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बाढ़ को लेकर नेपाल संवेदनशील, भारतीय अफसर रेत के बोरों में भी कर रहे खेल
Updated Thu, 07 Jun 2018 08:00 PM IST
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07 पीबीटीपी 19, 20
बाढ़ को लेकर नेपाल संवेदनशील, भारतीय अफसर कर रहे खेल
बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर अभियंता-ठेकेदार गठजोड़ हावी
पिछले दस सालों से बाढ़ नियंत्रण कार्यों के नाम पर बहाई जा रही है मोटी रकम
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत/माधोटांडा। पड़ोसी देश नेपाल ने जहां अल्प संसाधनों के दम पर अपने नागरिकों की रक्षा को सीमा तक बाढ़ से बचाव के ठोस इंतजाम कर डाले, वहीं स्थानीय सिंचाई विभाग महज रेत भरे बोरे नदी में डालकर बाढ़ नियंत्रण कार्यों की इतिश्री में लगा हुआ है। बानगी के तौर पर देखे तो नेपाल ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को शारदा व जगबूड़ा नदी की बाढ़ से बचाने के व्यापक इंतजाम किए। वहीं स्थानीय सिंचाई विभाग बाढ़ व भूकटान से होने वाली बर्बादी रोकने को महज रेत भरे बोरों की ठोकरें बनाने में भी खेल करता आ रहा हैं।
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शुरू से ही लापरवाह रहा है सरकारी तंत्र
देश के नक्शे में पहले कभी वमनी नदी का नामोनिशान नहीं था, लेकिन वर्ष 1980 व 1989 में जब शारदा में बाढ़ आई और नेपाली क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ तो नेपाल सरकार ने कोरियन कंपनी की मदद से अपने सीमावर्ती इलाके को मजबूत करने के साथ एक छोटी माइनर इंडो-नेपाल सीमा के पिलर नंबर 28 पर डाली थी। एक ही बरसात में यह छोटी माइनर वमनी नदी में तबदील हो गई। बाद में नेपाल ने पहाड़ी नालों को भी उसी से जोड़ दिया। आज वमनी नदी शारदा से भी ज्यादा तबाही मचाती आ रही है। लोगों ने इसका विरोध किया। पूर्व विधायक वीएम सिंह ने आंदोलन किया। इस पर तत्कालीन सरकार एक प्रोजेक्ट बनाकर तो भेजा, लेकिन राज्य बाढ़ नियंत्रण परिषद ने प्रोजेक्ट को यह कहकर रद्दी की टोकरी में डाल दिया कि इससे एक तो नेपाल के नदी-नाले प्रभावित होंगे, दूसरे इसको बनाने से पूर्व रक्षा मंत्रालय की अनुमति लेनी होगी।
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नेपाल ने बनाए तीन झूला पुल, भारतीय बहाते रहे पानी में पैसा
नेपाल सरकार ने पिछले दस वर्षों में सीमा से सटे अपने इलाके के नागरिकों को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करने को जगबूङ़ा नदी पर दस किमी की परिधि में तीन झूला पुल बना दिए, ताकि यदि बाढ़ आए तो नेपाली नागरिक इन झूला पुलों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सके। साथ ही सीमावर्ती इलाके तक का क्षेत्र बाढ़ से सुरक्षित करने को शारदा नदी पर भी तटबंध बना दिया। वहीं अपने जिले में पूरे वर्ष शारदा नदी पर धेले भर का कार्य नहीं कराया गया और अब जब कार्य शुरू कराए गए तो हौचपौच में पानी में ही रेत से भरे बोरे डालकर खानापूरी की जा रही है। पिछले दस वर्षों से जो कार्य नदी पर कराए गए, उनमें अधिकांश कार्य नदी की भेंट चढ़ चुके हैं।
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अभियंता-ठेकेदार गठजोड़ से लगते रहे कामों पर प्रश्नचिह्न
वर्तमान में जो कार्य टेंडर कराकर कराए जा रहे हैं उसमें ठेकेदार विभागीय दरों से 40 से 50 प्रतिशत कम दरों पर कार्य कर रहे हैं। यह तब है जब महंगाई बढ़ी है। कुछ कार्य ऐसे हैं जो आज भी बिना टेंडर किए अपने निजी ठेकेदारों से कराए जा रहे हैं या यह कहा जाए कि अभियंता स्वयं ठेकेदारी कर रहे हैं और अपने निजी ठेकेदारों के नाम भुगतान कर बंदरबांट करने लगे। ऐसे में कार्यों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लाजिमी है।
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वर्जन-
शारदा नदी पर सरकार से मिलने वाले बजट के अनुसार बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जा रहे हैं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उसके लिए अभियंताओं को निगरानी के लिए लगाया गया है।
शैलेष अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड
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07 पीबीटीपी 19, 20
बाढ़ को लेकर नेपाल संवेदनशील, भारतीय अफसर कर रहे खेल
बाढ़ नियंत्रण कार्यों पर अभियंता-ठेकेदार गठजोड़ हावी
पिछले दस सालों से बाढ़ नियंत्रण कार्यों के नाम पर बहाई जा रही है मोटी रकम
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत/माधोटांडा। पड़ोसी देश नेपाल ने जहां अल्प संसाधनों के दम पर अपने नागरिकों की रक्षा को सीमा तक बाढ़ से बचाव के ठोस इंतजाम कर डाले, वहीं स्थानीय सिंचाई विभाग महज रेत भरे बोरे नदी में डालकर बाढ़ नियंत्रण कार्यों की इतिश्री में लगा हुआ है। बानगी के तौर पर देखे तो नेपाल ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को शारदा व जगबूड़ा नदी की बाढ़ से बचाने के व्यापक इंतजाम किए। वहीं स्थानीय सिंचाई विभाग बाढ़ व भूकटान से होने वाली बर्बादी रोकने को महज रेत भरे बोरों की ठोकरें बनाने में भी खेल करता आ रहा हैं।
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शुरू से ही लापरवाह रहा है सरकारी तंत्र
देश के नक्शे में पहले कभी वमनी नदी का नामोनिशान नहीं था, लेकिन वर्ष 1980 व 1989 में जब शारदा में बाढ़ आई और नेपाली क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ तो नेपाल सरकार ने कोरियन कंपनी की मदद से अपने सीमावर्ती इलाके को मजबूत करने के साथ एक छोटी माइनर इंडो-नेपाल सीमा के पिलर नंबर 28 पर डाली थी। एक ही बरसात में यह छोटी माइनर वमनी नदी में तबदील हो गई। बाद में नेपाल ने पहाड़ी नालों को भी उसी से जोड़ दिया। आज वमनी नदी शारदा से भी ज्यादा तबाही मचाती आ रही है। लोगों ने इसका विरोध किया। पूर्व विधायक वीएम सिंह ने आंदोलन किया। इस पर तत्कालीन सरकार एक प्रोजेक्ट बनाकर तो भेजा, लेकिन राज्य बाढ़ नियंत्रण परिषद ने प्रोजेक्ट को यह कहकर रद्दी की टोकरी में डाल दिया कि इससे एक तो नेपाल के नदी-नाले प्रभावित होंगे, दूसरे इसको बनाने से पूर्व रक्षा मंत्रालय की अनुमति लेनी होगी।
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नेपाल ने बनाए तीन झूला पुल, भारतीय बहाते रहे पानी में पैसा
नेपाल सरकार ने पिछले दस वर्षों में सीमा से सटे अपने इलाके के नागरिकों को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान करने को जगबूङ़ा नदी पर दस किमी की परिधि में तीन झूला पुल बना दिए, ताकि यदि बाढ़ आए तो नेपाली नागरिक इन झूला पुलों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर पहुंच सके। साथ ही सीमावर्ती इलाके तक का क्षेत्र बाढ़ से सुरक्षित करने को शारदा नदी पर भी तटबंध बना दिया। वहीं अपने जिले में पूरे वर्ष शारदा नदी पर धेले भर का कार्य नहीं कराया गया और अब जब कार्य शुरू कराए गए तो हौचपौच में पानी में ही रेत से भरे बोरे डालकर खानापूरी की जा रही है। पिछले दस वर्षों से जो कार्य नदी पर कराए गए, उनमें अधिकांश कार्य नदी की भेंट चढ़ चुके हैं।
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अभियंता-ठेकेदार गठजोड़ से लगते रहे कामों पर प्रश्नचिह्न
वर्तमान में जो कार्य टेंडर कराकर कराए जा रहे हैं उसमें ठेकेदार विभागीय दरों से 40 से 50 प्रतिशत कम दरों पर कार्य कर रहे हैं। यह तब है जब महंगाई बढ़ी है। कुछ कार्य ऐसे हैं जो आज भी बिना टेंडर किए अपने निजी ठेकेदारों से कराए जा रहे हैं या यह कहा जाए कि अभियंता स्वयं ठेकेदारी कर रहे हैं और अपने निजी ठेकेदारों के नाम भुगतान कर बंदरबांट करने लगे। ऐसे में कार्यों की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लाजिमी है।
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वर्जन-
शारदा नदी पर सरकार से मिलने वाले बजट के अनुसार बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जा रहे हैं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उसके लिए अभियंताओं को निगरानी के लिए लगाया गया है।
शैलेष अग्रवाल, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड