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कर्जमाफी की आस में उमड़ी किसानों की भीड़, हावी रहीं अव्यवस्थाएं
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पीलीभीत। कर्जमाफी के लिए प्रदेश सरकार के अंतिम मौका देने पर आस बंधी तो किसान जिला मुख्यालय स्थित एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) पर उमड़ पड़े। जिा दूरजराज के किसान तो सुबह ही जिला मुख्यालय पहुंचकर लाइन में लग गए। दस बजे तो हालात ये हो गए कि एनआईसी से जिला जज के आवास तक यानी करीब दो सौ मीटर लंबी लाइन लग गई। भूखे-प्यासे किसान आवेदन के लिए घंटों लाइन में लगे रहे।
प्रदेश सरकार की ओर से लघु और सीमांत किसानों का फसल ऋण मोचन योजना के तहत एक लाख तक का ऋण माफ किए जाने के लिए किसानों को अंतिम मौका दिया गया। इसके लिए बाकायदा कलक्ट्रेट परिसर में हेल्प डेस्क खोली गई। सोमवार को आवेदन का अंतिम दिन होने की वजह से हजारों किसान कर्ज माफी की आस में पहुंचेे, लेकिन दलालों के सक्रिय होने के चलते छिटपुट हंगामे के बीच उनके फार्म जमा हो सके। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस मौके को भुनाने के लिए पांच हजार से अधिक किसान आवेदन कर चुके हैं। ऋण मोचन योजना के तहत अंतिम दिन तीन हजार आवेदन जमा हुए। हालांकि पहले जमा हुए आवेदनों में सिर्फ पांच सौ किसान ही पात्रता की श्रेणी में बताए जा रहे हैं।
अंतिम दिन कलक्ट्रेट में उमड़ी किसानों की भीड़ हेल्प डेस्क पर पर भी जमी रही। योजना का लाभ लेने के लिए किसान केसीसी कार्ड, खसरा और बैंक खाते की स्टेटमेंट के साथ आवेदन पत्र जमा करने पहुंचे थे। इस दौरान उनको फार्म जमा करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दलालों के सक्रिय होने के कारण लाइन में लगे किसानों की कर्मचारियों से नोकझोंक हो गई। किसानों का आरोप था कि कई घंटे लाइन में लगने के बाद भी उनका फार्म जमा नहीं किया जा रहा। काउंटर के बाहर खड़े एक होमगार्ड से तो धक्का-मुक्की तक हो गई।
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प्रदेश सरकार की ओर से लघु और सीमांत किसानों का फसल ऋण मोचन योजना के तहत एक लाख तक का ऋण माफ किए जाने के लिए किसानों को अंतिम मौका दिया गया। इसके लिए बाकायदा कलक्ट्रेट परिसर में हेल्प डेस्क खोली गई। सोमवार को आवेदन का अंतिम दिन होने की वजह से हजारों किसान कर्ज माफी की आस में पहुंचेे, लेकिन दलालों के सक्रिय होने के चलते छिटपुट हंगामे के बीच उनके फार्म जमा हो सके। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस मौके को भुनाने के लिए पांच हजार से अधिक किसान आवेदन कर चुके हैं। ऋण मोचन योजना के तहत अंतिम दिन तीन हजार आवेदन जमा हुए। हालांकि पहले जमा हुए आवेदनों में सिर्फ पांच सौ किसान ही पात्रता की श्रेणी में बताए जा रहे हैं।
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अंतिम दिन कलक्ट्रेट में उमड़ी किसानों की भीड़ हेल्प डेस्क पर पर भी जमी रही। योजना का लाभ लेने के लिए किसान केसीसी कार्ड, खसरा और बैंक खाते की स्टेटमेंट के साथ आवेदन पत्र जमा करने पहुंचे थे। इस दौरान उनको फार्म जमा करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दलालों के सक्रिय होने के कारण लाइन में लगे किसानों की कर्मचारियों से नोकझोंक हो गई। किसानों का आरोप था कि कई घंटे लाइन में लगने के बाद भी उनका फार्म जमा नहीं किया जा रहा। काउंटर के बाहर खड़े एक होमगार्ड से तो धक्का-मुक्की तक हो गई।
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