीसलपुर सीएचसी दवा लेने जा रही थीं। रास्ते में अचानक तेज बुखार आने के दौरान कमला देवी की मौत हो गई। एमओआईसी डॉ. श्रीराम ने बताया कि बुखार से मौत होने की बात सामने आई है, इसकी जांच कराई जाएगी।
बीसलपुर। नगर के मोहल्ला पटेलनगर निवासी ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि पिता शोभाराम (65) पांच दिन से बुखार से ग्रसित थे। नगर के ही एक बंगाली डॉक्टर के क्लीनिक से उनका इलाज चल रहा था। सोमवार सुबह तेज बुखार आने पर अचानक पिता शोभाराम की जान चली गई। गांव हीरापुर दुही के प्रधान नरेश चंद्र ने बताया कि गांव का संतराम (59) को चार दिन पूर्व तेज बुखार आने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई लेकिन किसी ने गांव में आने की जहमत नहीं उठाई, जिस कारण संतराम को झोलाछाप डॉक्टर की शरण लेनी पड़ी। बेहतर उपचार नहीं मिलने के कारण सोमवार दोपहर संतराम की बुखार से मौत हो गई। सीएचसी अधीक्षक डॉ. ठाकुरदास ने बताया कि दोनों ही मामलों की उनको जानकारी नहीं है। टीमें गांवों में भेजकर इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि मीरपुर ग्रंट, लुहिचा, मिघौना और खनंका गांवों में शिविर लगाकर बुखार पीड़ितों का उपचार किया जा रहा है।
चुर्रासकतपुर- प्रधान गंगा देवी ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीसलपुर के अधीक्षक को पत्र भेजकर अपने गांव में शिविर लगवाकर बुखार पीड़ितों का उपचार कराने की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि उनके गांव में तेज बुखार काफी समय से फैला हुआ है। एक सप्ताह पूर्व एक ग्रामीण की तेज बुखार से मौत भी हो चुकी है और इस समय कई लोग पीड़ित हैं।
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जांच के नाम पर डराकर कर रहे उगाही
जिले भर में बुखार, मलेरिया आदि संक्रामक रोग फैले हुए हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई की लचर व्यवस्था रोग फैलने कास मुख्य कारण बन रही है। स्वास्थ्य विभाग के शिविर भी कारगर साबित नहीं हो रहे है। हालांकि बुखार के नाम पर सबसे अधिक फायदा गांवों में बैठे झोलाछाप और निजी चिकित्सक जमकर उठा रहे हैं। यह चिकित्सक बुखार के मरीज पहुंचते ही उनके हीमोग्लोबीन, मलेरिया, टाइफाइड आदि की जांच करा दी जाती हैं। इसके एवज में मरीज को करीब 500 से 100 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं, जबकि चिकित्सक को मोटा कमीशन मिलता है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मरीज को संबंधित रोग की दवा देने के साथ-साथ दवाई, सीरप आदि लिख दिया जाता है। मरीज को कहां से दवाई लानी है, यह भी लिख दिया जाता है। इन दिनों कुछ ऐसा ही हाल शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
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वर्जन-
बीसलपुर सीएचसी से रेफर किए आशुतोष की हालत काफी गंभीर थी। वह कोमा में थे। नर्स ने दर्द का इंजेक्शन लगाया था। परिजनों का आरोप नर्स पर गलत इंजेक्शन लगाने का था, शव का पोस्टमार्टम होने के बाद मौत की असल वजह का पता लग सकेगा।- डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, सीएमएस

वर्जन-
सभी चिकित्सकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। बीसलपुर, बरखेड़ा, पूरनपुर के कई गांवों में शिविर लगाकर लोगों की जांच कर दवा दी जा रही है। साथ ही एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है। बीसलपुर के बुखार ग्रसित क्षेत्र के कई गांवों का आज दौरा भी किया गया। - डा. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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