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सूफी संत सेल्हा मियां के सालाना उर्स का कुल के साथ समापन
Updated Tue, 13 Mar 2018 07:36 PM IST
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मुुल्क व कौम की तरक्की की दुआ को उठे हजारों हाथ
सूफी संत सेल्हा मियां के सालाना उर्स का कुल के साथ समापन
13 पीबीटीपी 18
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। सूफी संत सैयद सेल्हा मियां की दरगाह पर चल रहे पांच दिवसीय सालाना उर्स का कुल शरीफ की रस्म के साथ समापन हो गया। जिसमें अकीदतमंदों ने मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआएं मांगी। कुल शरीफ के साथ ही जायरीन के वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया। हालांकि यहां जायरीन व दुकानदार दो दिन बाद तक जमे रहते हैं।
बराही रेंज में जंगल से सटे सेल्हा गांव स्थित सेल्हा मियां के दरगाह पर चल रहे उर्स में मंगलवार को होने वाले कुल के चलते सोमवार शाम से ही दूर दराज से आने वाले जायरीन के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पूरी रात जायरीन बसों, कारों व अन्य वाहनों से दरगाह तक पहुंचे। मंगलवार सुबह करीब साढ़े दस बजे कुलशरीफ के रस्म की शुरूआत की गई। हाजी अरशद अली ने फातिहा पढ़ने के साथ मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआएं मांगी। इससे पूर्व मेला कमेटी के सदस्यों ने शांतिपूर्ण ढंग से मेला संपन्न कराने में सहयोग करने पर मेला इंचार्ज नरेश कश्यप को पगड़ी बांधकर सम्मानित किया। कमेटी पदाधिकारियों व सदस्यों की दस्तारबंदी की गई। इधर उर्स के अंतिम दिन मेला परिसर जायरीन से पटा रहा। हलवा पराठा की दुकानों के अलावा अन्य दुकानों पर भी लोगों ने जमकर खरीदारी की। इधर कुलशरीफ की रस्म के बाद से दूर दराज से आए जायरीन के अपने गंतव्यों पर वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया। देर शाम तक सड़कों पर वाहन दौड़ते नजर आए।
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सूफी संत सेल्हा मियां के सालाना उर्स का कुल के साथ समापन
13 पीबीटीपी 18
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। सूफी संत सैयद सेल्हा मियां की दरगाह पर चल रहे पांच दिवसीय सालाना उर्स का कुल शरीफ की रस्म के साथ समापन हो गया। जिसमें अकीदतमंदों ने मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआएं मांगी। कुल शरीफ के साथ ही जायरीन के वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया। हालांकि यहां जायरीन व दुकानदार दो दिन बाद तक जमे रहते हैं।
बराही रेंज में जंगल से सटे सेल्हा गांव स्थित सेल्हा मियां के दरगाह पर चल रहे उर्स में मंगलवार को होने वाले कुल के चलते सोमवार शाम से ही दूर दराज से आने वाले जायरीन के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पूरी रात जायरीन बसों, कारों व अन्य वाहनों से दरगाह तक पहुंचे। मंगलवार सुबह करीब साढ़े दस बजे कुलशरीफ के रस्म की शुरूआत की गई। हाजी अरशद अली ने फातिहा पढ़ने के साथ मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआएं मांगी। इससे पूर्व मेला कमेटी के सदस्यों ने शांतिपूर्ण ढंग से मेला संपन्न कराने में सहयोग करने पर मेला इंचार्ज नरेश कश्यप को पगड़ी बांधकर सम्मानित किया। कमेटी पदाधिकारियों व सदस्यों की दस्तारबंदी की गई। इधर उर्स के अंतिम दिन मेला परिसर जायरीन से पटा रहा। हलवा पराठा की दुकानों के अलावा अन्य दुकानों पर भी लोगों ने जमकर खरीदारी की। इधर कुलशरीफ की रस्म के बाद से दूर दराज से आए जायरीन के अपने गंतव्यों पर वापस लौटने का सिलसिला शुरू हो गया। देर शाम तक सड़कों पर वाहन दौड़ते नजर आए।
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