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सरकारी महकमे ही उजाड़ रहे बाघों के ठिकाने.. जंगलों में कैसे रुकें बाघ

Mon, 18 Feb 2019 07:10 PM IST
Prashant Singh Prashant Singh
Updated Mon, 18 Feb 2019 07:10 PM IST
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सरकारी महकमे ही उजाड़ रहे बाघों के ठिकाने.. जंगलों में कैसे रुकें बाघ
माधोटांडा/पीलीभीत। बाघों के संरक्षण के लिए जहां सुप्रीम कोर्ट इको सेंसेटिव जोन निर्धारित करने पर जोर दे रहा है। वहीं चंद रुपये के लालच में बाघों का वास स्थल नष्ट किया जा रहा है। टाइगर रिजर्व के कोर जोन से सटे शारदा डैम में खड़े नरकुल को बिना निकासी आदेश के ही काटा जा रहा है। हालांकि इसे रोकने के लिए पूर्व में टाइगर रिजर्व प्रशासन ने प्रयास भी किए, लेकिन वनकर्मियों की सांठगांठ के चलते नरकुल का कटान रुक नहीं सका। यही वजह है कि सुरक्षित ठिकाना उजड़ने से बाघ जंगल से बाहर की ओर आबादी वाले इलाके का रुख कर रहे हैं।
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टाइगर रिजर्व की बराही और महोफ रेंज की सीमा से सटा शारदा डैम है। यहां डैम के जीरो से लेकर 10 किमी तक सिल्ट होने के चलते नरकुल एवं घास का विशाल जंगल विकसित हो गया है। यही इलाका बाघों का सुरक्षित वास स्थल माना जाता है। वजह यह है कि घास से तृणभोजी वन्यजीवों को पर्याप्त चारा मिल जाता है और बाघ तथा तेंदुओं को इस इलाके में अपना शिकार बनाना आसान हो जाता है।
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वास स्थल नष्ट होने से खतरे में बाघों की सुरक्षा
टाइगर रिजर्व और उससे सटे इलाकों में नरकुल के कटान से बाघों और तेंदुओं की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती जा रही है।
यही वजह है कि पिछले वर्षों में शारदा डैम में बाघ का शव भी बरामद हो चुका है। उसके शव पर भी नरकुल और घास पड़ी थी। यही वजह है कि वास स्थलों का सफाया होने से बाघ शाम होते ही शिकार की तलाश में जंगल से बाहर निकल रहे हैं।
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कोर जोन से सटे शारदा डैम के आसपास नरकुल का जंगल बाघों समेत अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित वासस्थल है। इसकी नीलामी पर रोक लगाने के लिए पूर्व से ही सिंचाई विभाग से पत्राचार किया जा रहा है। इसके अलावा नरकुल की निकासी पर भी पूरी तरह रोक लगाई गई है। इसके बावजूद अगर नरकुल की कटाई हो रही है, तो इस पर रोक लगाने के प्रयास किए जाएंगे। - आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, पीटीआर
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